-
प्रो. सरोज शर्मा
वैविध्यपूर्ण सामाजिक ताने-बाने में ‘सभी के लिए शिक्षा’ का स्वरूप व्यापक है और इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए भारत सरकार स्कूली स्तर पर निःशुल्क और अनिवार्य शिक्षा के प्रति कटिबद्ध है। शिक्षा का अधिकार प्रत्येक बच्चे का मौलिक अधिकार है और इसके लिए अनेक रूपों में हरसंभव प्रयास किया जाना चाहिए। राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एन.ई.पी.) इस द्रष्टिकोण को परिपुष्ट करती है। इसके तहत ‘सर्व शिक्षा अभियान’ और ‘समग्र शिक्षा’ जैसे पहलुओं को और अधिक मजबूत किया जा रहा है। प्रत्येक बच्चे को निःशुल्क और अनिवार्य शिक्षा का अधिकार (Right to Education) 3 से 18 वर्ष की आयु तक विस्तारित किया गया है।
शिक्षा राष्ट्र के आर्थिक और सामाजिक विकास का महत्वपूर्ण स्तंभ है। शिक्षित नागरिक एक मजबूत लोकतंत्र की नींव होते हैं। इसलिए सभी बच्चों के लिए समावेशी और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करने हेतु ठोस कदम उठाना वास्तव में समय की मांग है, ताकि वे भविष्य के लिए तैयार हो सकें और एक समृद्ध, न्यायपूर्ण और समानता आधारित समाज के निर्माण में योगदान दे सकें। राष्ट्रीय शिक्षा नीति में ड्रॉपआउट बच्चों की संख्या कम करने और सभी स्तरों पर शिक्षा की सार्वभौमिक पहुँच सुनिश्चित करने के अनेक चिंतन विंदु निर्दिष्ट किये गए हैं जो निश्चित ही आगे के लिए पथप्रदर्शक बनेंगे।


