Sunday, September 20, 2026

अपनी बात

बिन जाति कैसा सरनेम…

भारत एक मामले में विशिष्ट देश है कि यहाँ सरनेम (यानी कि कुलनाम) सुनते ही हमें व्यक्ति की जाति मालूम हो जाती है। मिश्रा,...

ग़ज़ल एवं गीत

बलजीत सिंह की गज़लें

  ग़ज़ल 1 लग रहा था कि घर में तन्हा हूँ मैं तो लेकिन नगर में तन्हा हूँ साथ मेरे है क़ाफिला फिर भी है तअज्जुब सफ़र में तन्हा...

हरकीरत हीर की तीन ग़ज़लें

1. सफ़र में छोड़कर हमको न यूँ तो हमसफ़र जाएँ, अधूरी ज़िंदगी कैसे कटेगी, हम किधर जाएँ। न यूँ भी रूठ के मुँह मोड़ के हमसे उधर...

साक्षात्कार

कविता

प्रदीप गुप्ता  की कविता-फ़ॉल सीजन 

फ़ाल सीजन आ चुका है.  पश्चिमी देशों में इसे Autumn, saison d'automne भी कहते हैं एक उत्सव की तरह होता है , वृक्षों पर...

व्यंग्य

फ़िल्म समीक्षा

ठिठकी हुई ‘सतलुज’-फ़िल्म समीक्षा

 सुशील उपाध्याय फिल्म 'सतलुज' (पुराना नाम 'पंजाब 95')। जो लोग इसे नहीं देखना चाहते थे, अब वे भी इसे देखने का जुगाड़ लगा रहे...

कहानी

प्रियदर्शन की कहानी – कीड़ा

बाथरूम में दाखिल होते वह चिहुंक गया- एक कोने पर एक छोटा सा- अनजान- कीड़ा बहुत धीरे-धीरे रेंग रहा था। यह केंचुए का छोटा...

डॉ सुभाष गोयल ’सोम’ की कहानी -माँ  और  ममता’

"माँ! मुझे कुछ महीने के लिये विदेश जाना पड़ रहा है। तेरे रहने का इन्तजाम मैंने करा दिया है।" तक़रीबन 32 साल के अविवाहित डॉक्टर...

सोनू यशराज- घर सुन रहा है…

जहां जगह मिले वहीं पसर जाती हैं आवाजें। तब हमारी आँखें कान बन जाती हैं और कान आँखें। अब देखो ना, इस मायानगरी मुंबई को...

पंकज सुबीर की कहानी-उस नाटे आदमी का नाम क्या था?

मैं अपने चैम्बर में होता हूँ तो कम्प्यूटर की स्क्रीन पर ही नज़रें जमाए होता हूँ। आजकल मेरा सारा काम कम्प्यूटर पर ही होता...

दीपक शर्मा की कहानी- दूध बताशा राजा खाए

समर वेकेशन के बाद हमारा कालेज जब खुला तो हमारे मनोविज्ञान विभाग में एक बड़ा सरप्राइज़ हमारी प्रतीक्षा में था। 38- वर्षीया हमारी विभागाध्यक्षा का...

लघुकथा

रजनी की सास को आज राशन लेने जाना था, जहाँ भीड़ और लम्बी क्यू के चलते उनके तीन चार घंटे से पहले लौटने की...

लेख

हलचल

पुस्तक