दुनिया चे ऐसी कोई शह नी जट्टीये।
जेड़ी तेरे कदमां चे धरी जाणी नी।

वो लड़की कब से दीप को फोन किए जा रही थी मगर सामने से यह कॉलर ट्यून ही सुनाई देती लेकिन दीप उसके फोन का कोई जवाब नहीं दे रहा था। करीब एक घँटेबाद वह कमरे से बाहर आया औरअपनी मूछों पर ताव देते हुए कपड़े ठीक करने लगा। आज दीप अपने शहर से बाहर था। कॉलेज जाने के नाम पर वहाँ से कुछ मिनटों में फ्री होकर आज फिर वह अपने उसी ठिकाने पर था। उसके साथ था शैफी, जो दिखने में साफ रंग का था लेकिन दो बच्चों का बाप भी था जिसके बारे में दीप या शैफी के दूसरे दोस्तों को मालूम नहीं था। सिवाए एक किशन को छोड़कर। वे दोनों किशन के कमरे पर मौजूद थे।

शैफी हर दूसरे दिन दीप, शंकर और उज्ज्वल को ले आता और कुछ समय अकेले उनके साथ गुजार कर चला जाता था। मगर इस बार दीप किशन के दिमाग को ही नहीं दिल को भी चुभ गया। 22-23 साल का गबरू जवान, सुघड़ शरीर, रंग भी फ़ेयर। हो भी क्यों ना किशन खुद इस दुनिया का बाशिंदा जो ठहरा। दिल का कमजोर और भावनाओं का समुद्र अपने भीतर हर समय लेकर फिरने वाला किशन भी पिछले कई सालों से लगातार लड़कों से सम्पर्क बना रहा था। इस बीच सुप्रीम कोर्ट का फरमान आया कि अब से समलैंगिकों को कोई परेशान नहीं करेगा और उनके सम्बन्ध भी जायज कहे जाएंगे। इस फैसले के बाद एक और भारतीय संस्कृति मुँह बिचकाए खड़ी थी तो दूसरी तरफ आधुनिकता के थपेड़े दीप,किशन, शैफी, शंकर जैसे लोग लगा रहे थे। भारतीयता जैसे मानों कोई खिसयानी बिल्ली खम्बा नोच रही हो वैसी मालूम होती थी।

जैसे ही दीप शैफी से मिलकर फ़्री हुआ उसने पानी का गिलास माँगा और अपना आईफोन कान से लगा लिया। दूसरी तरफ से फोन उठा और इधर से दीप इतनी मीठी आवाज में हैल्लो बोला कि कोई उस एक शब्द पर अपनी पूरी दुनिया वार देने को उतारू हो जाए।

इधर किशन उसकी ताव दी हुई मूछों को देख रहा था।  दूसरी तरफ शैफी बाथरूम की ओर चला गया। 

इधर दीप ने आगे कहा- “अरे यार मैं कॉलेज में बिजी था। बोलो तुमने फोन क्यों किया।”

दूसरी ओर से लड़की उतने ही गुस्से से उबल पड़ी- “कहाँ हो आप, कब से फोन कर रही हूँ। कोई मरे या जिए आपको इससे क्या?”

“बाप रे बाप इतना गुस्सा मेरी जान। हुआ क्या? सॉरी यार। कभी कभी ही तो कॉलेज जाना होता है और आज…”
आज क्या?”

दीप ने फिर कई बार फोन मिलाया लेकिन लड़की ने कोई जवाब नहीं दिया। दीप को लेकर शैफी चला गया जाते समय शैफी ने किशन को आँख मार दी। किशन उसी कमरे में आकर बैठ गया जिसमें अभी शैफी और दीप मौजूद थे। उनके जाने के बाद की गंध को वह महसूस कर रहा था। उसने पूरा कमरा देखा की कहीं कोई आपत्तिजनक चीज न पड़ी हो। इत्मीनान हो उसने सर्दी में भी पँखा चला दिया और खुद कमरे से बाहर निकल गया।

थोड़ी देर बाद किशन के फोन की घँटी बजी- 
सत्यम शिवम सुन्दरम….”
सामने शैफी था-
हैल्लो” 
हैल्लो… और कैसा रहा?” 
मजा आ गया यार। क्या खूब लौंडा है, नजारे आ गए।
अच्छा…”
हाँ…”
और क्या कुछ किया?”
सब कुछ….”
अच्छा फिर भी?
अच्छा मैं थोड़ी देर में फोन करता हूँ किसी ग्राहक का फोन आ रहा है।

