Tuesday, October 6, 2026

अपनी बात

माँझी जो नाव डुबोए…

एक सवाल यह उठाया जा रहा है कि विमान में अतिरिक्त पायलट क्यों मौजूद थे। चूंकि मैं इक्कीस वर्षों तक एयर इंडिया में काम...

ग़ज़ल एवं गीत

डॉ. शिवनारायण की ग़ज़लें

1. कदम-कदम पर लाखों छल भीड़ बहुत है धीरे चल सारे ख़त को खोलें हम शायद कोई निकले हल हर दिल यह क्यों सोच रहा कैसा होगा अपना कल होंठों पर...

बलजीत सिंह की गज़लें

  ग़ज़ल 1 लग रहा था कि घर में तन्हा हूँ मैं तो लेकिन नगर में तन्हा हूँ साथ मेरे है क़ाफिला फिर भी है तअज्जुब सफ़र में तन्हा...

साक्षात्कार

कविता

निज़ाम फतेहपुरी के दोहे

छोड़ बुराई नेक बन, पाप करे शैतान। स्वर्ग नर्क सब कर्म से, तेरे है इंसान।। समझ-समझ समझा नहीं, समझ नहीं थी यार। वो तो मेरे पास है,...

व्यंग्य

फ़िल्म समीक्षा

ठिठकी हुई ‘सतलुज’-फ़िल्म समीक्षा

 सुशील उपाध्याय फिल्म 'सतलुज' (पुराना नाम 'पंजाब 95')। जो लोग इसे नहीं देखना चाहते थे, अब वे भी इसे देखने का जुगाड़ लगा रहे...

कहानी

दीपक शर्मा की कहानी कुर्सी के कवि

“श्री विशेश्वर नाथ घर पर हैं क्या?” बाहर चूड़ियों की खनखनाहट के साथ मधुर एक स्त्री- स्वर खनका। “एक मिनट,” वैजयंती मेरे पास चली आई।...

नीलिमा शर्मा की कहानी – लम्हों ने खता की, सदियों ने सजा पायी

एक उपवन ही तो जिंदगी भी जहाँ  हर तरह के पेड़ पौधे लगे होते हैं। हर एक पेड़ पौधे की अपनी प्रकृति होती हैं। ...

फकीर मोहन सेनापति की कहानी-रेवती

ओड़िया से हिंदी रूपांतर - शंकर लाल पुरोहित कटक जिले में हरिपुर परगने का देहात। गाँव का नाम पाटपुर। गांव के छोर पर एक...

अरूणा सब्बरवाल की कहानी- महकती बयार 

वह  तो ख़ुशखबरी  सुना कर चली गयी। ख़ुशी के मारे उसकी आँखो से नींद  ऐसी उड़ी की रात भर करवटें बदलती रही। यह आम...

डॉ. मुक्ति शर्मा की कहानी – अंदर एक और घर…

छब्बीस साल का अमन मीर हमेशा दूसरे लड़कों से अलग दिखाई देता था। बचपन से क्रिकेट का दीवाना था, पर एक अजीब आदत थी। कभी...

लघुकथा

रजनी की सास को आज राशन लेने जाना था, जहाँ भीड़ और लम्बी क्यू के चलते उनके तीन चार घंटे से पहले लौटने की...

लेख

हलचल

पुस्तक