The Purvai - अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता 6

संपादकीय : कोरोना को समझना आसान नहीं

होना तो यह चाहिये कि हर पार्टी के प्रत्येक सांसद और विधायक को अपने अपने चुनाव क्षेत्र में जाकर अपने अपने वोटरों को कोरोना...
The Purvai - अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता 7

प्रेम गुप्ता मानी की कहानी – जंगल

उस भयानक सपने के कारण सहसा उसकी नींद फिर टूट गई थी...। चारो तरफ़ अन्धेरा ही अन्धेरा था और वह पूरी तरह अन्धेरे में...

अपनी बात

साक्षात्कार

The Purvai - अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता 8

संपादकीय : कोरोना को समझना आसान नहीं

होना तो यह चाहिये कि हर पार्टी के प्रत्येक सांसद और विधायक को अपने अपने चुनाव क्षेत्र में जाकर अपने अपने वोटरों को कोरोना...

कविता

व्यंग्य

कहानी

The Purvai - अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता 19

प्रेम गुप्ता मानी की कहानी – जंगल

उस भयानक सपने के कारण सहसा उसकी नींद फिर टूट गई थी...। चारो तरफ़ अन्धेरा ही अन्धेरा था और वह पूरी तरह अन्धेरे में...

लघुकथा

The Purvai - अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता 24

रेखा श्रीवास्तव की लघुकथा – सम्मान

उमर ने नेट से देखा कि नवरात्रि की पूजा में क्या क्या सामान लगता है...
The Purvai - अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता 25

डॉ. मीनाक्षी शर्मा की लघुकथा – आस के लिए

"सौ दिए लेने है मुझे, पैसे सही सही बताओ अम्मा..." "अरे ये तो टेढ़े मेढ़े और...
The Purvai - अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता 26

कल्पना मनोरमा की दो लघुकथाएँ

रँगरेज़ा की थापें घर में जब से स्वच्छंद विचारधारा वाली बहू सभ्यता, ब्याहकर आई थी तब...
The Purvai - अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता 27

रेखा श्रीवास्तव की लघुकथा – गेहूँ संग घुन

कोरोना ने बहुत सी जिंदगियों को कड़वे घूँट पिला कर मानवता, रिश्ते , प्रेम और...
The Purvai - अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता 28

सीमा मधुरिमा की लघुकथा : पत्रकार

पिछले तीन हफ्ते से वो सड़को पर लगातार पैदल चल रहे मजदूरों का दर्द शूट...

पुस्तक समीक्षा

ग़ज़ल एवं गीत

मेरे हिस्से की धूप : मानवतावादी दृष्टि

‘मेरे हिस्से की धूप’ नीना शर्मा ‘हरेश’ द्वारा रचित उपन्यास सन् २०२० में माया प्रकाशन ने प्रकाशित किया। इस उपन्यास ने बहुत ही जल्द...

पुस्तक समीक्षा : तन की भटकन, मन की छ्टपटाहट को झेलते...

पलों के पैमाने पीते हुए जाने कितनी बार हम जीते हैं, कुछ देर ठहर कर स्वांस लेते हैं और आगे बढ़ते चले जाते हैं....

मनीष श्रीवास्तव ‘बादल’ की तीन ग़ज़लें

The Purvai - अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता 33
ग़ज़ल 1 नफ़रतों  को   काटती  है  उल्फ़तों  की  धार  बस प्यार  करिये  प्यार  करिये  प्यार करिये प्यार बस ये   कहाँ ...

डॉ. प्रणव भारती का गीत – फिर विदा लूं

The Purvai - अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता 34
मैं विरह की चाँदनी में गीत गा लूँ और थोड़ी देर तक सपने सजा लूँ तुम फ़लक पर सजे रहना चाँद बनकर श्वाँस की...

लेख

फ़िल्म समीक्षा

The Purvai - अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता 35

अंजान : ओ साथी रे, तेरे बिना भी क्या जीना…!

कविता लिखने का शौक़ तो कालेज के दिनों से ही था। मित्रमण्डली में बैठ कर अपनी कविताएं सुनाया करते थे। उनकी कविताओं में भोजपुरी...

बाल साहित्य