Wednesday, March 25, 2026

अपनी बात

ग़ज़ल एवं गीत

मनीष बादल की ग़ज़लें

01 हम देखते ही रह गये बस ख़्वाब आपके और ग़ैर सारे हो गये अहबाब आपके बस बेवफ़ाई आपकी अच्छी नहीं लगी नाज़ो-अदा तो ख़ूब हैं नायाब आपके हम...

किरण यादव की तीन ग़ज़लें

1. वक़्त नहीं है और नहीं है फ़ुरसत भी, कैसे दिन दिखलाती है ये क़िस्मत भी। आईने तुझ से ये शर्त रही इक दिन, पहचानी जायेगी अपनी सूरत...

साक्षात्कार

कविता

सूर्यकांत शर्मा की कविता – युद्ध

युद्व की भीषणता का बढ़ता जा रहा शैतानी आकार। दिन पर दिन बारूदी सतह का होता जा रहा विस्तार। हिंसा -हमला घात- प्रतिघात सुरसा मानिंद बढ़ाते जा रहे अपना हिंसक व्यवहार। साँसों पर युद्ध जनित प्रदूषण का शेषनागी अवतार ज़कड़ता...

व्यंग्य

फ़िल्म समीक्षा

सिनेमा का कविता पाठ है ‘छावा’

छावा फिल्म की समीक्षा क्यों की जाए पहला तो प्रश्न यही उठना चाहिए। ऐसी फिल्में समीक्षाओं से परे की होती हैं क्योंकि आम दर्शक...

कहानी

डॉ. शिवानी कोहली आनंद की कहानी – सरहद से खत

मेरी प्रीत, शादी की पहली सालगिरह बहुत-बहुत मुबारक हो तुम्हें। माँ कैसी है?, बाबा, याद करते हैं मुझे?, छोटी कैसी है?, और हरी काका, वे...

डॉ ऋतु शर्मा ननंन पाँडे की कहानी – जिप्सी फूल

नींद में वह अक्सर किसी पुरानी भाषा को पुकारते हुए जागती थी। कभी कोई लोरी जो उसने बचपन में माँ की गोद में सुनी...

डॉ. आरती स्मित की कहानी – और साज रूठ गया!

“सूरज! ओ सूरज! उठ जा! देख, सूरज निकल रहा है।” “सोने दो न बापू सा!” दस साल के दुबले-पतले सूरज, जिसके मासूम चेहरे का गोरा...

सुषमा सिन्हा की कहानी – शाबास बेटू !!

माह जून आते ही ट्रांसफर की खबर हवाओं से आने लगी। माही जानती है कि इस शहर में उसकी पोस्टिंग अवधि पूरी हो चुकी...

सुदर्शन रत्नाकर की कहानी – कोहरा

जैसे जैसे रात गहरा रही थी कोहरा और भी घना होता जा रहा था। उसे नींद नहीं आ रही थी। लिहाफ़ से निकल कर...

लघुकथा

वो फूलों-सी महकती एक लड़की… लेकिन उसकी ज़िंदगी की सच्चाई उस महक से बिल्कुल अलग थी। इन दिनों उसकी मजबूरी थी कि वह ऐसे व्यक्ति के...

लेख

हलचल

पुस्तक