The Purvai - अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता 6

डॉ. उपमा शर्मा की कहानी – नदी की अविरल बहती धारा

उछलती,इठलाती भावनाओं के प्रवाह का असीम वेग लिए वो बहती जाती थी। मम्मी पापा की लाड़ली,भाइयों की दुलारी। सुबह से सांझ तक बस गीतों...
The Purvai - अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता 7

विपिन पवार की कलम से – खिड़कियों से झांकते अपने-अपने एकांत

विख्‍यात ब्रिटिश लेखक एवं राजनेता ऑगस्टिन बिरेल ने कहा है कि ‘’बावर्चियों, योद्धाओं और लेखकों का आंकलन इस बात से किया जाना चाहिए किवे...

अपनी बात

साक्षात्कार

कविता

व्यंग्य

कहानी

The Purvai - अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता 19

डॉ. उपमा शर्मा की कहानी – नदी की अविरल बहती धारा

उछलती,इठलाती भावनाओं के प्रवाह का असीम वेग लिए वो बहती जाती थी। मम्मी पापा की लाड़ली,भाइयों की दुलारी। सुबह से सांझ तक बस गीतों...

लघुकथा

The Purvai - अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता 24

डॉ. शिप्रा शिल्पी की लघुकथा – कलमुँही

हाँ!! यही तो नाम था उसका, बचपन से बस इसी नाम से तो पुकारा जाता...
The Purvai - अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता 25

डॉ. मीना राठौर की लघुकथा – हमसफ़र

आज  इस महंगाई के दौर में किसी  संस्था में अतिथि  के रूप में कार्य करना ...
The Purvai - अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता 26

प्रवीण कुमार की लघुकथा – काश

40 वर्षीय अधेड़ रामफल। वह तीन बार फेल हुआ दसवीं में। शरीर बहुत तंदरुस्त था,...
The Purvai - अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता 27

अंजू खरबंदा की लघुकथा – बुलावा

ठक-ठक....! "कौन ? दरवाजा खुला है आ जाओ ।" "राम राम चन्दा!" "राम राम बाबूजी! आप यहाँ!" "क्यूं मैं...
The Purvai - अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता 28

कमला नरवरिया की लघुकथा – खिलता बचपन

अनु बेटा सुबह हो गई जाग जाओ बेटा, स्कूल का टाइम होने वाला है मधु...

पुस्तक समीक्षा

ग़ज़ल एवं गीत

विपिन पवार की कलम से – खिड़कियों से झांकते अपने-अपने एकांत

विख्‍यात ब्रिटिश लेखक एवं राजनेता ऑगस्टिन बिरेल ने कहा है कि ‘’बावर्चियों, योद्धाओं और लेखकों का आंकलन इस बात से किया जाना चाहिए किवे...

डॉ. भारती अग्रवाल का समीक्षात्मक लेख – हिंदी साहित्य में नया...

राकेश शंकर भारती का उपन्यास 3020 ई. सम्भवत: हिंदी साहित्य का ऐसा पहला उपन्यास है जिसकी कल्पना का आधार विज्ञान है। आज से पूर्व...

निज़ाम फतेहपुरी की ग़ज़ल

The Purvai - अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता 33
बुढ़ापे में  उसका  नहीं  कोई सानी। जो पीता है  ठर्रा  मिलाए  न पानी।। चढ़ी ही नहीं जो  वो  उतरेगी...

अल्पना सुहासिनी की दो ग़ज़लें

The Purvai - अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता 34
1 जब भी होता है जहाँ होता है, इश्क़ इबादत का बयां होता है। इश्क़ में शर्त नहीं होती है, इश्क़...

लेख

फ़िल्म समीक्षा

बाल साहित्य

इधर उधर से