Wednesday, November 4, 2026

अपनी बात

पद, प्रतिष्ठा और चमचागीरी…

कुछ लोगों के नामों का उल्लेख किया गया था – जिनके ओहदे थे बाकी सब इत्यादि थे इत्यादि तादाद में हमेशा ही ज़्यादा होते थे -  राजेश जोशी हिंदी...

ग़ज़ल एवं गीत

डॉ. शिवनारायण की ग़ज़लें

1. कदम-कदम पर लाखों छल भीड़ बहुत है धीरे चल सारे ख़त को खोलें हम शायद कोई निकले हल हर दिल यह क्यों सोच रहा कैसा होगा अपना कल होंठों पर...

बलजीत सिंह की गज़लें

  ग़ज़ल 1 लग रहा था कि घर में तन्हा हूँ मैं तो लेकिन नगर में तन्हा हूँ साथ मेरे है क़ाफिला फिर भी है तअज्जुब सफ़र में तन्हा...

साक्षात्कार

कविता

प्रतीक झा ‘ओप्पी’ की चार कविताएँ

  ईमानदारी का आखिरी ठिकाना अरे! अब क्या— सरकारी विभाग और योजनाएँ भी कम पड़ गईं जो तुम अब मंदिरों में भी चोरी करने लग गए? अरे! मासूम बच्चों की...

व्यंग्य

फ़िल्म समीक्षा

ठिठकी हुई ‘सतलुज’-फ़िल्म समीक्षा

 सुशील उपाध्याय फिल्म 'सतलुज' (पुराना नाम 'पंजाब 95')। जो लोग इसे नहीं देखना चाहते थे, अब वे भी इसे देखने का जुगाड़ लगा रहे...

कहानी

अनिता रश्मि की कहानी- रौशनी अँधेरे के खिलाफ थी

"हर चमकदार महानगर के पार्श्व में झुग्गी-झोपड़ियों का भी संसार होता है बाबूजी!" कहना चाहता है गुंजन, कह नहीं पाता और पिताजी के साथ ऑटो...

डॉ. अनुप्रिया की कहानी- माँ का अनकहा द्वंद्व

विनय का कॉल आया तो राधा ने प्रश्नवाचक दृष्टि से फोन की स्क्रीन की ओर देखा और फिर फोन उठा लिया। उधर से विनय की...

अपने होने की खोज – ‘अस्मि’

‘अस्मि’ – उपन्यास; लेखिका – शिखा वार्ष्णेय; पृष्ठ संख्या – 119, मूल्य: ₹250 /-, प्रकाशक – शिवना प्रकाशन, सीहोर (मध्य प्रदेश), समीक्षक: तरुण कुमार दूसरों की...

डॉ. घनश्याम आसूदाणी की कहानी-मुझमें मेरा मैं

मोबाइल का वाइब्रेटर काँपा, तो साथ-साथ लीना का दिल भी काँप उठा। हो न हो, यह वही फोन होगा। पिछले दो-तीन दिनों से वह...

प्रदीप श्रीवास्तव की कहानी-गहरी नींद

जेल का विशाल दरवाजा बंद ही रहा। उसके दाहिने पल्ले में बने छोटे से दरवाजे से जब वह सिर झुकाकर बाहर निकला, तब सांझ...

लघुकथा

भूखे की जाति कैसी …! जैसे ही कार लाल बत्ती पर आकर रुकी, एक दुबला-पतला जवान लड़का अचानक दौड़ता हुआ आया। उसकी आँखों में थकान....,होंठ सूखे हुए.......

लेख

हलचल

पुस्तक