The Purvai - अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता 6

संपादकीय – संयुक्त राज्य अमरीकिस्तान में गर्भपात पर पाबंदी

प्रश्न यह भी उठता है कि अमरीका चाहता है कि उसके नागरिकों को बंदूक रखने की इजाज़त होनी चाहिये मगर गर्भपात की नहीं। कहीं...
The Purvai - अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता 7

रमेश कुमार ‘रिपु’ की कलम से ‘लिफाफे में कविता’ की समीक्षा – कवि...

समीक्षक - रमेश कुमार ‘रिपु’ कवि सम्मेलन की दुनिया में कैसे कैसे तिकड़म होते हैं जानना है,तो अरविंद तिवारी का ‘लिफाफे में कविता’ पढें। काल्पिनिक...

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साक्षात्कार

कविता

व्यंग्य

कहानी

The Purvai - अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता 19

गिरजा नरवरिया की कहानी – जिंदगी की नई राह

सुबह-सुबह अपनी सासू मां को चाय नाश्ता की प्लेट देते हुए " माँ जी, मैं आपसे कुछ कहना चाहती हूं.." विनम्र  आवाज में अवनी...

लघुकथा

The Purvai - अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता 24

महेश कुमार केशरी की लघुकथा – बुरा वक्त

अभी पैरों के प्लास्टर कटे दो दिन ही हुए थे l रवि धूप में बैठकर...
The Purvai - अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता 25

समीर उपाध्याय की लघुकथा – माँ अभी जिंदा है

छोटा बेटा कर्तव्य अपनी बयासी साल की वृद्ध मां की सेवा को ही अपना धर्म...
The Purvai - अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता 26

महेश कुमार केशरी की लघुकथा – निपटारा

वीडियोग्राफी और सर्वे का काम खत्म हो चुका था l कोर्ट परिसर  खचाखच भीड़ से...
The Purvai - अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता 27

सपना चंद्रा की लघुकथा – दोष

चुल्हे की धधकती आग पर तप रही बरतन में जैसे ही बंशीधर ने चबेने डाले,पास...
The Purvai - अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता 28

सरोज बिहारी की लघुकथा – आज का एकलव्य

आज उनके घर जाने पहचाने और अनजाने लोगों का ताँता लगा हुआ था। सफ़ेद कपड़ों...

पुस्तक समीक्षा

ग़ज़ल एवं गीत

रमेश कुमार ‘रिपु’ की कलम से ‘लिफाफे में कविता’ की समीक्षा...

समीक्षक - रमेश कुमार ‘रिपु’ कवि सम्मेलन की दुनिया में कैसे कैसे तिकड़म होते हैं जानना है,तो अरविंद तिवारी का ‘लिफाफे में कविता’ पढें। काल्पिनिक...

भावना गौड़ की कलम से – विविध भावों और संभावनाओं के...

समीक्षक - भावना गौड़ भारतीय मूल की लेखिका अरुणा सब्बरवाल वर्षों से लंदन में रह रही हैं, लेकिन भारत की पारंपरिक संस्कृति को उन्होंने बहुत...

अनुराग ग़ैर की ग़ज़लें

The Purvai - अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता 33
1 ख़ुदआराई किसकी खातिर, यह रानाई किसकी खातिर। क्यूं रस्मों को तोड़ रहे हो, यह रुसवाई किसकी खातिर। चाक़ दिलोजां ही अच्छे...

आशुतोष कुमार की ग़ज़ल

The Purvai - अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता 34
ज़िंदगी इश्क़ में सँवर जाये, जिस तरफ भी तेरी नजर जाये। आशिक़ी तो खुदा की नेमत है, दीद हो और आँख भर जाये। तू पिला दे जिसे यहां साकी, होश...

लेख

फ़िल्म समीक्षा

बाल साहित्य

इधर उधर से