फेसबुक की दुनिया एकदम ही निराली है यहाँ की हर बात खास है ..यहाँ किसी की म्रत्यु पर लिखे गए संस्मरण और तारीफें पढ़कर तो अच्छे भले इंसान का मन मरने का होने लगता है कभी कभी ख्याल आता है यदि मरने से पहले ये सब बातें लिख दी जाती तो बन्दा ख़ुशी के मारे ही कुछ और जी सकता था | किसी की मृत्यु का समाचार आते ही उसके साथ के फोटो खोज खोज कर निकाले जाते हैं…
मरने वाला कोई प्रसिद्ध है तब तो हर कोई उनके करीब होने का जिक्र जैसे करता है उन्हें पढ़कर हम ऐसे भाव-विभोर हुए कि हमारे अन्दर मरने की इच्छा जन्म लेने लगी.. ऐसा लगने लगा कि जल्दी से मर जाएँ फिर देखें कि लोग हमारे बारे में क्या कहते हैं ? पर दूसरे ही पल ख्याल आया कि हम मर गए तो पढ़ेंगे कैसे फेसबुक पोस्ट यमराज के यहाँ फेसबुक की सुविधा होगी इस पर हमें डाउट है ..


मतलब मृत्यु लेख पर भी हास्य पैदा किया जा सकता है..चण्डी भाई सही कहते हैं कि व्यंग्य लिखना हो तो अर्चsना जी को पढ़ो