Sunday, May 3, 2026

अपनी बात

संपादकीय – ख़ून चूसने में भी नख़रा…

क्या आपने कभी यह महसूस किया है कि एक ही कमरे में कुछ लोग मीटिंग कर रहे हैं... मौसम मच्छरों का है और उस...

ग़ज़ल एवं गीत

रेखा राजवंशी की दो ग़ज़लें

 ग़ज़ल अपनी मेहनत पे चल रहे हैं हम फिर क्यों लोगों को खल रहे हैं हम हो  गए  दूर  तेरी  दुनिया  से ख़ुद के रंगों में ढल रहे...

बेचैन कण्डियाल की ग़ज़लें

(एक) बुतों से बोलने की आस करते हो रेगिस्तान में पानी तलाश करते हो। इस शहर की खाक में सुबहो शाम किसी गुमनाम की तलाश करते हो। तुमको देखा...

साक्षात्कार

कविता

अरुण शीतांश की कविताएँ

स्पर्श तो हमने सोचा कि एक बकरी अपने बच्चे को बचाती है मां संतान को बचाती है बंदर,भालू,हाथी,शेरनी, गिलहरी और न जाने कितने यहां तक कि एक नाव...

व्यंग्य

फ़िल्म समीक्षा

सिनेमा का कविता पाठ है ‘छावा’

छावा फिल्म की समीक्षा क्यों की जाए पहला तो प्रश्न यही उठना चाहिए। ऐसी फिल्में समीक्षाओं से परे की होती हैं क्योंकि आम दर्शक...

कहानी

ज्योत्स्ना मिश्रा की कहानी-योग नियोग 

डर तो नहीं रहीं ? पता नहीं उसे किस बात से डरना था ? पर जब उस गहरी मर्दानी आवाज ने हल्के मद्धम स्वर में...

मनोरजंन कुमार तिवारी की कहानी – किन्नर कथा

एक अच्छा -खासा, चलता-फिरता आदमी(पुरुष), जो दौड़ सकता है, भाग सकता है, मगर वह दौड़ता नहीं, जरुरत पड़ने पर भागता भी नहीं, जैसे "माहवारी...

माधव राठौड़ की कहानी- समय का फेर

वह आदतन छः बजे के बाद ही घर लौटता था। बच्चों की छुट्टियां होने की वजह से कल पत्नी को पीहर जाना है तो...

दीपक शर्मा की कहानी – आपदा

“हैप्पी बर्थडे,” सुबह सात बजे बहन ने मुझे मोबाइल किया था, “अपने स्कूल से मैं सीधे तुम्हारे पास पहुंच रही हूं। दोपहर का खाना...

सरस दरबारी की कहानी – अबूझ

"दीदी आपको शादी में आना ही होगा।" "पर स्वाति मैं किसी को नहीं जानती।" "मुझे तो जानती हैं न । यह भी जानती हैं कि मेरे...

लघुकथा

  पिता की सीख  सखाराम को वॄद्धाश्रम आये हुये काफ़ी दिन हो गये थे, लेकिन उसे अपने घर की याद खूब सताती थी , क्योंकि...

लेख

हलचल

पुस्तक