महाराज पिक्चर की आपने अच्छी समीक्षा की सूर्यकांत जी! हम तो टीवी लगभग देखते नहीं हैं। पर कोई कभी कुछ अच्छे की बात करते हैं तो देख लेते हैं। अब आपने महाराज पिक्चर की इतनी अच्छी समीक्षा लिखी है तो इसे देखने का मन हुआ।देखने का मन इसलिए भी हुआ है कि यह एक सत्य घटना पर आधारित है। वक्त इस बात का गवाह है कि अन्याय का विरोध करने वाली शख्सियत भय से अपनी इरादों को नहीं छोड़ा करती। मनोज बाजपेई का अभिनय याद आ गया पिक्चर का नाम “एक बंदा काफी है” था शायद! बहुत-बहुत बधाइयाँ आपको इस बेहतरीन समीक्षा के लिये। प्रस्तुति के लिए तेजेन्द्र जी का शुक्रिया और पुरवाई का आभार।
महाराज पिक्चर की आपने अच्छी समीक्षा की सूर्यकांत जी! हम तो टीवी लगभग देखते नहीं हैं। पर कोई कभी कुछ अच्छे की बात करते हैं तो देख लेते हैं। अब आपने महाराज पिक्चर की इतनी अच्छी समीक्षा लिखी है तो इसे देखने का मन हुआ।देखने का मन इसलिए भी हुआ है कि यह एक सत्य घटना पर आधारित है। वक्त इस बात का गवाह है कि अन्याय का विरोध करने वाली शख्सियत भय से अपनी इरादों को नहीं छोड़ा करती। मनोज बाजपेई का अभिनय याद आ गया पिक्चर का नाम “एक बंदा काफी है” था शायद! बहुत-बहुत बधाइयाँ आपको इस बेहतरीन समीक्षा के लिये। प्रस्तुति के लिए तेजेन्द्र जी का शुक्रिया और पुरवाई का आभार।
जी नीलिमा करैया जी।
श्रम सार्थक हुआ लगता है,आपकी टिप्पणी पढ़ कर। हृदय से आभारी हूं।