Tuesday, August 25, 2026

अपनी बात

चिकन बदला ले रहा है… !

कभी-कभी सोचता हूँ कि विश्व में कितने लोग मांसाहारी हैं! उन मांसाहारी लोगों के लिए कितने मुर्गे, बकरे, भेड़, गाय, भैंस आदि काटे जाते...

ग़ज़ल एवं गीत

बलजीत सिंह की गज़लें

  ग़ज़ल 1 लग रहा था कि घर में तन्हा हूँ मैं तो लेकिन नगर में तन्हा हूँ साथ मेरे है क़ाफिला फिर भी है तअज्जुब सफ़र में तन्हा...

हरकीरत हीर की तीन ग़ज़लें

1. सफ़र में छोड़कर हमको न यूँ तो हमसफ़र जाएँ, अधूरी ज़िंदगी कैसे कटेगी, हम किधर जाएँ। न यूँ भी रूठ के मुँह मोड़ के हमसे उधर...

साक्षात्कार

कविता

सूर्यकांत शर्मा की कविता – किराए का मकान

किराए का मकान है तू, समझ बैठा जिसे दुकान है तू। धुंधली सी दुनिया से आया है तू समझ ले कान खोल कर सुन ले तू। महज़ इस मकान में किराए पर आया है तू। न...

व्यंग्य

फ़िल्म समीक्षा

ठिठकी हुई ‘सतलुज’-फ़िल्म समीक्षा

 सुशील उपाध्याय फिल्म 'सतलुज' (पुराना नाम 'पंजाब 95')। जो लोग इसे नहीं देखना चाहते थे, अब वे भी इसे देखने का जुगाड़ लगा रहे...

कहानी

ज्योत्स्ना कपिल की कहानी-कितने सलीब

दर्पण में स्वयं का रूप देखकर धानी फूली न समाई। आज वह खुद को अपनी नहीं बल्कि सुमेर की नज़रों से देख रही थी।...

वंदना बाजपेयी की कहानी- कीबोर्ड पर नायिका

9 बजने वाले थे। 10 बजे निकलना था। मैंने तैयार होने के लिए अलमारी खोली। सभी कुछ वैसे ही रखा था। तीन रंग की चूड़ियाँ,...

इला सिंह की कहानी-नाम के रिश्ते

तृप्ति आँगन में मेहमान बनी बैठी है। सब उसे घेरकर बैठे हैं। चाय का कप दोनों हथेलियों के बीच दबाए पीने के बहाने चेहरे के...

दीपक शर्मा की कहानी ‘काज- प्रयोजन’

यह उन दिनों की बात है जब मोबाइल फ़ोन प्रयोग में नहीं आए थे। सन उन्नीस सौ अठासी की। “मैं कस्बापुर से बोल रहा हूं,”...

डॉ. शिवानी कोहली आनंद की कहानी- उठाई हुई ज़िंदगी

दीये की फड़फड़ाती लौ मानो जीवन के अंतिम क्षणों का संकेत दे रही थी। तीव्र हवा के झोंकों से दीवार पर टंगा कैलेंडर समय...

लघुकथा

 ख्वाहिशों के छोर “बस, मिष्ठी! यही आदत तुम्हारी नहीं पसंद है मुझे,” नाश्ते की ट्रे लेकर कमरे में प्रवेश करती माँ ने बिफरते हुए कहा। पत्नी...

लेख

हलचल

पुस्तक