Wednesday, February 11, 2026
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मीना शर्मा की कविता – कैसे स्वर्ग बताएं हम…!

उस धरती की क्रूर कहानी
कैसे तुम्हें सुनाएं हम
कैसे उसको जन्नत बोलें
कैसे स्वर्ग बताएं हम?
देवदार के जंगल क्या हैं
क्या केसर की क्यारी है
जन्नत की अंदर ही अंदर
जल्लादों से यारी है
हमें जहन्नुम में लगता था
कैसे जान बचाएं हम
कैसे उसको जन्नत बोलें
कैसे स्वर्ग बताएं हम?
कलमा पूंछ रहे थे जालिम
फूलों वाली वादी में
केसर की क्यारी थी शामिल
हर घर की बरबादी में
चीखें हमसे पूंछ रहीं थीं
और कितना चिल्लाएं हम
कैसे उसको जन्नत बोलें
कैसे स्वर्ग बताएं हम?
जिन आंखों ने पल भर में
संसार उजड़ते देखा हो
स्वप्न सजाने गए मगर
हर ख्वाब बिखरते देखा हो
कैसे उनके आंसू पोंछें
क्या कह के समझाएं हम
कैसे उसको जन्नत बोलें
कैसे स्वर्ग बताएं हम?
अभी तो डोली आयी थी
खुशियों की सौगात लिए
अभी तो हम लौटे ही थे बस
बेटे की बारात लिए
कैसे अब ये अर्थी बांधें
कैसे चिता सजाएं हम
कैसे उसको जन्नत बोलें
कैसे स्वर्ग बताएं हम?
खुशियों के आंगन में हमको
आंसू की बरसात मिली
बहू बिलखती आई घर में
और बेटे की लाश मिली
आंखें बंद किए लेटा है
कैसे इसे उठाएं हम?
कैसे उसको जन्नत बोलें
कैसे स्वर्ग बताएं हम?
हिंदू होने का मतलब अब
वादी ने समझाया है
कलमा नहीं पढ़ा बेटे ने
जान गंवा कर आया है
आओ उसकी बेवा से
तुमको कलमा सुनवाएं हम
कैसे उसको जन्नत बोलें
कैसे स्वर्ग बताएं हम?
उस धरती की क्रूर कहानी
कैसे तुम्हें सुनाएं हम
कैसे उसको जन्नत बोलें
कैसे स्वर्ग बताएं हम?

मीना शर्मा
ई-मेल – [email protected]
मोबाइल – +91 9871049149
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