The Purvai - अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता 6

डॉ. अंजू लता सिंह की लघुकथा – पिघलता दुःख

सोनिया आज बेहद खुश नजर आ रही थी। सर्वश्रेष्ठ रैंक लेकर कोर्स भी पूरा कर लिया था उसने। आज पापा से जो मिलेगी स्वदेश जाकर..पूरे...
The Purvai - अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता 7

डॉ. माला मिश्र का लेख – प्राचीन भारत में सौन्दर्य-बोध

भारतीय मनीषा सदा से ही समन्वयवादी रही है । कारण , उसने सनातन सत्ता को भी सभी आभासिक प्राचीन भारत में सौन्दर्य - बोध...

अपनी बात

साक्षात्कार

कविता

व्यंग्य

कहानी

The Purvai - अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता 19

शशि श्रीवास्तव की कहानी – वर्दी

जीवन स्तर के लिहाज से गली की आबादी को कई हिस्सों में बांटा जा सकता है। गली के दोनों ओर बने करीब पचास घरों...

लघुकथा

The Purvai - अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता 6

डॉ. अंजू लता सिंह की लघुकथा – पिघलता दुःख

सोनिया आज बेहद खुश नजर आ रही थी। सर्वश्रेष्ठ रैंक लेकर कोर्स भी पूरा कर...
The Purvai - अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता 25

हरदीप सबरवाल की दो लघुकथाएँ

 1- तटस्थ सदर की चौड़ी सड़क भी भीड़ के कारण किसी संकरी गली से महसूस हो...
The Purvai - अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता 26

अरमान नदीम की लघुकथा – बाज़ी पलट गयी

शहर से दूर राजपुर  नाम का एक गांव था । गांव के लोग बड़े सीधे,...
The Purvai - अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता 27

रेखा श्रीवास्तव की लघुकथा – सम्मान

उमर ने नेट से देखा कि नवरात्रि की पूजा में क्या क्या सामान लगता है...
The Purvai - अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता 28

डॉ. मीनाक्षी शर्मा की लघुकथा – आस के लिए

"सौ दिए लेने है मुझे, पैसे सही सही बताओ अम्मा..." "अरे ये तो टेढ़े मेढ़े और...

पुस्तक समीक्षा

ग़ज़ल एवं गीत

अनीता सक्सेना द्वारा डॉ प्रभा मिश्रा की पुस्तक “पानी पानी पर”...

पानी-पानी पर डॉ. प्रभा मिश्रा जी का पहला गीत-ग़ज़ल और मुक्तक संग्रह है। प्रभाजी बहुत शांत स्वभाव की और कोमल हृदय की लेखिका हैं।...

मनुष्यता को बचाने की आवाज है काव्य संग्रह – ‘मेरे गांव...

वरिष्ठ कवि एवं समीक्षक नीलोत्पल रमेश जी के हाल में ही प्रकाशित प्रथम काव्य-संग्रह "मेरे गांव का पोखरा" ने हिन्दी साहित्याकाश में अपनी दमदार...

अखिल भण्डारी की ग़ज़लें – ‘जिस तरफ़ जाता नहीं कोई उधर जाना है’

The Purvai - अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता 33
1 - गुफ़्तुगू में कुछ न कुछ तो अन-कहा रह जाएगा गुफ़्तुगू में कुछ न कुछ तो अन-कहा...

मयंक राजेश की ग़ज़ल

The Purvai - अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता 34
करुँ क्या बात, क्या बोलूँ, किसी से मेरा दिल भर गया है दिल्लगी से ज़माना ये बता दे आज...

लेख

फ़िल्म समीक्षा

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डॉ. माला मिश्र का लेख – प्राचीन भारत में सौन्दर्य-बोध

भारतीय मनीषा सदा से ही समन्वयवादी रही है । कारण , उसने सनातन सत्ता को भी सभी आभासिक प्राचीन भारत में सौन्दर्य - बोध...

बाल साहित्य