होमग़ज़ल एवं गीतडॉ राजेश श्रीवास्तव की ग़ज़ल ग़ज़ल एवं गीत डॉ राजेश श्रीवास्तव की ग़ज़ल By Editor November 16, 2024 3 180 Share FacebookTwitterPinterestWhatsApp जीने के अंदाज अलग हैं । कुछ तो हैं जो राज़ अलग हैं।। कल देखे जो चेहरे हमने । पर वो चेहरे आज अलग हैं।। अपनी ढपली राग लपेटे । सबके अपने साज़ अलग हैं।। ताजमहल भी खूब बनाए । सबके सिर के ताज़ अलग हैं।। कहने को तो कह भी देता । पर सबके हमराज़ अलग हैं ।। =================== डॉ राजेश श्रीवास्तव निदेशक रामायण केन्द्र, भोपाल Share FacebookTwitterPinterestWhatsApp पिछला लेखश्यामल बिहारी महतो का व्यंग्य – प्राइवेट बीवीअगला लेखपाकिस्तान के शायर सलमान हैदर की कविता – मैं भी काफ़िर, तू भी काफ़िर Editor RELATED ARTICLES ग़ज़ल एवं गीत डॉ. शिवनारायण की ग़ज़लें October 3, 2026 ग़ज़ल एवं गीत बलजीत सिंह की गज़लें August 22, 2026 ग़ज़ल एवं गीत हरकीरत हीर की तीन ग़ज़लें August 8, 2026 3 टिप्पणी वाह! बेहतरीन ग़ज़ल डॉ. राजेश श्रीवास्तव जी की। जवाब दें बहुत अच्छी ग़ज़ल है राजेश जी आपकी, एकदम मस्त। छोटी और प्यारी सी। जीने के अंदाज अलग हैं। कुछ तो हैं जो राज़ अलग हैं।। *सबके अपने-अपने राज होते ही हैं।* कल देखे जो चेहरे हमने , पर वो चेहरे आज अलग हैं।। *समय के साथ बदलना फितरत है मतलबी लोगों की।* अपनी ढपली राग लपेटे । सबके अपने साज़ अलग हैं।। *सही है।* ताजमहल भी खूब बनाए । सबके सिर के ताज़ अलग हैं।। कहने को तो कह भी देता । पर सबके हमराज़ अलग हैं ।। *सही। सबसे सब कुछ नहीं कहा जाता।* जवाब दें वाह एक बेहतरीन ग़ज़ल आदरणीय —– कहने अन्दाज़ अलग हैं। बधाई व शुभकामनाएँ जवाब दें कोई जवाब दें जवाब कैंसिल करें टिप्पणी: कृपया अपनी टिप्पणी दर्ज करें! नाम:* कृपया अपना नाम यहाँ दर्ज करें ईमेल:* आपने एक गलत ईमेल पता दर्ज किया है! कृपया अपना ईमेल पता यहाँ दर्ज करें वेबसाइट: Save my name, email, and website in this browser for the next time I comment. Δ This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed. Most Popular कविताएँ बोधमिता की November 26, 2018 कहानीः ‘तीर-ए-नीमकश’ – (प्रितपाल कौर) August 5, 2018 शोध आलेख : हिन्दी ग़ज़ल का संक्षिप्त इतिहास एवं नवछंद विधान – हिंदकी March 22, 2020 अपनी बात…… April 6, 2018 और अधिक लोड करें Latest निज़ाम फतेहपुरी के दोहे October 3, 2026 दीपक शर्मा की कहानी कुर्सी के कवि October 3, 2026 सीमा द्विवेदी की दो कविताएँ October 3, 2026 नीलिमा शर्मा की कहानी – लम्हों ने खता की, सदियों ने सजा पायी October 3, 2026 और अधिक लोड करें
बहुत अच्छी ग़ज़ल है राजेश जी आपकी, एकदम मस्त। छोटी और प्यारी सी। जीने के अंदाज अलग हैं। कुछ तो हैं जो राज़ अलग हैं।। *सबके अपने-अपने राज होते ही हैं।* कल देखे जो चेहरे हमने , पर वो चेहरे आज अलग हैं।। *समय के साथ बदलना फितरत है मतलबी लोगों की।* अपनी ढपली राग लपेटे । सबके अपने साज़ अलग हैं।। *सही है।* ताजमहल भी खूब बनाए । सबके सिर के ताज़ अलग हैं।। कहने को तो कह भी देता । पर सबके हमराज़ अलग हैं ।। *सही। सबसे सब कुछ नहीं कहा जाता।* जवाब दें
वाह! बेहतरीन ग़ज़ल डॉ. राजेश श्रीवास्तव जी की।
बहुत अच्छी ग़ज़ल है राजेश जी आपकी, एकदम मस्त। छोटी और प्यारी सी।
जीने के अंदाज अलग हैं।
कुछ तो हैं जो राज़ अलग हैं।।
*सबके अपने-अपने राज होते ही हैं।*
कल देखे जो चेहरे हमने ,
पर वो चेहरे आज अलग हैं।।
*समय के साथ बदलना फितरत है मतलबी लोगों की।*
अपनी ढपली राग लपेटे ।
सबके अपने साज़ अलग हैं।।
*सही है।*
ताजमहल भी खूब बनाए ।
सबके सिर के ताज़ अलग हैं।।
कहने को तो कह भी देता ।
पर सबके हमराज़ अलग हैं ।।
*सही। सबसे सब कुछ नहीं कहा जाता।*
वाह
एक बेहतरीन ग़ज़ल आदरणीय
—– कहने अन्दाज़ अलग हैं।
बधाई व शुभकामनाएँ