दो लघु कथाएं : कृष्ण कुमार यादव

दहेज – 
आज सुबह से ही घर में चहल-पहल थी। कौन क्या पहनेगा, क्या खाने का मेन्यू होगा,  कौन मेहमानों को रिसीव करेगा, वगैरह-वगैरह। आखिर ऋचा को देखने लड़के वाले जो आ रहे थे ।
टिंग…टांग…..बेल बजते ही मम्मी-पापा खुश हो गये। तमाम औपचारिकताओं, बातों, स्वागत और जलपान के बाद ऋचा को देखने की बारी आयी। ऋचा तो खूबसूरत थी ही, सो उन्हें वह पसंद आ गयी। उसके रंग-रूप की सराहना के साथ-साथ गुणों की भी लड़के वालों ने तरीफ की। ऋचा के साथ साथ उसके मम्मी-पापा भी आश्वस्त हो गए कि अब शादी पक्की समझी जाए।
सब लोग एक साथ लंच पर बैठे तो बात चलते-चलते दहेज पर आ गयी। ज्यों ही दहेज की बात शुरू हुई तो ऋचा की खुशी काफूर हो गयी। वह मजबूती के साथ बोली-”माफ कीजिएगा अंकल, मैं शादी इंसान से करूँगी, बाजार में बिकाऊ आपके बेटे से नहीं। मुझे खिलौने से नहीं खेलना बल्कि अपनी जिंदगी को खुशनुमा बनाना है। आपका दहेजू बेटा आपको ही मुबारक।”
इन्वेस्टमेंट –
जबसे कार्यालय में साक्षात्कार आरंभ हुआ है, रामप्रसाद जी के चेहरे पर अजीब सी मुस्कान तैरती है। आखिर लोगों का भला करने के साथ-साथ वे अपना भी तो भला कर रहे थे। हर सीट के लिए उन्होंने रेट तय कर दिए थे। पर रिश्तेदारों से कैसे निपटें। वे तो हर चीज मुफ्त में चाहते हैं और इधर लाखों का नुकसान। ऊपर से वरिष्ठ अधिकारियों को भी तो खुश रखना है।
तभी पी.ए. ने बताया कि एक व्यक्ति उनसे मिलना चाहता है। कुछ देर बाद उसे अन्दर मिलने के लिए बुलवाया। मुलाकाती हाल ही में सरकारी ओहदे से रिटायर्ड हुआ एक बुजुर्ग व्यक्ति था।
”……..बताएँ कैसे आना हुआ?”
”सर, सुना है आपके कार्यालय में क्लर्क पद के लिए साक्षात्कार चल रहा है। मैं चाहता हूँ कि मेरा इकलौता बेटा भी एडजस्ट हो जाए।”
”आप तो जानते ही हैं…….”
इससे पहले कि रामप्रसाद जी की बात पूरी होती, बुजुर्ग व्यक्ति तपाक से बोला- ”उसकी चिंता न करें। आपकी माँग पूरी कर दूँगा। बस किसी तरह मेरा बेटा आपके महकमे में फिट हो जाए।”
”……. आप तो काफी समझदार हैं।”
”आखिकार मैं भी तो सरकारी ओहदे से रिटायर्ड हूँ। अपनी पेंशन की अच्छी-खासी राशि यहाँ इन्वेस्ट करूँगा तो उसे दुगुना करने में पाँच साल का भी इंतजार नहीं करना पड़ेगा। आजकल तो क्लर्कों की चाँदी है।”
रामप्रसाद जी ने अपने पी0ए0 को बुलाया और दूर के एक रिश्तेदार का नाम काटकर उस बुजुर्ग व्यक्ति के पुत्र का नाम अंकित करने को कहा।
अब दोनों अपने-अपने इन्वेस्टमेंट से खुश थे।  दहेज / इन्वेस्टमेण्ट - दो लघुकथाएं - कृष्ण कुमार यादव 3
संपर्क : कृष्ण कुमार यादव, निदेशक डाक सेवाएँ, लखनऊ (मुख्यालय) परिक्षेत्र, उ.प्र.-226001 
मो0- 09413666599  ई-मेलः  kkyadav.t@gmail.com

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