Wednesday, February 11, 2026
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विकास कुमार की कविताएँ

1 – वीडियो क्लिप
चलो आज फिर हम मोबाइल उठाते है
अपनी आवाज को बुलंद बनाते है
चलो आज फिर एक क्लिप बनाते है
अब इंसान की नहीं इंसानियत की क्लिप बनाते है।

सोते हुए लोगों को सच्चाई कुछ दिखाते है
इस गुमराह समाज को फिर से जगाते है
मुकदर्सक हो कर नहीं हौसलों से कुछ बनाते है
चलो आज फिर एक क्लिप बनाते है।

अत्याचारियों को सबक सिखाते है ,
जाति धर्म से परे इंसानियत को दिखाते है
किसी माँ बहन पर होते अत्याचार को दिखाते है
चलो आज फिर एक क्लिप बनाते है।

किसी गरीब का घर जलने से बचाते है
किसी गरीब को जीने का हक़ दिलाते है
उसे सामाज में बराबर का हक़ दिलाने को
चलो आज फिर एक क्लिप बनाते है।

अर्धनग्न वेश -भूषा से दूर
अपनी संस्कृति के पहनावें को दिखाते है
नयी पीढ़ी के बच्चों को संस्कृति से मिलाते है
चलो आज फिर एक क्लिप बनाते है।

अपनी माता बहनों के संग
फिर से क्लिप बनाते है
किसी जाग रहे दुशासन को
श्री कृष्ण का चक्र दिखाते है
चलो आज फिर एक क्लिप बनाते है।

भाई को भाई से फिर मिलाते है
बुद्ध का ज्ञान फैलाते है
फिर से शान्ति को विस्थापित करने को
चलो फिर एक क्लिप बनाते है।

अब प्रशासन को जगाते है
सो रहे जन प्रतिनिधि को उठाते है
देश को फिर से सोने की चिडयां बनाने को
चलो आज फिर एक क्लिप बनाते है।

2 – वो बचपन की यादें

वो बचपन की यादों का,
वो पचपन की उम्र के याद आना,
याद आ कर खुशी के आँसू दे जाना,
बहुत याराना लगता है,
मानों वो कल की बात हो।

वो गलियों में खेलना,
वो दुपहरी में दोस्तों संग घूमना,
सारा दिन शरारत करना,
बहुत याराना लगता है ,
मानों वो कल की बात हो।

अब तो बस दवाओं से दोस्ती हो गयी है,
रिटायरमेंट पेंशन की चिंता हो गयी है ,
सोचा नहीं था कभी ये पल आएगा ,
जब हम बच्चे नहीं ,बल्कि बड़े हो कर
उन पल को याद करेंगे,
बहुत याराना लगता है,
मानों वो कल की बात हो।

पहले गाड़ियों के पीछे भागा करते थे,
दोस्तों संग छुपा छुपाई खेला करते थे ,
अब तो बस शांति से सोने की आदत हो गयी है,
चुप चाप अकेले चलने की आदत हो गयी है ,
बहुत याराना लगता है,
मानो वो कल की बात हो।

जोश में आज भी कोई कमी नहीं है ,
बस इन्द्रिओ ने रोक रखा है ,
मन आज भी बिचलित है खेलने को,
बस जोड़ो के दर्द ने रोक रखा है ,
बहुत याराना लगता है ,
मानो वो कल की बात हो।

इतिहास बहुत पढ़े हमने ,
काश उनमे लौटने को पढ़ा होता,
तो फिर से अपने बचपन में लौट जाते ,
संसार के परेशानिओं से भाग आते ,
बहुत याराना लगता है ,
मानो वो कल की बात हो।

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