Wednesday, February 11, 2026
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कृष्ण कुमार गुप्ता की कविताएँ

1 – ऑपरेशन सिंदूर
मिशन का नाम नहीं ऑपरेशन सिन्दूर
सिन्दूर दर्शाता है वीरता और सम्मान
शौर्य बलिदान प्रेम का इसमें है सुरूर
सिंदूर इंगित करे त्याग और बलिदान
दुश्मन की आँख में आँख डालके लिया
उसके छद्म षडयंत्र का प्रतिशोध प्रचंड
नारियों के सिन्दूर की लाज बचाई थी
भारतीय सेना ने तिरंगे को रख अखंड
माँ की ममता पत्नी के आंसुओं का दर्द
अपने अंदर समेटे था ऑपरेशन सिन्दूर
दुश्मन को उसकी जमीं पर घुसके मारा
सेना की बेटियों ने चटा दी उसको धूर

देश के स्वाभिमान को ललकार दिया
गुस्ताख आतंकियों ने किया परिहास
आतंकी ठिकाने ध्वस्त किये सेना ने
ऑपरेशन सिंदूर ने रच दिया इतिहास

आसिम मुनीर बेबस देखता रह गया
पाकिस्तान को युद्ध के गर्त में झोंकके
सनकी ने न्यूक्लियर धमकी दे डाली
हमने हिला दिया नूर खान को ठोंकके
फिर एक घनघोर रात ऐसी थी आई
न हुआ कोई शोर और ना ही ऐलान
सेनाओं की दृढ़ संकल्प की अग्नि उठी
थर्राया था हमारा दुश्मन पाकिस्तान
सौ से भी ज़्यादा थे आतंकी सिर गिरे
न ही कोई मातम और न था अफ़सोस
खासियत ये थी कि युद्ध हुआ ही नहीं
माँ भारती ने झलकाया अपना रोष
अब सिंदूर सिर्फ श्रृंगार नहीं रहा है
वो नारी शक्ति का प्रतीक गया बन
छब्बीस विधवाओं की आहें बन गई
हर दुश्मन के कपाल का काल सघन
मोदी ने हिला दिया अपने दुश्मन को
फेंक कर सिंदूरी बम आतंकिस्तान में
सिंधु समझौता रोक के आग लगा दी
बरसों से पल रही आतंक की खान में
पल भर में घाटी को लहू से भिगोकर
पाकिस्तान झूम रहा था होके मगरूर
भारत ने जोर का झटका धीरे से दिया
बाईस मिनट में कर “ऑपरेशन सिंदूर”
भारत के सीने में उठ रहा था तूफ़ान
मोदी की आँखों से बरस रहे थे अंगार
न्यू नार्मल भारत किसी से नहीं डरता
चारो ओर से उठी प्रतिशोध की पुकार
घर में घुसकर कब्र तुम्हारी खोदी है
ऑपरेशन महादेव तो सिर्फ झांकी है
राष्ट्र की आत्मा का स्वर गूँज रहा है
पूर्ण अभिषेक तो अभी तक बाक़ी है
ये पुराना नहीं अब मोदी का भारत है
दुश्मन के हर कुचक्र पर पड़ा है ताला
भारतीय सेना को खुली छूट दी गई है
“ऑपरेशन सिंदूर” है धधकती ज्वाला
2 – नारी सशक्तिकरण 
आज मजबूत समाज के निर्माण हेतु
नारी की ना रही अब कोई मज़बूरी
नारी के अधिकारों की रक्षा के लिये
नारी सशक्तीकरण है हो गया जरुरी  
वर्तमान परिस्थिति में देश के अंदर
समाज को चाहिये एक नई पहचान
नारियों को हर क्षेत्र में मिले अवसर
तभी मिलेगी स्वतंत्रता और सम्मान
आज कल इस पुरुष प्रधान समाज में
महिलाओं को अब स्वयं लड़ना होगा
खुद के अधिकार पाने के लिए उनको
हर मुश्किल पारकर आगे बढ़ना होगा  
 
विकसित देश के नव निर्माण के लिए
बहुत जरुरी हैं नारी ले नया अवतार
आज  महिलायें बनें सक्षम और सुदृढ़
इस बात पे करना होगा गहन विचार 
नारी को न मानें मात्र ममता की मूरत
दकियानूसी विचारों को छोड़ना होगा
उसकी भावनाओं के सम्मान करें सभी
सभी पुरानी रूढ़ियों को तोडना होगा 
 
नारी ही करती है सृजन इस प्रकृति में
नारी अब नहीं रही अबला या बेचारी
अपना संपूर्ण जीवन कर देती समर्पित
कहलाती है पीढ़ियों से बहुत संस्कारी 
करती आई सदा त्याग वो इच्छाओं का
हर वक्त पूरी करती अपनी जिम्मेदारी
अब तो हम सब दे दें उसे नई पहचान
सालों से वो कोख में है ही जाती मारी 
पाने को सफलता का असीम आसमान
पूरे करने दो उसे बेधड़क अपने ख्वाब
सपनों के पंख लगाके उसे उड़ना होगा
सच है इसमें मुश्किलें होंगी बे-हिसाब 
मत बांधो उसे  किस्मत की लकीरों में
आज की महिलाओं में है आत्मविश्वास
पुरुषों से बराबरी की क्षमता रखती हैं
तैयार वो रचने को एक नया इतिहास 

 

कृष्ण कुमार गुप्ता 
केन्द्रीय जल और विद्युत अनुसन्धान शाला, पुणे, से वैज्ञानिक ‘सी’  के पद से मार्च  2018 में सेवानिवृत्त हुआ I
अनुभव  : देश और विदेशों के बांधों और पॉवर हाउस की विभिन्न परियोजनाओं का 35 वर्षों का जल गुणवत्ता अध्ययन। 5 वर्षों तक सहायक निदेशक (राजभाषा हिंदी) के पद पर कार्य किया। 3 वर्षों का प्रशासनिक अनुभव।
पुस्तकों का हिंदी एवं अंग्रेजी अनुवाद 
  • श्री दत्ताजी नलावडे लिखित मराठी पुस्तक के हिंदी अनुवाद विश्व के महानायक छत्रपति राजा शिवाजी और उनके वीर साथी” का 17 जनवरी 2022 को पत्रकार भवन में प्रकाशन हुआ I
  • इसी पुस्तक का अंग्रेजी अनुवाद Hero of the World Chhatrapati Shivaji Maharaj and     
      their  Warrior” का विमोचन छत्रपति शिवाजी महराज के वंशज “प्रिंस ऑफ़ तंजौर” के कर
      कमलों द्वारा 1 अक्टूबर 2023 को हुआ।
  1. श्री राहुल नलावडे द्वारा लिखित मराठी पुस्तक “मी राजगढ़ …” का हिंदी अनुवाद प्रगति पर है और शीघ्र ही प्रकाशित होने की सम्भावना है I
विभिन्न कार्यालयों के हिंदी दिवस कार्यक्रमों में सहभाग 
                         विभिन्न कार्यालयों में राजभाषा नीतियों, अन्य हिंदी विषयों पर और कार्यशालाओं में समय समय पर अलग अलग विषयों पर व्याख्यान, परीक्षक एवं बतौर मुख्य अतिथि सहभाग  
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2 टिप्पणी

  1. धन्यवाद महोदय। अन्य साहित्यकारों को भी पढ़ने का सौभाग्य मिला।

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