नए विमर्श का प्रतिनिधि आख्यान है अनंत विजय की कृति ‘मार्क्सवाद का अर्धसत्य’

"मार्क्सवाद का अर्धसत्य”, अनंत विजय, वाणी प्रकाशन, नई दिल्ली, 2019,सजिल्द, पृष्ठ संख्या-295,मूल्य-695 रुपये जीवन एवं जगत के अंतिम सत्य की खोज एक शाश्वत अनवरत यात्रा है एवं मानव की यह खोजयात्रा सदियों से चल रही है। इस यात्रा की शाब्दिक एवं बौद्धिक अभिव्यक्ति साहित्य और...

पुस्तक समीक्षा : श्रापित किन्नर उपन्यास में किन्नर संघर्ष की अभिव्यक्ति

"श्रापित किन्नर उपन्यास में किन्नरों को अपने श्रापित होने का दंश झेलना पड़ता है। यही श्रापित का दंश उन्हें समाज से लड़ने को प्रेरित करता है। उसमे अकरम (पुरुष) सहायता करता है। नरगिस , हिना और जावेद तीनो " मैं भी इंसान हूँ "...

राकेश शंकर भारती की कलम से राज कमल के उपन्यास ‘बाँसुरीवाली’ की समीक्षा

इधर अपनी ज़िंदगी की उत्थल-पुत्थल से समय निकालकर राजकमल जी का उपन्यास बाँसुरीवाली पढ़ा है। इस बार के दिल्ली विश्व पुस्तक मेले में अमन प्रकाशन के स्टाल पर राज कमल जी से मिलना मेरे लिए एक सुखद अनुभव था। राज कमल जी सादगी के...

डॉ. विभा सिंह की कलम से ‘गाँव गाँव गोरख नगर नगर नाथ’ पुस्तक की समीक्षा

समीक्षक - डॉ. विभा सिंह साधना भारतीय संस्कृति में साधक को सिद्ध बनाने वाली मानी जाती है और ‘नाथ’ सिद्ध के पर्याय भी हैं और विशेष उपलब्धि के सूचक भी। गोरखनाथ का आविर्भाव जिस काल में हुआ था वह समय भारतीय साधना में बड़े उथल-पुथल...

विजय कुमार तिवारी की कलम से – ‘लोकतंत्र के पहरुए’ की राजनीतिक चेतना

समीक्षित कृति : लोकतंत्र के पहरुए(उपन्यास); उपन्यासकार : पद्मा शर्मा; मूल्य : रु 350/- प्रकाशक : सान्निध्य बुक्स, दिल्ली साहित्य की औपन्यासिक विधा का अपना महत्व है। हिन्दी में उपन्यास खूब लिखे गये हैं,लिखे जा रहे हैं और हिन्दी साहित्य उपन्यास लेखन से समृद्ध है। जीवन...

डॉ जितेन्द्र जीतू की कलम से – प्रेम और रिश्तों की कवयित्री : शोभा स्वप्निल

समीक्षक : डॉ जीतेंद्र जीतू शोभा स्वप्निल से मेरी प्रथम भेंट नजीबाबाद आकाशवाणी केंद्र पर करीब बीस साल पहले हुई थी। हम शायद एक काव्य गोष्ठी में सम्मिलित होने पहुंचे थे। मुझे अब स्मरण नहीं कि उनकी पहली किताब जो स्वप्नों पर थी, तब तक...