सेक्शन 375 : एक संवेदनशील विषय पर कमाल की संतुलित फिल्म

फिल्म जो कहना चाहती है, वो अंत के वक्तव्यों में खुलकर सामने आया है। अदालत तार्किक रूप से किसी निष्कर्ष पर न पहुँचते हुए...

डेज़ी जैसवाल की तीन कविताएँ

1- बनना चाहती हूँ बनना चाहती हूँ उन शाख से टूटे सूखे पत्तों सी जो धूप से तपती धरती पर बिखरे पड़े रहते हैं यूँ ही और धूप से...

अपनी बात

साक्षात्कार

कविता

व्यंग्य

कहानी

राकेश शंकर भारती की कहानी – मेरी बेटी

1 जब भी मैं मुन्नी के बारे में सोचता हूँ तो अपने बचपन के दिनों की यादें मेरे ज़ेहन में दोबारा ताज़ी हो जाती हैं।...

लघुकथा

ज्योत्सना सिंह की दो लघुकथाएँ

साहित्य संवेद समूह द्वारा चयनित लघुकथाएँ 1- किल्ला समय बीतते देर नहीं लगती है मेरे ही जड़...

गीता परिहार की लघुकथा – ज़मीर

साहित्य संवेद समूह द्वारा चयनित लघुकथा कल रात कई बार नींद टूटी हर बार ट्विंकल और...

मधु जैन की लघुकथा – वो सात दिन

साहित्य संवेद समूह द्वारा चयनित लघुकथा "क्या वर्मा जी कल आपने छुट्टी ले ली, मुझे दो...

अशोक गुजराती की लघुकथा – राह

मैं फ़िलवक़्त पचास साल का हूं और अच्छे पद पर हूं. दो छोटे बेटा-बेटी हैं....

सारिका भूषण की लघुकथा – डर

"देखो ! अब मेरे गुलाबजामुन भी तैयार हो गए । जल्दी से बता कि कैसे...

पुस्तक समीक्षा

ग़ज़ल एवं गीत

माटी कहे कुम्हार से : गहरी संवेदनाओं की लघुकथाएँ

माटी कहे कुम्हार से (लघुकथा संग्रह 2018 – लेखकः डॉ. चन्द्रा सायता; प्रकाशकः अपना प्रकाशन, गोविन्दपुरा, भोपाल-462023। पृष्ठ संख्याः 104, मूल्यः रु.200/- मात्र जैसे जैसे...

नए विमर्श का प्रतिनिधि आख्यान है अनंत विजय की कृति ‘मार्क्सवाद...

"मार्क्सवाद का अर्धसत्य”, अनंत विजय, वाणी प्रकाशन, नई दिल्ली, 2019,सजिल्द, पृष्ठ संख्या-295,मूल्य-695 रुपये जीवन एवं जगत के अंतिम सत्य की खोज एक शाश्वत अनवरत यात्रा...

प्रभा मिश्रा का एक गीत

प्रभा मिश्रा कहानी मुझको मुझतक ढूंढ़कर लाने लगी है मै अपने ही चुने किरदार में खोने लगा हूँ ः बढ़ आरोह से...

डॉ. ममता मेहता की ग़ज़ल

डॉ. ममता मेहता मन ये बियाबान नहीं है खाली है वीरान नहीं है ***** हल्की फुल्की एक दो बातें भारी कुछ...

लेख

फ़िल्म समीक्षा