Wednesday, February 11, 2026
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सत्यवती मौर्य की कविता – पहली फूँक

पहली फूँक किसने मारी होगी
धुएं से भरे चूल्हे की आग जलाने के लिए कभी क्या?
या आग से जली त्वचा या ज़ख़्म पर मारी होगी पहली फूँक
किसी अपने ने उसकी दहकता कम करने के लिए!
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या फिर बच्चे के आँख की किरकिरी
निकालने के लिए
माँ ने हौले से फूँक मारी होगी।
या गर्म दूध को शीतल कर पीने लायक
बनाया होगा
माँ की ही ममतामयी फूँक ने।
अथवा स्कूल की बेंच पर साथ बैठी सहेली ने
फूँक मारी होगी आँख के तिनके को निकालने के लिए।
अथवा दुःख की घड़ी में किसी ख़ास ने
आश्वासन की फूँक मार ,
दुःख को और हमें अपनेपन से सहज किया होगा।
या किसी नव तरुणी के गाल पर लहराती लट पर
फूँक मारी होगी उसके प्रेमी ने उसको छेड़ते हुए,अठखेलियाँ करते।
या कभी दादी ने पोपले मुंँह से फूँक कर दूध ठंडा किया
और शिशु ने पिया होगा उसको घूंँट -घूँट।
या आपने हल्की फूँक से चाय पर पड़ी मलाई को
कप के सिरे तक पहुँचाया होगा अक्सर ही।
या लकड़ी की पटरी या स्लेट को सुखाने के लिए
हवा में हिला कर या फूँक मार कर जल्दी -जल्दी सुखाया होगा।
या दोस्तों संग चलते हुए राह पर लगी लाजवंती की पत्तियों को
बिन छुए अपनी फूँक से ही लजवाया होगा।
कभी फूँक मारना यादों के पन्नों पर
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जमी हुई कुछ धूल उड़ जाएगी ।
और नज़र आएँगी साथ बिताए पलों की
अनमोल स्पष्ट छवियाँ।
कभी फूँक मारना नन्हें शिशु के कोमल केश पर
उसका खिलखिलाना देगा अहसास ईश्वर की मौजूदगी का।
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