Wednesday, February 11, 2026
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प्रतीक झा ‘ओप्पी’ की तीन कविताएँ

1 – सेब: प्रेरणा से पाप तक
पेड़ से गिरा, वो छोटा सेब
न्यूटन के मन में जगाई हैरानी
गुरुत्वाकर्षण का नियम उजागर
दुनिया ने दी, उनकी बुद्धि को वाणी।
विज्ञान बना इसका अनुपम वरदान
पर ओपेनहाइमर के दिल में तूफान
सेब में छिपा था आक्रोश का भार
जो गुरु के प्रति था गहरा खुमार।
“परमाणु बम का पिता” वो कहलाए
पर आत्मा के संताप को कौन समझ पाए?
जहर से भरी उनकी पीड़ा अनजान
सेब बना उनकी उलझन का प्रमाण।
स्टीव जॉब्स ने इसे फिर अपनाया
तकनीक को नव युग में पहुंचाया
एपल ने बदली हर सोच, हर राह
संघर्षों ने दिया हर सपने को उत्साह।
एडम-ईव की कथा में प्राचीन ज्ञान
सेब बना पाप और पुण्य की पहचान
चेतना का बीज था इसका उपहार
धर्म और पाप का था पहला संसार।
फलों में सेब का स्थान महान
प्रेरणा, पीड़ा और चेतना का नाम
कभी विवाद, तो कभी समाधान
सेब ने रचा इतिहास महान।
2 – जीनियस की खोज
मैं बढ़ा विश्वविद्यालयों की ओर
जहाँ जलती थी ज्ञान की लौ
ग्राहम बेल और ओपेनहाइमर संग
भरते थे मानवता में नव रंग।
आज किताबें हैं, विचार नहीं
शोध हैं, पर चमत्कार नहीं
जहाँ प्रोफेसरों के पन्ने मौन
मौलिकता का स्वर गुम हो गौण।
डिग्रियाँ बन गईं बस पहचान
खो गए शोध में वो प्रतिभा के सम्मान
न नोबेल का सपना, न गौरव की चाह
बस दिखावे में उलझी हर एक राह।
मैं खोज रहा वह अद्भुत जोत
जो देश को दे ऊँचा आकाश
जो ज्ञान की ज्वाला प्रज्वलित करे
मानवता में भर दे अमर विश्वास।
हे जीनियस, कहाँ है तू आज?
प्रतीक्षा में है हर एक समाज
जाग, ओ जीनियस, दे अपना जवाब!
कर अंधकार में नई क्रान्ति की शुरूआत।
3 – पुस्तकालय: पन्नों की पीड़ा
मैं सुनता हूँ
पुस्तकालय की दीर्घ उदासी और गहरी बेचैनी को
जो वर्षों से इस आशा में प्रतीक्षा कर रहा है
कि कोई आए और उसके वृहद पन्नों में
ओपेनहाइमर की जीवनगाथा रख दे।
तब उसकी पीड़ा मिटेगी
और उसकी गरिमा में निखार आएगा
वह गर्व से कह सकेगा
कि उसके खजाने में अब वह ग्रन्थ है
जो एक महान वैज्ञानिक
दार्शनिक और शिक्षक की महिमा गाते हैं।
वह आत्मा, जो युगों में एक बार
धरती पर जन्म लेती है
वह प्रतिभा, जो ज्ञान और कर्तव्य की पराकाष्ठा है
ऐसे महान ओपेनहाइमर की गाथा
कौन पुस्तकालय अपनाना न चाहेगा?
पन्नों की व्यथा को मैं समझता हूँ
जो वर्षों से पीड़ा में सुलग रहे हैं
वे मुक्त होना चाहते हैं
दर्द और अधूरेपन से
यह सम्भव तभी होगा, जब वे
महान ओपेनहाइमर की कथा का वर्णन करेंगे।
अब समय आ गया है
कि हम इस दर्द को समझें
पुस्तकालय को उसके स्वप्न लौटाएं
उसकी गरिमा और आदर्शों को पुनर्जीवित करें।
प्रतीक झा ‘ओप्पी’
पता: पटनवां, बसन्तनगर, चन्दौली, उत्तर प्रदेश
पिन कोड: 221110
Email:- [email protected]
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2 टिप्पणी

  1. प्रतीक तुम्हारी विज्ञान कविताएं अच्छी हैं ।
    प्रोफेसर को शिक्षक या प्राध्यापक भी लिख सकते हो ।और भी कुछ अंग्रेजी के शब्द है जिन्हें अंग्रेजी में सोचा जा सकता था फिर भी कोई बात नहीं चिंतन सुंदर है ।
    Dr Prabha mishra

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