1. खदान की ख़तरनाक कविता
बेरोजगारी और भूखमरी मार न दे उसे
इसलिए वह चुपचाप धूल और कोयला फांकेगा
नाइट्रोजन ऑक्साइड सांस में लेगा
तुम वसंत,खुशबू,मंद-मीठी हवा की बात करोगे
वह धुंआ,तपती जमीन,खांसी और मौत को एक ख़तरनाक कविता की तरह जी जाएगा
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2. वह सबकुछ भूल गया
वह सबकुछ भूल गया
उसे याद नहीं रही
विरह की सर्दियां
चुंबनों का घर
स्पर्श की भाषा
मिलन की हँसी
विदाई का कुंआ
दुःख का चापाकल
और सुख की गौरैया
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2. यह रात उसे कविताओं के साथ गुज़ारनी है
उसकी आँखें कविताओं से भारी हैं
उसके कंठ कविताओं से भरे हैं
उसके ओंठ कविताओं से हल्के गुलाबी
उसका देह कविताओं के लिए तत्पर और तैयार है
उसकी साँसों में कविताओं की गमक है
मैंने उसे गर्मजोशी के साथ अलविदा कहा
यह रात उसे कविताओं के साथ गुज़ारनी है
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4. तुम कभी विदा नहीं हुए
तुम्हारा फ़ोन आया
मैंने तुमसे बातें की
तुम्हारे शब्द व्यर्थ हुए
तुम्हारा फ़ोन नहीं आया
मैंने तुमसे बातें नहीं की
‘शब्द व्यर्थ नहीं हुए’
यह पंक्ति कितना सुख देने वाली है
तुम मेरे घर आए
मैंने तुम्हें देखा
चाय पिलायी
विदा किया
कुंडी लगायी
ज़ोर से रोयी
मगर तुम मुझसे कभी मिले नहीं
तुम मेरे घर भी नहीं आए
मैंने तुम्हें नहीं देखा
तुमने नहीं पी कोई चाय
‘तुम कभी विदा नहीं हुए’
यह पंक्ति कितनी सुंदर है
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5. तुम स्वयं संभावना हो
तुम स्वयं संभावना हो
सुख भौंकते हुए आता है
दुख बिल्ली की तरह आहिस्ता
और बिना किसी पदचाप के
हर जख़्म एक दरवाजा है
हर खरोंच एक खिड़की है
प्रेम एक पूरी दुनिया है
मुस्कान एक खुलती हुई खिड़की है
चमकती हुई आंखें दिल को जाती सड़कें हैं
बुझी हुई आँखें आत्मा की ओर जाती सुरंगें हैं
तुम्हारा चेहरा, एक संपन्न दुनिया है
जिसमें आजादी का दरवाजा है
रोशन खिड़िकियां हैं
तुम स्वयं संभावना हो
एक उम्मीद
जो कितनों को जीवित और खुश रखती है।


प्रिय अनामिका अनु , अपनी कविताओं के आकर्षण शीर्षकों से ही पाठकों का मन मोहती कविताएं,
कविता के बिंब अनोखे उत्कृष्ट हैं ,
प्रथम कविता.*खदान की खतरनाक कविता * दो वर्ग विशेष को चिन्हित करती है एक मजदूर वर्ग एक अमीर वर्ग जमीन आसमान की खाई की हकीकत को बयां करती है कविता
*वह सब कुछ भूल गया* कविता के अनुसार एक ऐसा शख्स जो अति सुख में सब कुछ भूल गया अपनी व्यथा को खाने का कवयित्री का एक अलग अंदाज
*यह रात कविताओं के साथ गुजारनी है*
कवयित्री ने कविता में मानो नायक को रणभूमि में भेजने के लिए तिलक एक अनोखे अंदाज में किया है,उसे प्रेम से अरकांठ भर दिया है, और यह रात जब वह विदा हो रहा है वह रिक्त नहीं है वह रात उसे, प्रेम,कविताओं के साथ गुजारनी हे
*तुम कभी विदा नहीं हुए*
यकीनन कवयित्री का अंदाज निराला है वह स्वप्न में खयालों में ज्यादा सुंदरता व सुकून देखती है ,बनिस्बत की प्रेमी मिले और ना मिले, लेकिन सपनो की खयालों।की कभी विदाई नहीं होती वे लौट लौट कर आते हैं
*तुम स्वयं संभावना हो*
एक अंतिम और बहुत ही सुंदर कविता
यह सत्य है कि सुख की गूंज दूर तक सुनाई देती है वही दुख बिल्ली की तरह दबे पांव बेहद आहिस्ता से आता है
कवयित्री कहती हैं हर जख्म एक दरवाजा है ,हर खरोच एक खिड़की
चमकती आंखे मानो दिल को जाती हुई सुरंगे हैं
बुझी हुई आंखें यानी दुखी चेहरा आत्मा को जख्मी करती हुई जाती हुई सुरंग हैं
तुम्हारा चेहरा यानी एक पुरुष प्रेमी का चेहरा संपन्न स्वतंत्र दुनिया है जिसमें आजादी का दरवाजा है इसलिए कवित्री रहती है कि तुम स्वयं एक संभावना हो एक उम्मीद जो कितनों को जीवित व खुश रखती है
अदभुत।बिंबों से।सुसज्जित कविताओं ने मन मोहलिया ।
ढेर सारा साधुवाद प्रिय अनामिका अनु जी
लेखनी चलती रहे।
प्रिय अनामिका!