इस बात पर दोनों जने खूब जोर से हंस पड़े। किशन का दिमाग अब भी दीप की मूछों और शरीर पर ही अटका हुआ था। शाम को रोजाना मिलने वाले शैफी और किशन आज फिर मिले लेकिन किशन ने शैफी को जब फोना किया तो दो बार उसकी सिर्फ़ कॉलर ट्यून सुनाई दी। तीसरी बार किशन फोना करता उससे पहले शैफी का फोना आ गया। अरे यार मिसेज का दर्द बढ़ गया था। उसे अस्पताल लेकर जा रहा हूँ। डॉक्टर ने कहा था ट्विन्स होने वाले हैं। मिसेज को अस्पतालमें भर्ती करवा वह करीब एक घँटे बाद किशन के घर आया और दोनों जने बाइक पर फर्राटे भरते हुए शहर के चौराहे पर लगने वाली सूप की रेहड़ी पर जा खड़े हुए।

“दो टमाटो सूप भईया।” कहकर दोनों जने आने जाने वाले ही नहीं बल्कि रेहड़ी पर खड़े लड़कों में से अपनी-अपनी पसंद के शिकार ढूँढ़ने लगे। 

शैफी कुछ बोलता उससे पहले किशन बोल पड़ा। “क्या यार मैं लड़कियों को देखाकरता था। लड़के तो कभी-कभी बस। मगर स्साले तुम्हारे साथ कुछ दिन रहकर मुझे भी लड़के देखने उन्हें आँख मारने की आदत बन रही है। स्साले तुम तो शादी-शुदा हो। मुझे अभी पूरी जिंदगी जीनी है।”

दूसरी तरफ शैफी हा… हा… हो … हो… कर खूब जोर जोर से दाँत निपोरने लगा।

“कोई ना, कोई ना” शैफी बोला
क्या कोई ना?” 
कुछ नहीं यार मजे मार। शादी भी एक दिन हो ही जाएगी।”
हम्म्म्म सही है।”


कहकर दोनों ने फिर से रेहड़ी वाले से कहा।
अरे भईया सूप पैक कर दो ना।”
हाँ बस सर हो गया।” 
क्या यार इतनी देर हो गई- किशन बोला
इधर शैफी अपने मोबाइल पर अंगुलियाँ फिराते हुए कुछ फोटो और मैसेज किशन को दिखाने लगा।

“ये क्या है?”
पढ़…”
अरे तुम ही बता दो ना।”
अरे पढ़ ना यार।”

किशन और शैफी में उम्र का फासला करीब 18-20 साल का था। लेकिन दोनों ऐसे बात करते जैसे हम उम्र या एक ही गुदड़ी के लाल हों।

“अच्छा दिखा…”
हा…हा… कर किशन हँसने लगा। ये क्या है? बहन….

किशन लाख अच्छा या बुरा हो दुनिया के सामने मगर उसकी एक बात सबसे अच्छी थी कि वो कोई गाली पूरी तरह नहीं देता था। आखिर के अक्षर वो चिंगम की तरह अपने अंदर ही चबा जाता था।

बाइक छोटी बड़ी गलियों से फ़र्राटे भरते हुई किशन के घर के सामने आकर रुकी। 

दोनों ने सूप पिया और लड़कों की तस्वीरें एक दूसरे को दिखाते हुए आँहें भरने लगे। बाहर बढ़ती सर्दी की परवाह किए बग़ैर दोनों के भीतर की गर्मी कुलाँचें भर रही थी।

“आज बहुत मन है यार” – किशन बोला
क्यों कोई ग्राहक नहीं मिला क्या?” हा…हा… हँसते हुए शैफी सूप का अंतिम चमच्च चूस रहा था।

“अरे स्साले ये क्या कर रहा है?”
कुछ नहीं मजे ले रहा हूँ।
हुर्र… अब यही रह गया क्या?”

कुछ देर दोनों मौन रहे और इस चुप्पी को तोड़ते हुए किशन ने पूछा- 
अच्छा सुबह क्या हुआ बता ना यार?”
कुछ नहीं यार दीप लौंडा मस्त है, सब कुछ करता है।” 
मतलब?”
अरे ऊपर से लेकर नीचे तक उसने मुझे चूमा और उसके बाद इतने प्यार से अपना लिंग मेरे नितंबो से सटा दिया कि क्या कहूँ। हालाँकि वो लम्बी रेस का घोड़ा नहीं है। फिर भी अच्छा बॉडी प्ले करता है।”

अच्छा….
ह्म्म्म….
यार दीप से मेरा भी कुछ करवा दे प्लीज।”
यार मैंने उससे कहा था। मगर उसने साफ मना कर दिया।”

अच्छा? क्या बोला?
कुछ नहीं… बोला मुझे किशन पसंद नहीं।
हुर्र … ठीक है, दफ़ा होने दो। चलो ठीक है यार अब तुम जाओ। मुझे कुछ काम है और शाम को जितेंद्र सोने आएगा।
अच्छा क्या बात है! तब तो सुहागरात बनेगी तेरी!”

