Monday, July 13, 2026

अपनी बात

ट्रंप के लाल कार्ड की फ़ीफ़ा…

जब से खेलों में पैसा बरसने लगा है, बेईमानी, भ्रष्टाचार और पक्षपात भी बाक़ायदा सिर उठाने लगे हैं। खेलों से खेल-भावना कहीं ग़ायब होती...

ग़ज़ल एवं गीत

आशुतोष कुमार की ग़ज़लें

ग़ज़ल - 1 अब वो परवाने कहाँ जो शम्अ के थे साथ जलते मर गयी शायद महब्बत अब नहीं पत्थर पिघलते खाये धोखे ज़िंदगी में इस क़दर...

पद्मश्री अशोक चक्रधर की तीन ग़ज़लें

मित्रो, पूरा हिन्दी जगत भाई अशोक चक्रधर जी के एक हास्य-व्यंग्य के कवि रूप से ही परिचित है। उनका गंभीर रचनाकर्म बहुत कम पाठकों...

साक्षात्कार

कविता

डॉ. शैलजा सक्सेना की कविताएँ

इंटरनेट की सड़क पर हमने इंटरनेट की भीड़-भरी              सड़क पर ढूँढ ही लिया      एक छोटा-सा कोना, बतियाने के लिये। अब परीक्षा...

व्यंग्य

फ़िल्म समीक्षा

सिनेमा का कविता पाठ है ‘छावा’

छावा फिल्म की समीक्षा क्यों की जाए पहला तो प्रश्न यही उठना चाहिए। ऐसी फिल्में समीक्षाओं से परे की होती हैं क्योंकि आम दर्शक...

कहानी

डॉ. पूरन सिंह की कहानी- माइंडसेट

  गांव में मेरी उम्र के सब लड़कों की शादी हो गई थी और लगभग दो-दो बच्चों के पिता बन गए थे। मेरे घरवाले भी...

संगीता कुमारी की कहानी-नशे की गिरफ्त  

तेज संगीत बज रहा था। नीलू अपने पति की बाहों में नशे में झूम रही थी। पति व्यापारी था। किस चीज का व्यापार करता...

दीपक शर्मा की कहानी-ऊंची छलांग

जब एक बड़े शहर के जाने- माने अस्पताल में मेरी नियुक्ति हुई तो मैं फूली न समायी। ख्याति- प्राप्त डा.मिश्रा हमारे मनोविकृति-विज्ञान विभाग के अध्यक्ष...

रजनी गुप्त की कहानी-फ्री-बर्ड

समय अपनी जगह से हिलने का नाम नही लेता। ऐसे भारी भरकम लम्‍हे कठोर शिला की तरह अपनी जगह पर स्थिर हो जाते जिन्‍हें...

वन्दना शर्मा की कहानी-बड़ी बेटी

आज पार्क में ज्यादा भीड़ नहीं थी। बारिश होने का मौसम हो रहा था। ठंडी हवाएँ चल रही थी। कुछ बच्चे झूला झूल रहे...

लघुकथा

 संवेदना  “कौन हो तुम?” “संवेदना।” “अरे! तुम अभी तक ज़िंदा हो?” “ज़िंदा नहीं... बस साँसें चल रही हैं।” “लेकिन तुम्हारा चेहरा इतना बुझा-बुझा क्यों है?” “हर दिन किसी की पीड़ा...

लेख

हलचल

पुस्तक