वे चोरी चकारी से रचना, लेख, शोध पत्र चुरा किताब  बना लेते  हैं। लोग उन्हें  उस  पर उम्दा ,गज़ब ,वाह आदि लिख  बधाई दे आते हैं। हम कह  भी नहीं पाते कि यें साहित्य के तनु मलिक हैं  क्योंकि  वो हमारी मित्र सूची में हैं। कभी-कभी  हमारी रचना पर बड़े सुंदर-सुंदर कमेंट भी देते हैं। फिलहाल ये मौलिक रचना साहित्य के कोरोना और  उन माननीय चोरों और उनके ठेकेदारों के  लिए है।
वैसे ये  बड़े सोबर, चतुर, माहिर,जीनियस  चोर हैं।  देखकर लगता है चोरी करना भी एक  अद्भुत कला है।साहित्य को टेस्ट किये बिन हम रह नहीं सकते। उनकी सोच है किसी को यश की रोटी नहीं मिलेगी तो वो चोरी ही करेगा । रोटी पर सबका जन्मसिद्ध अधिकार है ,केवल उगाने  वाले किसान साहित्यकार का ही नहीं है ।
उभरते रचनाकार सितारों को साहित्य में भी सुशांत राजपूत बना दिया जाता है। वो बात अलग वे ढीठ किस्म के हैं मरणासन्न होते हैं मरते  नहीं ।हमने  चोरों और ठेकेदारों की उनकी टेस्टिंग करके पीजिटिव बता तो दिया अब हमें आइसोलेशन में जाना पड़ सकता है। कोरोना में पॉजिटिव हो तो पेशेंट को जाना पड़ता है ।साहित्य में पॉजिटिव बताने वाले को जाना पड़ता है। वैसे भी अधिकतर  आइसोलेशन में ही चल रहे हैं। यहां  चौदह  महीने, साल या ताउम्र कुछ तय नहीं है। गए सो गए।
फेसबुक पर जुकरबर्ग ने आइसोलेशन रूम नहीं बनाए । वो बात और जब फेसबुकियों का मन होता है वे खुद को आइसोलेट कर बता देते हैं हम तुम्हारी खुशी में रोज- रोज शरीक नहीं होने वाले तुम्हारा तो रोज का काम है ।मौलिक रचनाकार  समझ जाते हैं उनका कोई कसूर नहीं है  ,उन्हें ओवर डोज हो गई है । सो चुपके से अपनी पोस्ट को टाइमलाइन से हटा कर  आइसोलेट कर देते हैं ।उन्हें दिखती या नहीं पता नहीं उनका  तनाव नहीं बढ़ता ।
यहाँ  साहित्य में भी अनेक वरण जौहर, अलमान, खरहा डांस  प्रोडक्शन, शरमा प्रोडक्शन, धसराज फिल्म्स, कपूर, बाजिद, की सीरीज, हँसा ली आदि वायरस पॉजिटिव  हैं । जो नए सितारों की चमक से रतोंधी के शिकार होकर उन्हें  आइसोलेट होने को मजबूर करते हैं ।  ये हत्यारे उन्हें  जिंदा चबा जाते हैं । चोर तो  बेचारे मामूली से चोर होते हैं। साध असली समस्या हैं। ये इन चोरों के ठेकेदार बन इनसे उगाही करते हैं उसकी एवज में ये सर्वेसर्वा बन साहित्य के उक्त प्रोडक्शन बन जाते हैं ।
कुल मिलाकर हर क्षेत्र में  वायरस पॉजिटिव लोग टैलेंटिड लोगों   के  लिए ब्रीथिंग प्रॉब्लम क्रिएट कर रहे हैं । जबकि  वायरस पॉजिटिव को ब्रीथिंग प्रॉब्लम होनी चाहिए। कई तनु मलिक अभी लिस्ट में हैं  मगर शाम तक की गारंटी नहीं है। गलत रास्ते अख्तियार करने वाले भले लोग होते हैं वे किसी को तब तक ब्रीथिंग प्रॉब्लम देकर वेंटिलेटर पर नहीं पहुंचाते जब तक उनकी टेस्टिंग न करें ।हमें समझना चाहिए हम साहित्य या मेडिकल के   डॉक्टर नहीं हैं फिलॉसफी के हैं ।टेस्ट करने का राइट वे हमें नहीं देते । लिखने के साथ- साथ जबरदस्ती उनके लिखे की टेस्टिंग भी करेंगे तो आइसोलेट होना पड़ेगा ।
वैसे सुशान्त राजपूत की आत्महत्या के लिए जिम्मेदार चैनल मीडिया भी  है अगर वे मरने से पहले उन्हें इतनी कवरेज दे देते तो उन्हें आइसोलेशन में कोई दिक्कत न होती कवरेज की वैक्सीन  से ठीक हो जाते मगर हिंदुस्तान में तारीफ करवाने के लिए मरना पड़ता है।
पब्लिसिटी झूठ पर ज्यादा चलती है । अभी पहली बार छोकरा साबुन बनकर एड में आया है मगर उसने 65 साल का एक्सपीरिएंस बताया है ।बिना किताब वाले कवर से ही तीस किताब वाले और बिना पढ़े ही लोग पीएचडी के ही डॉक्टर बन जाते  हैं । ज्यादा मेहनत करने की जरूरत नहीं है। पॉजिटिव बताने वाले आइसोलेट किये जायेंगे तो वे जिक्र ही नहीं करेंगे कि  उन्होंने पॉजिटिव पेशेंट देखा है।

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