The Purvai - अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता 6

महेश कुमार केशरी की कविता – तबसे आदमी भी पेड़ होना चाहता है..!

मैं उस हरकारे के बच्चों को भी उसी समय से देख रहा था जिस समय से मैं उस बरगद के पेड़ को देखा करता था पेड़ के आसपास...
The Purvai - अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता 7

संगीता राजपूत श्यामा की कहानी – चिल्लर

अवधेश प्रताप सिंह लखनऊ के जाने माने धनी व्यक्ति थे उनका कपङे का कारोबार था। सुदंर और संस्कारी पत्नी सुनंदा और एक साल का...

अपनी बात

साक्षात्कार

The Purvai - अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता 8

संपादकीय – पाकिस्तानी युवकों को लंदन में मोदी से आज़ादी चाहिये…!

इंग्लैंड के लेस्टर शहर में हिन्दुओं के ख़िलाफ मुस्लिम भीड़ की हिंसा की भारतीय उच्चायोग ने कड़े शब्दों में निंदा की है। लंदन स्थित...

कविता

व्यंग्य

कहानी

The Purvai - अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता 19

संगीता राजपूत श्यामा की कहानी – चिल्लर

अवधेश प्रताप सिंह लखनऊ के जाने माने धनी व्यक्ति थे उनका कपङे का कारोबार था। सुदंर और संस्कारी पत्नी सुनंदा और एक साल का...

लघुकथा

The Purvai - अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता 24

नीना सिन्हा की दो लघुकथाएँ

1 - जीवन की डगर “बाल सखा विवेक की गुमशुदगी की रिपोर्ट लिखाए और  इंतजार करते...
The Purvai - अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता 25

उर्वी वानिया सिंह की लघुकथा – समझदारी

आज शाम छत पर ठहल थे हुए मैंने देखा  कि मस्जिद से पंछी आकर हमारी छत...
The Purvai - अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता 26

बालकृष्ण गुप्ता ‘गुरु’ की दो लघुकथाएँ

1 - बच्चे, बम, बर्बाद  पता नहीं कहाँ से आकर कौओं ने काँव-काँव कर कहा, “उठ...
The Purvai - अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता 27

दिलीप कुमार की लघुकथा – चल भाग यहाँ से

"चल, भाग यहाँ से “ “चल, भाग यहां से “ जैसे ही उसने सुना ,वो अपनी...
The Purvai - अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता 28

रेखा श्रीवास्तव की लघुकथा – उजड़ा चमन

 "अरे ! ये क्या? कहीं भी हरियाली नहीं ।" मन एक बार उजड़े पहाड़ों को...

पुस्तक समीक्षा

ग़ज़ल एवं गीत

अनिता रश्मि की कलम से – जाबिर हुसैन की पुस्तक ‘जैसे...

पुस्तक  :  जैसे रेत पर गिरती है ओस (काव्यात्मक डायरी); रचनाकार  :  डाॅ. जाबिर हुसेन; संस्करण : जनवरी 2020; प्रकाशक  :  दोआबा प्रकाशन, 247...

प्रगति गुप्ता की कलम से – सामाजिक-पारिवारिक परिवेश में बुनी सकारात्मक...

आज घर,परिवार और समाज के माहौल में परिवर्तन आने से रिश्तों की परिभाषाओं में परिवर्तन आया है। नित नई दुविधाओं और समस्याओं का सामना...

निज़ाम फतेहपुरी की ग़ज़ल – यूॅं किसी से झूठ कह दूॅं ये हुनर में मेरे नइं

The Purvai - अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता 33
ख़ूबसूरत हैं तो होने दो नज़र में मेरे नइं। यूॅं किसी से झूठ कह दूॅं ये हुनर में...

निज़ाम फतेहपुरी की ग़ज़ल

The Purvai - अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता 34
छन-छन के हुस्न उनका यूँ निकले नक़ाब से। जैसे  निकल  रही  हो  किरण  माहताब  से।। पानी  में  पाँव  रखते ...

लेख

फ़िल्म समीक्षा

The Purvai - अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता 35

डा रूचिरा ढींगरा का लेख – कहानीकार धर्मवीर भारती : ...

धर्मवीर भारती से पूर्व प्रेमचंद की आदर्शोन्मुख यथार्थवादी , यशपाल की मार्क्सवादी, जैनेंद्र ,इलाचंद्र जोशी , अज्ञेय, प्रसाद की भावपूर्ण मनोविश्लेषणवादी कहानियां लिखी जा...

बाल साहित्य

इधर उधर से