Monday, March 9, 2026
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सूर्यकांत शर्मा की कविता – ऑपरेशन सिंदूरी

शौर्य पर कोई सवाल नहीं
कोई कायराना बवाल नहीं।
डंके की चोट पर
आतंक को पीटते
और उसे घसीटते
दुनिया को परोसते।
ऑपरेशन सिंदूर से
सिंदूरी हुआ,
मेरे भारत का भाल।
युद्ध और शांति में
शक्ति ही आराध्यते।
हैवानियत को दुत्कारते
शैतानियत को ललकारते
ऑपरेशन सिंदूर से अपने
वीरत्व को निखारते।
युद्ध तो युद्ध है…
कोई करुणामयी बुद्ध नहीं।
छल कपट को त्यागते
शत्रु के सीने को विदारते
देश के जन ऑपरेशन सिंदूर को निहारते।
तिस पर भी युद्ध बंदियों
की यादों को बुहारते।
पैंसठ इक्कहत्तर की
जंग को सोचते।
ऑ पुकार उठते,
काश के ऐसा ही कोई
ऑपरेशन सिंदूर हो जाए।
जो पुराने युद्ध बंदियों को
घर लाए!
हमारी आधी आबादी की
बरसों से सूनी पड़ी
मांग, गोद और राखी को
फिर से सिंदूरी कर जाए।
हैवानियत की हदों के पार
कायर पड़ोसी की जेलों में
सड़ रहे
उन वीरों को भी
कोई ऐसा ही सैन्य सिंदूरी अभियान
फिर से उनकी रूहों को
सिंदूरी कर जाए।
सूर्यकांत शर्मा 
कवि एवं लेखक
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4 टिप्पणी

    • प्रिय डॉक्टर रॉबी जी,
      अपने इतने मनोयोग इस रचना को पढ़ा और अपनी अमूल्य टिप्पणी अंकित की।
      आपका हृदय से आभार।

  1. https://www.thepurvai.com/poem-of-suryakant-sharma-3/

    सूर्यकांत जी!
    ऑपरेशन सिंदूरी शीर्षक से बहुत सामयिक और आवश्यक कविता आपने लिखी। देश के लिए जरूरी है कि आज भी अगर पाकिस्तान के जेलों में हमारे भारतीय भाई-बंधु बंद हैं तो उन्हें छुड़ाकर लाया जाए। ऑपरेशन सिंदूरी का रंग वहाँ तक पहुँचे।
    हमारे राष्ट्रीय ध्वज का केसरिया रंग या सिंदूरी रंग वास्तव में त्याग का प्रतीक है शक्ति का प्रतीक है। दुश्मनों से सामान्य ना समझे।
    इस कविता के लिए आपको बहुत-बहुत बधाई ।

  2. जी नीलम करैया जी।आपने कविता के मर्म को पहचाना और सटीक टिप्पणी की।
    आपका हृदय से आभारी हूँ।

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