हा… हा करके दोनों ने ठहाके लगाए।
शैफी उसके घर से चला गया मगर इधर किशन कई देर अपने आप को शीशे में उतारने लगा और खुद से सवालात करने लगा।

ऐसा क्या नहीं है मेरे में?”
नहीं ठीक है सबकुछ।” शीशे में उसका प्रतिबिम्ब बोल रहा था।
ठीक है तो दीप को मैं पसंद क्यों नहीं। नहीं मेरे में कुछ कमी जरूर है।” 
नहीं तेरे में अगर कमी होती तो अब तक जो लड़के तेरे पर मरे जा रहे थे वो क्या मूर्ख हैं?

कुछ देर शीशे के सामने अपने प्रतिबिम्ब से बात कर लेने के बाद किशन रात के खाने की तैयारी करने लगा। किशन के माँ-बाप बहुत पहले ही गुजर चुके थे। बस ले देकर 2 बहनें और एक बड़ा भाई था। शादी के बाद सब अलग-अलग रहने लगे और किशन घर में अकेला पड़ गया। अपनी पढ़ाई को जारी रखे हुए किशन नोकरी के लिए हाथ पैर भी मार रहा था। खाना बना खाकर किशन मैसेज में शैफी से बातें करने लगा। शैफी किशन से किसी गे डेटिंग  एप्प के बारे में बता रहा था। 
प्रतिउत्तर में किशन ने लिखा- “मुझे लड़कों में ज्यादा दिलचस्पी नहीं।”

“दिलचस्पी अपने आप बन जाएगी यार…”
ठीक है। अनमने ढंग से किशन बोला।
कई देर यूँ ही लड़कों की बातें होती रही। उधर नुमाईश के तौर पर 3-4 तस्वीरें किशन को भेज दी। 
यार लौंडे तो मस्त है…” किशन ने टैक्स्ट किया।
फिर कहा था ना।
मगर…
क्या?
यार दीप
क्या हुआ अब हा…हा की स्माइली मैसेज के साथ चिपक गई। 
यार उसने मना कर दिया।
अरे होता है। तू जाने दे उससे अच्छे मिलवा दूँगा, क्यों चिंता करता है।”

किशन के दिल में दीप की कसक यूँ चुभ गई मानों किसी ने कँटीले तारों में उसे जकड़ दिया और वो वहाँ से छटपटाता हुआ दीप के नाम की आँहें भर रहा था। करीब 8-10 दिन बाद दीप का गाँव से फिर शहर आना हुआ। किशन ने इस बीच कई खूबसूरत से दिखने वाले लड़कों से बात की मगर कोई भी उसे पूर्ण संतुष्ट नहीं कर पा रहा था। किशन को पहली बार उस 60 किलो के ताव भरी मूछों वाले लड़के से इश्क सा हो गया था। हर दिन वह उसके दिमाग में आकर घण्टियाँ सी घनघना जाता। दीप के शहर आने की खबर किशन को जैसे ही उस डेटिंग एप से मिली उसने तुरंत शैफी को फोन मिलाया।

हैल्लो
हाँ बोलो?
अरे आज तुम्हारा दीप फिर से आया हुआ है। पर यार मुझे तो उससे मोहब्बत सी हो गई है।”

अच्छा…
हम्म्म्म
अरे यार मैंने तो सुबह से फोन ही नहीं देखा अच्छा मैं अभी बात करता हूँ। कहकर शैफी ने दीप को फोन लगा दिया।
थोड़ी देर में किशन का फोन बजने लगा।

हैल्लो
हाँ यार- “तुम सही कह रहे थे, सामने फोन पर शैफी था।
वो आया हुआ है और उसने मुझे मैसेज भी किया था। मगर मैं देख नहीं पाया। 
अच्छा? तो क्या प्लान है?

