The Purvai - अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता 6

अलका ‘सोनी’ की कविता – सभ्यता वरदान नहीं

सभ्यता वरदान नहीं होती हमेशा कभी कभी बन जाती है अभिशाप भी वह नहीं सिखा पाती हमें अपने मन के घावों को धोना झूठी हंसी ओढ़े सीख लेता है आदमी चुप रहकर दर्द ढोना छद्म...
The Purvai - अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता 7

ज़हीर अली सिद्दीक़ी की कविताएँ

1- माँ जिस दर्द से तू अनभिज्ञ रहा, हर माह सहन वह करती है। गर्भ से बाहर लाने तक, अक्षम्य पीड़ा को सहती है।। माहवारी जिसे नापाक  कहा, नींव अस्तित्व की...

अपनी बात

साक्षात्कार

कविता

व्यंग्य

कहानी

The Purvai - अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता 19

अमित कुमार मल्ल की कहानी – मन

उस गांव के छोटे बाजार में सुरेश की जनरल स्टोर की  दुकान पर , जब से सुरसतिया बैठने लगी , दुकान की बिक्री ,कई...

लघुकथा

The Purvai - अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता 24

हरदीप सबरवाल की लघुकथा – तर्क की मौत

छोटा सा सत्संग उत्साह से चल रहा था, महात्मा जी प्रवचन कर रहे थे, वह...
The Purvai - अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता 25

बिम्मी कुँवर सिंह की लघुकथा – अपशगुनी

"अरे हट दूर हट...जब ना देखा तबे जतरे पे खड़ी होए जात हईन ,देखत ना...
The Purvai - अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता 26

डॉ प्रतिभा त्रिवेदी की लघुकथा – एक सम्मान यह भी

रात के निविड़ एकांत में घनघोर जंगलों के बीच बस घरघराती हुई रुक गयी थी।...
The Purvai - अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता 27

शिवनाथ सिंह की लघुकथा – विवशता

जीवन या मृत्यु ही नहीं, जीवन का एक एक पल ईश्वर के नियंत्रण में रहता...
The Purvai - अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता 28

शिवानी की लघुकथा – हिस्सेदारी

"तुम हर समय बच्चों की प्लेट में से कुछ न कुछ क्यों खाती हो?कितना चिड़चिड़...

पुस्तक समीक्षा

ग़ज़ल एवं गीत

ज्ञान चतुर्वेदी की कलम से : एक अद्भुत उपन्यास का अचर्चित...

हिंदी साहित्य में आजकल ऐसा कम देखने को मिलता है कि किसी बड़े लेखक/लेखिका की किताब पर कोई अन्य बड़ा लेखक/लेखिका लिखे। मगर पुरवाई...

हिंदी में एक नया प्रयोग साइंस फिक्शन ‘3020 ई.’ से

एक हजार वर्ष बाद हमारी स्थिति क्या होगी? हमारा जीवन कैसा होगा? नदी-पेड़-तालाब का साथ मिल पायेगा या नहीं? कैसी होगी हमारी प्यारी धरती?...

आफ़ताब ‘आस’ की पांच ग़ज़लें

The Purvai - अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता 33
ग़ज़ल - 1 हमारी बात ये समझो है बेहतरी के  लिए कोई किसी के लिए है, कोई किसी के...

डॉ. यासमीन मूमल की ग़ज़ल – चाँद तारों को लेकर किधर जाएगा

The Purvai - अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता 34
सांप का ज़ह्र फिर भी उतर जाएगा। डस लिया आदमी ने तो मर जाएगा।। उससे मिलना तो नज़रें मिलाना...

लेख

फ़िल्म समीक्षा

बाल साहित्य

इधर उधर से