बहुत जबरदस्त कविताएँ हैं आपकी। जीवन का बहुत ही कठोर और कड़वा सच! जीवन में असमानता के दर्द को व्यक्त करती हुई,
जीवन की विसंगतियों के चलते पेट की आग बुझाने के लिये किए गए परिश्रम के दौर कैसे-कैसे रास्तों पर ले जाते हैं!!!!!!!!!
संसार में सबसे बड़ी आग अगर कोई आज है, तो वह पेट की आग हैं!
दुनिया के सारे नियम- कानून, धर्म-अधर्म, पाप-पुण्य, अच्छा-बुरा, सच-झूठ, सही-गलत, न्याय-अन्याय; इस आग के सामने इतने तुच्छ और बौने नजर आते हैं कि उनका कोई अस्तित्व ही नहीं रह जाता ।आग तो छोड़ो, उसकी आँच तक पहुँचते हुए ही भस्म हो जाते हैं, उनका अस्तित्व ही खो जाता है।
खदान की कविता इसी भूख की परिभाषा है।
दूसरों के सुख खदान में काम करने वाले मजदूरों के साँसों के दाँव पर निर्भर हैं।
और उनके सारे सुख
खदानों की कालिमा में बेरंग हो गये।
आपकी तीसरी कविता तो समझ में आई लेकिन संदर्भ नहीं पकड़ पाए।
चौथी कविता बहुत अच्छी लगी-
*तुम कभी विदा नहीं हुए*
बहुत कम शब्दों के उपयोग के साथ इस कविता में बहुत बड़ी-बड़ी बातें हो गईं।
जब कविता कहती है-
तुम्हारा फोन आया
मैंने तुमसे बातें की *तुम्हारे शब्द व्यर्थ हुए*
यहाँ यह पंक्ति बहुत गहरा अर्थ रखती है।
या तो सामने वाले ने कुछ कहा ही नहीं, सिर्फ सुनता रहा इसलिए जो वह कहना चाहता था यह जो उसने कहा वह अनुचित रहा होगा वह,व्यर्थ हुआ।
या फिर उसने जो कहा वह इतना अधिक निरर्थक था कि शब्द व्यर्थ हुए। क्योंकि उसकी कोई अहमियत ही नहीं थी।
इसी क्रम में आगे बात होती है-
तुम्हारा फोन नहीं आया मैंने तुमसे बातें नहीं की *शब्द व्यर्थ नहीं हुए*
और इसके बाद की पूरी कविता माशाअल्लाह!
अंतिम कविता
*तुम स्वयं संभावना हो*
अगर सच कहा जाए तो यह कविता बार-बार पढ़कर समझने और महसूस करने वाली कविता है। एक लाजवाब, बेहतरीन और बहुत ही कीमती कविता! बस जिसे पढ़कर समझा जा सकता है महसूस किया जा सकता है, लेकिन इसके बारे में कहा नहीं जा सकता। इसके लिए कुछ भी कहना इसकी अहमियत के आँकलन करने की कमी दर्शाएगा।
कई दिनों बाद बहुत अच्छी कविताएँ पढ़ने को मिली। बहुत-बहुत बधाई आपको इनके लिये।