कुछ नहीं अभी दस-बीस मिनट में आ रहा है। मगर उसके पास ज्यादा टाइम नहीं है। बोल रहा था 10-15 मिनट के लिए ही आएगा। 
अच्छा ठीक है। मगर मेरे लिए तुम बात तो कर लेना ना यार। 
अच्छा देखते हैं
बात खत्म करके किशन घर में साफ-सफाई करने लगा जैसे कोई नई-नवेली दुल्हन के स्वागत में घर को साफ करता है या फिर कोई दामाद आने वाला हो जैसे। साफ-सफाई करके जैसे ही बिस्तर पर आकर किशन बैठा इतने में मेहुल आ पहुँचा। 

कौन उजाड़ गया तुझे?” खूब जोर से हँसतें हुए मेहुल बोला। इस बात पर हंसते-हंसते किशन के पेट में दर्द हो उठा।

बस कर यार।
दोनों कई देर तक हंसते रहे। “अच्छा ठीक है। यार तुम शाम को आना। अभी मैं कहीं निकल रहा हूँ। किशन ने कहा।
मेहुल के जाते ही शैफी और दीप घर में आ धमके। 
किशन के साथ हाय-हैल्लो करके दोनों कमरे में चले गए और करीबन एक घँटे से भी ज्यादा समय गुजार लेने के बाद दरवाजे की कुंडी सरकने की आवाज आई। दीप को चौराहे तक छोड़कर शैफी अपने घर चला गया। इधर थोड़ी देर बाद किशन के फोन पर एक अनजान नंबर से फोन आने लगा।

हैल्लो
हैल्लो… कौन? 
मैं दानियाल सर… आप कौन? 
मैं किशन … बोलिए क्या काम है? 
मुझे आपका नंबर एप्प से मिला। 
अच्छा बोलो कब फ्री हो?
आपकी उम्र क्या है?
जी 21 साल और आपकी
28 साल
ओके ठीक है घर आ जाओ। 
कहाँ है आपका घर?
जी सरकारी बस स्टैंड के पास ही। 
कुछ मिनटों में दानियाल किशन के घर के सामने मौजूद था। किशन ने उसे कमरे में बुलाया और घर-परिवार , देश-दुनिया की बातें करने लगा। दानियाल एक अच्छे खाते-पीते घर का लड़का था। किशन के पिता भी फ़ौज में भारत-पाकिस्तान की जंग लड़ते हुए शहीद हो गए थे। दोनों अपने घर-परिवार की कहानियाँ एक दूसरे को सुना रहे थे।

किशन ने बताया कि उसका पढ़ने में बिल्कुल मन नहीं लगता जैसे-तैसे बी०ए० तक पहुँचा है। उसमें भी वह 12 वीं क्लास तीसरी बारी में पास कर पाया था।

किशन को शराब और जुआ खेलने की लत भी थी। वह जहाँ कहीं जाता शराबियों और गंजेडियों को अपना दोस्त बना लेता। वहीं दूसरी ओर दानियाल दिन में 2 लीटर दूध पीने वाला और हफ्ते के रोज जम कर मांस खाने वाला आदमी था। 28 की उम्र में भी वो 22-24 साल का नज़र आता। दानियाल के पिता का दूसरे किसी शहर में बड़ा सा शो रूम था।  वह किशन के शहर में दोस्त की शादी में शिरकत करने आया था। कई देर इधर उधर की बातें करने के बाद दोनों जने एक दूसरे की बाहों में एकमेक हो गए बाहर सूरज धरती की गोद में समाने लगा। 

शहर में लड़कों की दिलचस्पी लड़कियों ही नहीं बल्कि लड़कों के प्रति भी बढ़ने लगी थी। अच्छे-अच्छे घरों के हीरो जैसे दिखने वाले लड़के लड़कों से सम्बन्ध बनाते और लड़कियाँ भी आवारा गलियों में घूमती देखी जाती। किशन अपनी जिंदगी में इन सबसे वाकिफ़ होता जा रहा था। एक दिन वह जब अपने एक और दोस्त कशिश के साथ पार्क में बैठा बतिया रहा था तो उन दोनों के बगल में आकर एक लड़का बैठ गया। कशिश और किशन की आवाज कुछ धीमी हुई। अब उनके होंठों से सिर्फ खुसर-पुसर सुनाई दे रहा था। वे दोनों आपस में यूँ कुछ देर बड़बड़ाए और फिर अचानक से उठकर 
कशिश बोला- सिगरेट पियेगा?
नहीं यार 
चल ना बे। 
चल ठीक है तू ले आ मैं तब तक यहीं बैठा हूँ। कशिश के जाने के चंद सैकेंड बाद ही किशन उस लड़के से बतियाने लगा। 
हैल्लो
हम्म्म्म हाय… मोबाइल की दुनिया से अचानक बाहर आकर  हड़बडाता हुआ सा वह लड़का बोला। 
कैसे हो?
मैं ठीक तुम बताओ।
बस बढ़िया… आप यहाँ पहली बार दिखाई दे रहे हो पूछकर जान पहचान बढ़ाने का तरीका किशन तलाशने लगा। 
हाँ मैं कल ही शहर आया हूँ। 
अच्छा तो करते क्या हैं आप?
बस कुछ नहीं यहीं पास में कोचिंग लेने आया हूँ। 
ओह ओके वैसे बुरा न मानों तो हम और बात कर सकते हैं ?
हाँ बोलो… हाथों में मोबाइल के मैसेज बॉक्स में टाइप करते हुए वह लड़का बोला। 

