मटृन अनंतनाग में सूर्य देव का मंदिर है। पिछले कुछ दिन पहले इस मंदिर में एक ऐसी घटना घटित हुई जिसे हम सब को चौंका दिया। इस घटना ने मुझे मंदिर के इतिहास को खंगालने के लिए प्रेरित किया।
मार्तंड मुख्य रूप से सूर्य देव के एक रूप से जुड़ी कथा है जो अदिति के गर्भ से उत्पन्न हुए और मृत -अडं (मरे हुए अंडे) से जन्म लेने के कारण मार्तंड कहलाए – जिन्होंने दैत्यों का वध कर देवताओं को स्थापित किया।
देवताओं से हारने के बाद दुखी अदिति ने सूर्य देव की तपस्या की और सूर्य ने उनके घर में अवतरित होने के वरदान दिया।
अदिति गर्भवती हुई जिससे क्रोधित होकर उनके पति कश्यप ने गर्भ में अंडे को नष्ट करना चाहा। अदिति ने कहा कि यह अंडा राक्षसों के विनाश का कारण बनेगा।
कश्यप ऋषि के प्रहार से वह अंडा फूटा और सूर्य देव प्रकट हुए जो आकाश में व्यापक हों गए। मार्तंड सूर्य देव का ही एक नाम है।
सूर्य मंदिर मटृन में स्थित है यहां पर दो कुंड है कमल कुंड एवं विमल कुंड। हिंदुओं, मुसलमानों एवं सिखों की आस्था इस मंदिर के प्रति काफ़ी गहरी है। लाखों की संख्या में इस पावन स्थल पर अपनी श्रद्धा प्रकट करने आते हैं। पिछले दिनों एक ऐसी घटना घटित हुई मटृन मंदिर में काम चल रहा था और मछलियां मरने लगी। कश्मीरी पंडित कमल कुंड एवं विमल कुंड की पवित्र मछलियों को देवता की तरह पूजते हैं। ऐसी मान्यता है कि जो भी उनकी मनोकामना होती है, ये मछलियां उन्हें पूर्ण करती हैं। मनोकामना पूर्ण होने पर श्रद्धालु मछलियों को दूध और रोटियां चढ़ाते हैं।

इस हादसे के बाद मट्टन स्थित श्री मार्तंड तीर्थ के पवित्र कुंड में एक शोक सभा आयोजित की। यह आयोजन उन हजारों पवित्र मछलियों की अचानक और दुखद मृत्यु पर शोक व्यक्त करने के लिए किया गया, जिन्हें दैवीय स्वरूप माना जाता है।
श्रद्धालु गहरे दुःख और प्रार्थना की भावना के साथ एकत्र हुए और इस अभूतपूर्व घटना पर अपनी भावनाओं को व्यक्त किया, जिसने इस प्राचीन और पवित्र तीर्थ से जुड़े धार्मिक भावनाओं को गहरी ठेस पहुँचाई है।
इतिहास में यह पहली बार है जब ऐसा हृदयविदारक दृश्य देखने को मिला है, जहाँ मार्तंड–मट्टन के लगभग 4–5 किलोमीटर लंबे जलमार्ग में हजारों पवित्र मछलियों की मृत्यु हो गई। कश्मीर पंडितों के पलायन के बाद बीते 36 वर्षों में ऐसा कोई दुखद हादसा नहीं हुआ था। यह घटना गंभीर आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और पर्यावरणीय चिंता का विषय बन गई है।
हिन्दू एवं स्थानीय निवासियों, जिनमें मुस्लिम और सिख समुदाय के सदस्य भी शामिल थे, ने इस त्रासदी पर गहरा शोक और चिंता व्यक्त की, जो इस पवित्र स्थल से लोगों के साझा भावनात्मक और आध्यात्मिक जुड़ाव को दर्शाता है।
पवित्र मछलियों की सुरक्षा और श्री मार्तंड मंदिर की पवित्रता की रक्षा के लिए विशेष प्रार्थनाएँ और धार्मिक अनुष्ठान किए गए, ताकि ईश्वरीय हस्तक्षेप और संरक्षण प्राप्त हो सके। डीसी अनंतनाग व प्रशासनिक टीम ने श्री मार्तंड के पवित्र तीर्थ का दौरा किया


बहुत ही दुखदाई बात
जी
सुन्दर
बहुत बहुत आभार
यह एक ज्ञानवर्धक लेख है। पूरी घटना का विवरण भी बहुत अच्छे ढंग से दिया गए है। आपको हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं !!
बहुत बहुत आभार जी
मुक्ति जी!
अनंतनाग की जानकारी थी। अमरनाथ जाते हुए जहाँ शिव ने नाग को छोड़ा था। पर आपके लेख को पढ़कर जो जानकारी मिली उससे हम अनभिज्ञ थे।और पढ़कर दुख भी हुआ।
कारण आश्चर्यजनक तरीके से अज्ञात है।
पढ़ कर मन में ख्याल आया कि क्या पानी की जाँच नहीं हुई? कि ऐसा क्यूँ हुआ।पर जो हुआ ठीक नहीं।
प्रश्न बहुत हैं समाधान का एक भी क्लू नहीं। भविष्य के गर्भ में न जाने क्या है।
फिर भी तत्कालीन प्रयास जो भी किए गए वह काबिले तारीफ व सराहनीय है।
आस्था के आयाम गहरे विश्वास से जुड़े होते हैं।आहत होना और अनिष्ट की आशंका स्वाभाविक और संभावित है।
एक महत्वपूर्ण जानकारी से परिचय करवाने के लिए शुक्रिया आपका।
बहुत बहुत धन्यवाद जी
विचारणीय पोस्ट
बहुत बहुत आभार आपका
Badhiya…. Astha ko pranam
Thanku so much