तेरी चाहत की इन्तेहा का ख़्याल आया तेरे जाने के बाद अपने पराये हर शख़्स पे मलाल आया तेरे जाने के बाद संग-संग चलते, जन्मों के अद्भुत बंधन कब टूटे याद नहीं जिऊं कैसे तुम बिन, बारहा ख़्याल आया तेरे जाने के बाद।
जो कहा नहीं अभी वो तुमने कैसे सुन लिया जिसकी ताबीर न हो मुमकिन, वो ख़्वाब कैसे बुन लिया तुम्हारी हर अदा पर सैंकड़ों कुरबान जाते हैं किसी और का नसीब, तुमने कैसे चुन लिया।
दिल की वीरान बस्ती, बसती है तेरे आने से तन्हा बोझिल हर शाम हंसती है तेरे आने से उदास हो जाते हैं लोग, औरों की ख़ुशी में आओ, ज़रा सी देर, दूर जा बैठें ज़माने से।
जब भी याद आती है, आंखें छलछलाती हैं दर्द उठता है सीने में, साँस लड़खड़ाती है। भुलाना भी नहीं चाहूं, निधि हैं यादें जीवन की हँसाती हैं, रुलाती हैं, तनहाई में साथ गुनगुनाती हैं।
इस नशीली रात की मीठी थकन नशा ख़ुमार देर तक बजते रहे मन वीणा के तार। मदहोश कर गया संदली साँसों का स्पंदन यौवन की पहली अंगड़ाई, पहली छुअन का प्यार।
यह जो तेरी महफ़िल में रंग नया आया है किसकी मस्त आँखों ने जाम छलकाया है? भड़क उठे हैं शोले हर सू हर इक दिल में लगता है कहीं पैमाने से पैमाना टकराया है।
तेरी चाहत की इंतिहा का ख्याल आया है तेरी जाने के बाद
अपने पराये हर शख्स पर खयाल आया है तेरे जाने के बाद
बहुत सुंदर हिज़्र की मार्मिक रचना प्रिय तोशी जी
साधुवाद
तेरी चाहत की इंतिहा का ख्याल आया है तेरी जाने के बाद
अपने पराये हर शख्स पर खयाल आया है तेरे जाने के बाद
बहुत सुंदर हिज़्र की मार्मिक रचना प्रिय तोशी जी
साधुवाद
Behtreen kavitaye