“अच्छा आपका नाम क्या है?”
“निखिल और तुम्हारा?” 
“मैं किशन”
“कौन से गाँव से आए हो?” तुरन्त सवाल किशन ने दागा।
“यहीं 50 किलोमीटर दूर बॉर्डर के पास गाँव है।” 
“ओके”
इतनी देर में कशिश दूर से आते हुए दिखाई दिया। किशन का इस बीच फोन बज उठा। किशन और कशिश ने सुट्टे लगाए और उस साथ बैठे लड़के से भी सिगरेट ऑफर की मगर कशिश ने किशन को कंधा मारते हुए पूछा। 
हाय… “हाय बड़ी दीदी क्या बात हुई फिर?”

किशन और कशिश जब कभी मजाक के मूड में होते तो एक दूसरे को दीदी कहकर बुलाते। 

कुछ नहीं यार बस नाम मालूम हुआ।हाय… हाय कमीनी तू चली जाती सिगरेट लेने। इतनी देर में तो पता नहीं क्या क्या कांड कर बैठती मैं, खैर चल चलते हैं शाम हो रही है। कल आएंगे इसी टाइम क्या पता वो लड़का भी आ जाए।”

कुछ दिन तो यूँ ही किशन, कशिश और निखिल में बातें होती रही। फिर एक दिन किशन नहीं आया तो कशिश ने निखिल का मोबाइल नंबर ले लिया और रोज 2-4 रोज तक व्हाट्सएप्प पर जाने क्या क्या बातें करने लगा। निखिल कशिश के और कशिश निखिल के प्यार में डूबने लगा। इधर किशन के कमरे पर एक दिन डिलवरी बॉय कुछ ऑर्डर डिलीवर करने आया। उसने ऑर्डर लिया और साथ ही उसका नंबर और नाम भी पूछ लिया। रात को किशन ने उस नंबर पर मैसेज किए और चंद मिनटों में उस लड़के को अपने साथ सोने के लिए राजी कर लिया। किशन को खूबसूरत और जाट, बिश्नोई रेजिमेंट के फौजियों जैसे दिखने वाले लड़के खूब पंसद आते।

अक्सर रात दस बजे बाद गौतम और उसके दोस्त अंकित, प्रवीण, रोहित, मुकेश उससे मिला करते। आधी रात तक बीतते-बीतते वे नशे में चूर होकर किशन को अपने पास बुलाते। किशन को पहले पहल उनका साथ अच्छा नहीं लगा मगर अब वो भी उन सबमें रुचि लेने लगा। एक दिन किशन अपने कमरे बैठा पुरानी तस्वीरें निकाल यादें ताजा कर रहा था और अपने किए कर्मोंपर आँसूं बहाने लगा कि दूसरी ओर उसका फोना घनघनाया।

हैल्लो रोहित बोल रहा हूँ। “नशे में धुत बजबजाती आवाज उसके कानों में पड़ी।”
बोलो…” 
कहाँ है?” 
कमरे पर।”
आ जा यार बड़ा मन कर रहा है।” 
नहीं अब रात बहुत हो गई और बाहर मौसम भी करवट बदल रहा है।”
अरे आ जा यार भाई है ना? इधर मैं, गौतम और मेरा एक दोस्त करवटें बदल रहे हैं।” 
अच्छा ठीक है… कहकर किशन ने मोटरसाइकिल दौड़ा दी। किशन 1-2 घँटे में उनको फ्री करके लौट ही रहा था कि शैफी का देर रात किशन को फोन आया ओर उसने उससे बस इतना ही कहा कि-

तुम जिस रास्ते पर चले जा रहे हो वह गलत है। दुनिया की सर्कस में सबसे बड़ा तमाशा मोहब्बत है और इस तमाशे पर नोट इक्कठे करने वाली हर हस्ती तवायफ़ है। चाहे मर्द हो या औरत। तुम अपनी दास्तानों और किस्सों को जितना जल्दी खत्म कर लो तुम्हारे लिए उतना ही बेहतर होगा। यह कहकर शैफी ने फोना रख दिया। उसके बाद शैफी और किशन फिर कभी नहीं मिले।”

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