Tuesday, March 10, 2026

अपनी बात

ग़ज़ल एवं गीत

मनीष बादल की ग़ज़लें

01 हम देखते ही रह गये बस ख़्वाब आपके और ग़ैर सारे हो गये अहबाब आपके बस बेवफ़ाई आपकी अच्छी नहीं लगी नाज़ो-अदा तो ख़ूब हैं नायाब आपके हम...

किरण यादव की तीन ग़ज़लें

1. वक़्त नहीं है और नहीं है फ़ुरसत भी, कैसे दिन दिखलाती है ये क़िस्मत भी। आईने तुझ से ये शर्त रही इक दिन, पहचानी जायेगी अपनी सूरत...

साक्षात्कार

कविता

डॉ. अनुराधा पांडेय की कविता

वंदेमातरम-वंदेमातरम गायें अपना गान समर्पित। क्रांतिकारियों-बलिदानी के बलि-वेदी का मान समर्पित। एक-एक को जोड़-जोड़ कर गढ़ते हिंदुस्तान समर्पित। हम सब का अभिमान समर्पित वंदेमातरम गान समर्पित। उठो जगो...

व्यंग्य

फ़िल्म समीक्षा

सिनेमा का कविता पाठ है ‘छावा’

छावा फिल्म की समीक्षा क्यों की जाए पहला तो प्रश्न यही उठना चाहिए। ऐसी फिल्में समीक्षाओं से परे की होती हैं क्योंकि आम दर्शक...

कहानी

सुदर्शन रत्नाकर की कहानी – कोहरा

जैसे जैसे रात गहरा रही थी कोहरा और भी घना होता जा रहा था। उसे नींद नहीं आ रही थी। लिहाफ़ से निकल कर...

सुषमा मुनीन्द्र की कहानी – शासन-अनुशासन

यह शहर जब से एजूकेशन हब बना, लोगों ने दो-तीन कमरे बनवाकर बाहरी विद्यार्थियों को लपक लेने की आकांक्षा बना ली है। सुजान महिलायें...

संतोष तिवारी की कहानी – एक ख़त

प्रिय भाई भावेश  आशीर्वाद  मैं उम्मीद करती हूं कि तुम अपने परिवार के साथ दिल्ली में मजे में होंगे।पिछले दिनों पैतृक गांव धुमाकोट के.....के पड़ोसियों से...

दीपक शर्मा की कहानी – चकरी गिरह

“आप को प्रिंसीपल साहिबा ने याद किया है,मैडम,” कस्बापुर के राजकीय  महिला डिग्री कालेज का एक चपरासी रमा के भाषण- कक्ष के दरवाज़े से...

रेणु गुप्ता की कहानी – रूह से महसूस करो

“गुड मॉर्निंग मैम।" "गुड मॉर्निंग किड्स।"  "हैप्पी टीचर्स डे मैम," और मनस्वी की क्लास के सभी बच्चे अपनी-अपनी सीट से उठकर उसे अपने लाए  हुए फूल देने...

लघुकथा

लोकतंत्र का चौथा स्तम्भ संस्था के वार्षिक सांस्कृतिक महोत्सव की खबर तथाकथित बड़े अखबारों में न छपने से निराश होते हुए गाँधीवादी विचारों से प्रेरित...

लेख

हलचल

पुस्तक