Wednesday, February 11, 2026
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नरेंद्र कौर छाबड़ा की कविताएँ

1 – चाहती हूँ
चाहती हूं
खुले आंगन में
रात को खाट बिछाए
निहारती रहूं असीम आकाश
चांद तारों बादलों की
लुका छुपी और
पूछूं आकाश से
एक अनसुलझा सवाल
असंख्य तारों चांद ग्रहों
और अंगारे बरसाते सूरज को
कैसे अपने में
समेटे रखते हो ?
कैसे इन सब का
संतुलन बनाए रखते हो ?
कितना अनुशासन बद्ध है
तुम्हारा विशाल परिवार
कितनी ईमानदारी से
सभी अपनी जिम्मेदारियां निभाते हैं
इसका अंश मात्र भी
इंसान ग्रहण कर ले
तो कितना परिवर्तन
आ जाए इस जग में
कितना प्रेम भाव
अनुशासनबद्धता
सकारात्मकता मधुरता
भाईचारे सौहार्द की भावना
पनपने लगे
और यह संसार
स्वर्ग तुल्य बन जाए
2 – नन्हा बच्चा
दुनिया का हर नन्हा बच्चा
क्यों करता है आकर्षित
उसका भोलापन
उसकी मुस्कान
खिलखिलाती हंसी
बेख़ौफ शरारतें
नटखट शैतानियां
क्यों भाती हैं मन को
धूल में सना बच्चा
बगीचे में दादा दादी
के साथ खेलता बच्चा
मॉल में मां का हाथ पकड़े
कोतूहल से खिलौने
देखता बच्चा
मंदिर में मां-बाप की
उंगली पकड़े
भगवान के सामने रखे
पैसे, प्रसाद को
टुकुर-टुकुर ताकता
छूने को मचलता बच्चा
इतना प्यार क्यों लगता है
यह बच्चे के मन की
पवित्रता है
निश्छलता है
कोमलता है
अहंकार , क्रोध
विकारों से मुक्त
नन्हा बच्चा
सबके प्रति
समभाव रखता है
तभी तो किसी
अजनबी को देख भी
बिंदास हंसता मुस्कुराता है
अपनी तोतली जुबान से
उसके प्रश्नों के उत्तर भी
बेहिचक देता है
उसके साथ खेलने में भी
नहीं तनिक घबराता है
उसके दिये उपहार भी
सहर्ष स्वीकार कर लेता है
नन्हे बच्चे का सम्मोहन
कुछ क्षणों के लिए
तनाव चिंता
परेशानियां समस्या
तक को भुला देता है
माहौल में बदलाव ला देता है
काश इंसान सदा
नन्हा बच्चा ही बना रहता
तब इस संसार का रूप
कितना प्यारा होता
नरेंद्र कौर छाबड़ा
मो 9325261079
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10 टिप्पणी

  1. नरेन्द्र जी!
    आपकी कविताएँ, दोनों बहुत अच्छी लगीं।

    आपने सही कहा आसमान में सारे ग्रह, नक्षत्र ,तारे, समस्त उल्का पिंड;अनुशासन बद्ध हैं।
    वर्तमान में जीवन में अनुशासन रह ही नहीं गया है।
    विदेश में तो फिर भी नजर आता है पर भारत में नहीं।
    अब यह सब कुछ स्वप्न सा लगता है।

    छोटे बच्चे बहुत मासूम और भोले होते हैं दुनिया की सारी छल कपट से दूर नीति- अनीति, अच्छे बुरे से बेखबर। उनकी अपने मन की निश्छलता है, वही उनका वास्तविक सौंदर्य है जो सबको आकर्षित करता है।
    बेहतरीन कविताओं के लिए आपको बधाई।

  2. नरेंद्र मैडम, आपकी कविताएं बहुत अच्छी हैं, सराहनीय हैं। जीवन जीने के लिए सम्पूर्ण मानवजाति को प्रेरणा प्रदान करती हैं।

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