Monday, June 1, 2026

अपनी बात

दो महानगर… दो क्लब… एक सा विवाद…!

भारत में हर राजनीतिक दल महँगाई, गरीबी और बेरोजगारी का ज़िक्र दिन में कम से कम एक बार तो करता ही है, मगर ज़मीनी...

ग़ज़ल एवं गीत

रेखा राजवंशी की दो ग़ज़लें

 ग़ज़ल अपनी मेहनत पे चल रहे हैं हम फिर क्यों लोगों को खल रहे हैं हम हो  गए  दूर  तेरी  दुनिया  से ख़ुद के रंगों में ढल रहे...

बेचैन कण्डियाल की ग़ज़लें

(एक) बुतों से बोलने की आस करते हो रेगिस्तान में पानी तलाश करते हो। इस शहर की खाक में सुबहो शाम किसी गुमनाम की तलाश करते हो। तुमको देखा...

साक्षात्कार

कविता

पंकजेश्वर की कविताएं

ब्रह्मांडीय विनम्रता हम धूल हैं— परिभाषा से परे, तारों की धूल सरीखे, जो टूटकर नहीं— बस अक्स बदलकर पृथ्वी में मिल गए। तारों की धूल सुनहरी हो सकती है, पर हम भी तो धूल...

व्यंग्य

फ़िल्म समीक्षा

सिनेमा का कविता पाठ है ‘छावा’

छावा फिल्म की समीक्षा क्यों की जाए पहला तो प्रश्न यही उठना चाहिए। ऐसी फिल्में समीक्षाओं से परे की होती हैं क्योंकि आम दर्शक...

कहानी

डॉ. शबनम आलम की कहानी- फ़र्ज़ इंसानियत का

'डिंग-डॉंग'! बेल बजी। सौम्या ने दरवाज़ा खोला तो देखा; डिलीवरी बॉय पिज़्ज़ा लेकर खड़ा था। 'मैडम! आपने पिज़्ज़ा का ऑर्डर करवाया था।' पिज़्ज़ा लेने से पहले सौम्या की...

स्वीडन लेखक हाइंस वरनर वेस्लर की कहानी -सभ्यता में असंतोष  

दिल्ली के लुटियंस ज़ोन में कहीं सीपी बनाम राजीव चौख के इर्द-गिर्द की आलीशान रेस्तराँ - हल्की पीली रोशनी, क्रिस्टल के गिलास, और धीमी...

लता तेजेस्वर ‘रेणुका’ के उपन्यास लहराता चाँद,  (उपन्यास का अंश)

पुरुवाई के लिए महाराष्ट्र हिंदी अकादमी से पुरस्कृत मेरा उपन्यास 'लहराता चाँद' का अंश एक अंधेरा कोना, न जाने जगह कौन सी है। वह बेहोश...

अंतरा करवड़े की कहानी – पापा को देर हो गई है

मिशी ने धीरे से एक बार स्कूल के गेट की ओर देखा।  विशू की मम्मी आ गई थी। लपककर दौड़ते हुए विशू ने मम्मी...

रेणु गुप्ता की कहानी -एक रात में दो दो चाँद खिले  

“पाखी, तू मेरी बहुत प्यारी बहन है न?” लास्ट स्टेज के बोन कैंसर से ग्रस्त परु,पाखी की आइडेंटिकल जुड़वां बहन ने उससे पूछा। “हाँ परु,...

लघुकथा

ए. आई. अरविंद ने ऑफिस में प्रवेश करते ही पाया कि चारों तरफ़ सन्नाटा है। सभी कुर्सियाँ ख़ाली हैं। उसने घड़ी की तरफ़ नज़र दौड़ाई।...

लेख

हलचल

पुस्तक