- चंद्रकान्त पाराशर वरिष्ठ पत्रकार
एनसीआर दिल्ली : 10 जुलाई 2026 का दिन क्रिया योग परंपरा और संपूर्ण मानव चेतना के इतिहास में एक और आलौकिक अध्याय के रूप में दर्ज हो गया,जब परम श्रद्धेय योगिराज शैलेंद्र शर्मा जी के 69वें जन्मोत्सव और उनकी दिव्य जीवनी “शैलेन्द्र एक श्मशानवासी की जीवन कथा” का भव्य और दिव्य विमोचन समारोह गंगा बाग कोठी दस बीसा स्थित “सिद्ध सिद्धांत योग अकादमी” परिसर गोवर्धन जिला मथुरा उत्तर प्रदेश में समारोह पूर्वक आयोजित किया गया। इस दिव्य जीवनी की लेखिका शुभ्रा पाठक शर्मा हैं, जिन्होंने एक कालजयी व्यक्तित्व-कृतित्व को शब्दों में व्यक्त करने का पावन व महान कार्य संपन्न किया है।
योगीराज शैलेंद्र शर्मा क्रिया योग परंपरा के एक अत्यंत सशक्त और अद्वितीय हस्ताक्षर हैं। उन्हें अमर गुरु महावतार बाबाजी की प्रामाणिक गुरु-शिष्य परंपरा में पांचवें गुरु के रूप में जाना जाता है। उनका जीवन और उनकी शिक्षाएं आधुनिक युग में क्रिया-योग को उसके सबसे गूढ़ और वैज्ञानिक रूप में प्रस्तुत करती हैं।
ज्ञातव्य है कि यह जन्मोत्सव और पुस्तक-विमोचन समारोह भू देवी पृथ्वी ग्रह के सबसे सुंदर और दिव्य ऐतिहासिक परिसर में स्थित पंच तीर्थ कुण्ड पर आयोजित हुआ जहाँ द्वापर-युग में स्वंय भगवान श्री कृष्ण ने अपनी पटरानियों की उत्तर क्रियाओं की पूर्ण आहुति दी थी;जहां श्री कृष्ण के बाल सखा उद्धव ने भागवत कथा का उपदेश दिया था।पंचतीर्थ कुण्ड के किनारे इस समारोह का मंच सजा था। जहां आदिनाथ शिवशंकर का अवधूत स्वरुप स्वंय प्रकट होकर स्थापित है।जहां आदिशक्ति विराजमान हैं;जहां महावतार बाबा जी महाराज का नित्य निवास है।जहां पवन पुत्र हनुमान जी का जागृत कंचन वर्ण विग्रह स्थापित है।जहां भैरव जी की अनेकानेक दिव्य शक्तियों की लीलाएं नित होती रहती हैं।
समारोह का संचालन गायक,लेखक और अभिनेता श्री गीत सागर ने किया और गुरु जी के वरिष्ठ शिष्य विजयानंद नरवरिया और पुस्तक की लेखिका शुभ्रा पाठक ने उपस्थित जनों को संबोधित किया। इस अवसर योगिराज ने अपने उद्बोधन में कहा कि “लेखिका शुभ्रा उनकी भतीजी हैं,सात वर्ष की आयु से मेरे साथ रहते हुऐ उनके जीवन में घटित घटनाओं को बहुत अच्छे से समझा और देखा है और आज ये पुस्तक लिखी है। पुस्तक में वर्णित कहानियां और अनुभवों,घटनाओं का यौगिक विश्लेषण है जो सत्य के अन्वेषकों को उनकी खोज में सहायक होगा….”
कार्यक्रम अपनी पूर्ण दिव्यता और भव्यता के साथ प्रारंभ हुआ, गुरुदेव का मंचासीन होना, संगीत की सुरमयी स्वर लहरियों का प्रवाह, रंग बिरंगी लाईट्स का जलना और आतिशबाजी की चमक एक साथ, पूरे परिसर का जगमगाना और गुरुदेव के आशीष वचनों के साथ अद्भुत ढंग से संपन्न हुआ।

उल्लेखनीय है कि गोवर्धन-धाम वासी योगिराज का जीवन स्वयं में एक साक्षात् उपनिषद की मानिंद है। उनकी इस जीवन-कथा के माध्यम से आने वाली पीढ़ियाँ और विश्व भर के सत्यान्वेषकों या खोजी साधक क्रिया योग विद्या के गूढ़ रहस्यों, उनके अलौकिक अनुभवों और सत्य के उस उच्चतम शिखर से परिचित हो सकेंगे जहाँ वे स्वयं विराजमान हैं।
‘शैलेन्द्र एक श्मशानवासी की जीवन कथा’ इस वेब साइट पर उपलब्ध है। https://www.shailendrasharmabooks.com/

सुंदर सार्थक और सटीक रिपोर्ट।