डॉ यासमीन मूमल की ग़ज़ल

1212 /1122/ 1212/22/ मुफ़ाइलुन/फ़इलातुन/मुफ़ाइलुन/फ़ेलुन/ ग़मे'हयात में मुस्कान बन के आए हो।। ख़िज़ां के दौर में रंगे'बहार लाए हो।। न शर्मसार किये हो न आज़माए हो। ग़ुरूर ये है फ़क़त दिल से दिल लगाए हो।। हज़ारों रंग के ख़्वाबों के हैं लगे मेले। मेरी निगाह में जबसे हुज़ूर आए हो।। मेरे नसीब से...

निज़ाम फतेहपुरी की ग़ज़ल – यूॅं किसी से झूठ कह दूॅं ये हुनर में मेरे नइं

ख़ूबसूरत हैं तो होने दो नज़र में मेरे नइं। यूॅं किसी से झूठ कह दूॅं ये हुनर में मेरे नइं।। तुम कहीं अपना चलाओ जाके जादू हुस्न का। औरों को होगी ज़रूरत तेरी घर में मेरे नइं।। ज़िंदगी तो एक धोका है फ़ना होंगे सभी। हैं मुसाफ़िर सब कोई...

निज़ाम फतेहपुरी की ग़ज़ल

छन-छन के हुस्न उनका यूँ निकले नक़ाब से। जैसे  निकल  रही  हो  किरण  माहताब  से।। पानी  में  पाँव  रखते  ही  ऐसा  धुआँ  उठा। दरिया में आग  लग  गई  उनके  शबाब से।। जल में ही जल के मछलियाँ तड़पें इधर-उधर। फिर भी  नहा  रहे  न  डरें  वो  आज़ाब  से।। तौहीन  प्यार ...

संजय ग्रोवर की दो ग़ज़लें

ग़ज़ल-1 ऐ ख़ुदा! तू हो न हो पर मैं परेशानी में हूं तैरना आता नहीं और आग़ के पानी में हूं मुझको मुझसे पूछे बिन दुनिया में क्यूं लाया गया! जबसे मैं पैदा हुआ तबसे ही हैरानी में हूं कबसे आंखें मल रहा दुनिया के मेले देखकर ज़िंदगी में ऐसे...

बृज राज किशोर ‘राहगीर’ का गीत – हौसलों को पंख दूँगा

मैं तुझे आग़ोश में लेकर दिखाऊँगा कभी। ज़िंदगी हक़ से तुझे अपना बनाऊँगा कभी।। हौसलों को पंख दूँगा, चाहतों को आसमाँ। बेसहारों को सहारा, बेज़ुबानों को ज़ुबाँ। सिर्फ़ अपने ही लिए जीना नहीं आता मुझे, है यही कोशिश कि पहुँचूँ पीड़ितों के दरमियाँ। पोंछकर आँसू सभी के मुस्कुराऊँगा कभी। ज़िंदगी हक़...

कारगिल विजय दिवस पर डॉ. यासमीन मूमल की ग़ज़ल – बच नहीं पाता कोई भारत से टकराने के बाद

परचमे' इंसानियत सरहद पे लहराने के बाद। सर क़लम करते हैं हम दुश्मन को समझाने के बाद।। कारगिल की जंग से दुश्मन ये ले ले अब सबक़। बच नहीं पाता कोई भारत से टकराने के बाद।। पीछे हटना हमने सीखा ही नहीं है फ़ितरतन। इक दफ़ा दुश्मन को अपने...