Thursday, October 8, 2026
होमग़ज़ल एवं गीतडॉ राजेश श्रीवास्तव की ग़ज़ल

डॉ राजेश श्रीवास्तव की ग़ज़ल

जीने के अंदाज अलग हैं ।
कुछ तो हैं जो राज़ अलग हैं।।
कल देखे जो चेहरे हमने ।
पर वो चेहरे आज अलग हैं।।
अपनी ढपली राग लपेटे ।
सबके अपने साज़ अलग हैं।।
ताजमहल भी खूब बनाए ।
सबके सिर के ताज़ अलग हैं।।
कहने को तो कह भी देता ।
पर सबके हमराज़ अलग हैं ।‌।
===================
डॉ राजेश श्रीवास्तव
निदेशक रामायण केन्द्र, भोपाल
RELATED ARTICLES

3 टिप्पणी

  1. बहुत अच्छी ग़ज़ल है राजेश जी आपकी, एकदम मस्त। छोटी और प्यारी सी।

    जीने के अंदाज अलग हैं।
    कुछ तो हैं जो राज़ अलग हैं।।

    *सबके अपने-अपने राज होते ही हैं।*

    कल देखे जो चेहरे हमने ,
    पर वो चेहरे आज अलग हैं।।
    *समय के साथ बदलना फितरत है मतलबी लोगों की।*

    अपनी ढपली राग लपेटे ।
    सबके अपने साज़ अलग हैं।।

    *सही है।*

    ताजमहल भी खूब बनाए ।
    सबके सिर के ताज़ अलग हैं।।

    कहने को तो कह भी देता ।
    पर सबके हमराज़ अलग हैं ।‌।
    *सही। सबसे सब कुछ नहीं कहा जाता।*

कोई जवाब दें

कृपया अपनी टिप्पणी दर्ज करें!
कृपया अपना नाम यहाँ दर्ज करें

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

Most Popular

Latest