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पुरवाई के संपादकीय ‘जब रक्षक ही भक्षक बने’ पर प्राप्त पाठकीय प्रतिक्रियाएं

आज यानी 10 अक्टूबर, 2021 को 'जब रक्षक ही भक्षक बने' शीर्षक से प्रकाशित पुरवाई के संपादकीय पर व्यक्तिगत संदेशों के माध्यम से प्राप्त...
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कपिल कुमार की ग़ज़ल – टूटा हुआ है दिल मगर एहसास देखिए

टूटा हुआ है दिल मगर एहसास देखिए ख़ुद पर बचा हुआ है जो विश्वास देखिए जीने की आरज़ू भले मुझ में बची नहीं फिर भी है मेरे...

अपनी बात

साक्षात्कार

कविता

व्यंग्य

कहानी

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कमला नरवरिया की एक छोटी कहानी – दोस्ती

मीरा की मुलाकात कबीर से एक सोशल नेटवर्किंग साइट पर हुई थी मीरा को पहली ही नजर में कबीर का व्यक्तित्व काफी दिलचस्प लगा था।इसलिए...

लघुकथा

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संगीता सिंह की लघुकथा – जिंदगी का व्यवसाय

डॉक्टर साहिबा मेरी पत्नी बहुत देर से दर्द से कराह रही है आप उसे जल्दी...
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स्वाति श्वेता की लघुकथा – तर्पण

वह मेरे सैलून में सामने की कुर्सी पर चुपचाप आकर बैठ गई और धीरे से...
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समीर उपाध्याय की लघुकथा – घर की ऊर्जा

भोगीलाल बहुत बड़े व्यापारी थे। कारोबार अच्छा-खासा चल रहा था।आलिशान मकान था। एक बहुत बड़ी...
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डॉ. दीप्ति की लघुकथा – कार्यालयी गंध

"बहुत मेहनत एवं लगन से काम कर रही है।" कल ही नौकरी पर नवनियुक्त नीना...
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दलजीत कौर की दी लघुकथाएँ

आत्मा की कचहरी मैंने कहा -“ वह मुक़दमा जीत गया ।” उसने मेरी ओर व्यंग्यमयी नज़र से...

पुस्तक समीक्षा

ग़ज़ल एवं गीत

डॉ. विभा सिंह की कलम से निर्मला सिंह की पुस्तक ‘जंगल...

चित्रकार-कवयित्री लेखिका निर्मला सिंह की किताब "जंगल कॉटेज" उनका पहला उपन्यास है।इससे पहले उनकी कविता संग्रह की कई किताबें आ चुकी है। वे कहती...

‘कोई खुशबू उदास करती है’

कहते हैं जब कोई व्यक्ति लेखन में जुटता है तो उसका उदात्त स्वरुप उसकी अभिव्यक्ति में मिलता है। ऐसे ही उदात्त व्यक्तित्व की झलक...

कपिल कुमार की ग़ज़ल – टूटा हुआ है दिल मगर एहसास देखिए

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टूटा हुआ है दिल मगर एहसास देखिए ख़ुद पर बचा हुआ है जो विश्वास देखिए जीने की आरज़ू भले...

डॉ गुरविंदर बांगा की ग़ज़ल – पहुंचती ही नहीं कोई दुआ अब आसमानों पर

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मुसीबत क़हर बनकर टूटती है बेज़बानों पर पहुंचती ही नहीं कोई दुआ जब आसमानों पर थके हारे हुए इंसान...

लेख

फ़िल्म समीक्षा