Sunday, March 8, 2026

अपनी बात

ग़ज़ल एवं गीत

सोनिया अक्स सोनम की ग़ज़लें

1. नसीब अपना किसी रोज़ आज़माओ तो हवा के सामने कोई दिया जलाओ तो  चलो कि रो नहीं सकते हमारे साथ अगर हमारे हाल पे थोड़ा सा मुस्कुराओ...

सुरेश कुमार ‘सौरभ’ अकवि की ग़ज़ल

तुम जो गाओ वह दुहराऊँ, ऐसा थोड़ी होगा जी। 'कोरस' का गायक बन जाऊँ, ऐसा थोड़ी होगा जी। ढोलक, तबला, हारमोनियम सभी तुम्हारे नाम हुए; मैं बैठा...

साक्षात्कार

कविता

नरेंद्र कौर छाबड़ा की कविता – नदी की व्यथा

व्यथित उदास नदी अपना अतीत याद करती है पहाड़ों की प्यारी गोद से जन्म लेकर कैसे लहराती, इतराती इठलाती ,कल कल करती कांच सा पारदर्शी जल लिए सफर पर निकली थी...

व्यंग्य

फ़िल्म समीक्षा

सिनेमा का कविता पाठ है ‘छावा’

छावा फिल्म की समीक्षा क्यों की जाए पहला तो प्रश्न यही उठना चाहिए। ऐसी फिल्में समीक्षाओं से परे की होती हैं क्योंकि आम दर्शक...

कहानी

दीपक शर्मा की कहानी – चकरी गिरह

“आप को प्रिंसीपल साहिबा ने याद किया है,मैडम,” कस्बापुर के राजकीय  महिला डिग्री कालेज का एक चपरासी रमा के भाषण- कक्ष के दरवाज़े से...

रेणु गुप्ता की कहानी – रूह से महसूस करो

“गुड मॉर्निंग मैम।" "गुड मॉर्निंग किड्स।"  "हैप्पी टीचर्स डे मैम," और मनस्वी की क्लास के सभी बच्चे अपनी-अपनी सीट से उठकर उसे अपने लाए  हुए फूल देने...

पद्मा मिश्रा की कहानी – हँसुली

बाबूजी चुपचाप चौकी के एक कोने पर बैठे हुए थे। उस शब्दहीन सन्नाटे ने मानो उनकी आवाज़ ही छीन ली थी। शाम के चार बज...

दीपक गिरकर की कहानी – सात जन्मों का रिश्ता

आज मेरे जीवन का सर्वाधिक स्वर्णिम दिन उदित हुआ था। मैं और गौरी,  हम दोनों ने बारहवीं की परीक्षा प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण की...

रीता गुप्ता की कहानी – और बर्गर ठंडा होता रहा

रसोई का चूल्हा सब जानता है, उसके पास होता है घरवालों के सुख दुख का लेखा जोखा क्योंकि उसने देखे होते हैं घर के...

लघुकथा

1 - फागुन की आहट गाँव में फागुन उतर आया था। खेतों में गेहूँ की बालियाँ सुनहरी होने लगी थीं और पलाश की डालियाँ अंगारों-सी...

लेख

हलचल

पुस्तक