The Purvai - अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता 6

डॉ. मीनाक्षी जोशी का लेख – नए रास्तों की तलाश में कथा-लेखिकाएँ

युगानुसार सामाजिक और वैश्विक धरातल पर जहां परिस्थितियों में बदलाव के अंकुर फूटने लगते हैं, वहीं साहित्यकार की संवेदना अपनी दिशाओं का निर्धारण करने...
The Purvai - अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता 7

अमित कुमार दीक्षित की कविता – रिटायर्ड कर्मचारी की पीड़ा

विनती सुन ले संगठन के शीर्ष अधिकारी कभी मैनें भी संभाली थी यह कुर्सी तुम्हारी परन्तु अब कोई नहीं सुनता लाचारी हमारी कार्यालय के चक्कर लगा –...

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साक्षात्कार

कविता

व्यंग्य

कहानी

The Purvai - अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता 19

संगीता कुमारी की कहानी – अंजान

दरवाजे की घंटी बजी।  ‘कौन है?’ ‘मैं हूँ| खोलो…’  (आवाज पहचानकर मिनी ने दरवाजा खोल दिया।)  ‘वापिस क्यों आये?’  ‘फाईल लेना भूल गया था। वही लेने आया हूँ।‘  ‘अब चाय...

लघुकथा

The Purvai - अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता 24

निशा नंदिनी गुप्ता की लघुकथा – अर्थहीन पुरस्कार

संजीव और निगम दोनों स्टेट बैंक में काम करते थे। दोनों में मित्रता के साथ-साथ...
The Purvai - अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता 25

जीतेंद्र शिवहरे की लघुकथा

झूठ रविना की आखें अखबार की एक खबर पर जमी थी। पहले पन्ने पर बीती रात...
The Purvai - अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता 26

अरविंद दीक्षित की दो लघुकथाएँ

1. चमक "रानू !अब चलो भी ,मेक अप में न जाने कितना समय लगाती हो तुम...
The Purvai - अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता 27

सविता मिश्रा की लघुकथा – एकता की शक्ति

मकान बनाने के लिए ईंटें कम पड़ गयी थीं | और ईंटों के इंतजार में...
The Purvai - अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता 28

डॉ. कुमारसंभव जोशी की दो लघुकथाएँ

1- तमाशा "बन्दर! गुलाटी मार के दिखाएगा।" पेन्ट-शर्ट-टाई पहने बंदर बेमन से गुलाटी मार गया। "चल साईकिल चला...

पुस्तक समीक्षा

ग़ज़ल एवं गीत

पुस्तक समीक्षा : सात कदम रिश्तों और दुनियादारी का दस्तावेज

प्रवासी साहित्यकारों के मन में भारत को छोड़ने का दर्द और भारतीय संस्कृति की महक सदा बनी रहती है। ऐसे ही कहानीकार, कथा साहित्य...

माटी कहे कुम्हार से : गहरी संवेदनाओं की लघुकथाएँ

माटी कहे कुम्हार से (लघुकथा संग्रह 2018 – लेखकः डॉ. चन्द्रा सायता; प्रकाशकः अपना प्रकाशन, गोविन्दपुरा, भोपाल-462023। पृष्ठ संख्याः 104, मूल्यः रु.200/- मात्र जैसे जैसे...

देवमणि पाण्डेय की दो ग़ज़लें

The Purvai - अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता 33
1 मेरा यक़ीन, हौसला, किरदार देखकर मंज़िल क़रीब आ गई रफ़्तार देखकर जब फ़ासले हुए हैं तो रोई है मां...

स्मृति शर्मा की तीन ग़ज़लें

The Purvai - अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता 34
1 कुछ इस तरह से किया दर्द का चारा हमने हर एक अश्क को कागज़ पे उतारा हमने।   अजनबी शहर...

लेख

फ़िल्म समीक्षा

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डॉ. मीनाक्षी जोशी का लेख – नए रास्तों की तलाश में...

युगानुसार सामाजिक और वैश्विक धरातल पर जहां परिस्थितियों में बदलाव के अंकुर फूटने लगते हैं, वहीं साहित्यकार की संवेदना अपनी दिशाओं का निर्धारण करने...