धर्मेन्द्र एक नाम जो भारतीय संस्कृति में ऐसा रचा-बसा व्यक्तित्व, जो पुरुषार्थ का पर्याय बन गया और अभिनय या सिने-जगत का एक अनुपम अनूठा अनन्य… ध्रुवतारा। इसी ध्रुवतारे की अंतिम यात्रा पर देश के प्रधान मंत्री श्री नरेंद्र मोदी और सूचना एवं प्रसारण मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव ने भी विनम्र श्रद्धांजलि अपने अपने एक्स पर ट्वीट की है।
आदरणीय मोदी जी ने लिखा कि धर्मेन्द्र जी का निधन भारतीय सिनेमा के एक युग का अंत है।धर्मेन्द्र अपनी सादगी, विनम्रता और गर्मजोशी के लिए भी जाने जाते थे,, इस दुखद घड़ी में, मेरी संवेदनाएं उनके परिवार, मित्रों के साथ हैं…।
वहीं सूचना और प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि सिनेमा जगत हमेशा धर्मेन्द्र की विरासत को संजोए रखेगा। उन्होंने आगे कहा कि शोले के वीर नायक और सत्यकाम के भावपूर्ण कवि जैसे कालातीत किरदारों के माध्यम से, उन्होंने हमें वीरता और करुणा का संदेश दिया।
इस सितारे की शुरुआत में कुछ ध्रुव भगत जैसे ही हुई यानी नितांत अकेला, अपने दम पर, अपनी धुन, एकाग्रता, सच्चाई और मेहनत से एक मिडिल क्लास का युवा पंजाब प्रदेश से आया और दुर्घश संघर्ष करता हुआ यह आम इंसान एक ख़ास से ख़ास अभिनेता बन गया। सिने-जगत में नायक, महानायक बनते-बिगड़ते यानी आते-जाते रहे मगर धर्मेन्द्र अपनी अभिनय क्षमता और वैभिन्नता से एक अपना अलग स्थान बना कर ध्रुव तारा बन लगातार 65 वर्षों तक चमकते रहे हैं। यह सृजन यात्रा भविष्य में भी एक नज़ीर की मानिंद फिल्म उद्योग को प्रेरित और परिभाषित भी करती रहेगी।
धर्मेन्द्र भी आम जन से उठे जन -अभिनेता रहे,उनमें भी वे सभी खूबियां-खामियाँ रही, जो इस क्षेत्र या इंसानों में होती हैं तिस पर भी वे एक आला दर्ज़े के यानी शानदार और जानदार मानव या इंसान रहे।
आठ दिसंबर सन 1935 को नसराली पंजाब में जन्में, धर्मेन्द्र अपनी छाप छोड़ कर 24 नवंबर को माया नगरी मुंबई में नवासी वर्ष की उम्र दुनिया को अलविदा कह गए।
धर्मेन्द्र की पहली शादी प्रकाश कौर से सन 1954 में और ड्रीम गर्ल हेमा मालिनी से दूसरी शादी सन 1980 में हुई थी। जीवन में बहुत उतार- चढ़ाव आए और यहसंभावित थे भी! फिर भी यह अभिनेता जीवन और पर्दे पर अपनी जिम्मेदारियों को हँसते गाते निभाता चला गया और बेहतर से बेहतरीन इंसान भी बन गया।
फिल्मी सफर में ब्लॉकबस्टर फ़िल्म ‘आई मिलन की बेला’ में निगेटिव शेड वाले किरदार में जुबली कुमार राजेंद्र कुमार सरीखे ख्याति प्राप्त अभिनेता से वे अभिनय, चेहरे मोहरे से वे बीस ही बैठे और इनकी चर्चा हीरो से अधिक हुई थी। यूं भी यह भी एक हैरान कर देने वाला तथ्य है कि नेगेटिव शेड से चला एक अभिनेता बाद में बड़ा और महान सितारा बना, ऐसा अपवाद केवल धर्मेन्द्र है या फिर विनोद खन्ना!!
हमारी उर्दू भाषा में एक मशहूर कहावत भी है कि ‘हिम्मत-ए-मर्दां मदद-ए-खुदा’ और यह धर्मेन्द्र देओल साहब पर पूरी भी उतरती है।
उनकी पहली फिल्म थी, ‘दिल भी तेरा हम भी तेरे’ जो सन 1960 में आई। ट्रेजेडी क्वीन और मुकम्मल शायरा मीना कुमारी का अभिनय में साथ उन्हें जल्दी और उम्मीद से अधिक मिल गया था।सात फिल्में यथा ‘मैं भी लड़की हूँ’, ‘पूर्णिमा’, ‘मझली दीदी’,’चंदन का पलना”,’काजल’, ‘बहारों की मंज़िल’ और हाँ ‘फूल और पत्थर’! जिसने बॉलीवुड को उसका पहला ही मैन दिया और धर्मेन्द्र के सुदर्शन और पुरुषोचित रूप को दर्शकों ने पहली बार देखा और होश खो बैठे। यह फिल्म ब्लॉकबस्टर भी रही और पाठकों को बता दें कि ब्लॉकबस्टर्स वे फिल्में होती है जो उन पर आई लागत से कई गुना अधिक कमाई का माध्यम बनती हैं।
इसी सितारे ने कम से कम दस ब्लॉकबस्टर फिल्में सिने जगत को दी हैं। बात फिर मीना कुमारी और धर्मेन्द्र की, ट्रेजेडी क्वीन ने उन्हें अपनी सोहबत और मुहब्बत के साथ साथ शायरी भी सिखाई।ये बात अलग है कि जब यह बात सुर्खियों में आई तो धर्म जी ने अपने आपको मीना कुमारी जी का महज़ एक फैन कह कर पल्ला झाड़ लिया। एक और बड़ी अभिनेत्री शर्मिला टैगोर के साथ भी उनकी केमिस्ट्री खूब जमीं और वे उनके साथ आठ फिल्मों में पर्दे पर आए और बस छा गए। ‘अनुपमा’ में अगर वे एक उदास और संवेदनशील प्रेमी बने तो ‘सत्यकाम’ में वे एक आदर्शवादी व्यक्तित्व रहे, वहीं ‘यकीन’ और ‘चुपके- चुपके’, ‘मेरे हम दम मेरे दोस्त’, ‘एक महल हो सपनों का’, ‘देवर’, जैसी यादगार फिल्में भारतीय सिनेमा जगत को मिली। ‘चुपके -चुपके’ ने धर्मेन्द्र को कॉमेडी और हल्की फुल्की फिल्म का सफलतम खेवनहार भी बना दिया और उनके अभिनय क्षमता के इंद्रधनुष से भी परिचित करवाया।
इस स्मृति शेष में अगर उनकी दूसरी सांसद पत्नी और ड्रीम गर्ल हेमा मालिनी के साथ उनकी फिल्मों की बात, अगर न हो, तो यह अधूरी रह जाएगी। इस जोड़ी ने अनेकों हिट फिल्म और ब्लॉकबस्टर्स के साथ साथ शोले जैसे शाहकार को कोई कैसे भुला सकता है। अन्य फिल्मों में सीता और गीत, राजा जानी, शराफ़त, अली बाबा चालीस चोर, बर्निंग ट्रेन, सहित तीस से अधिक फिल्में बॉलीवुड के ख़ज़ाने में आ गईं।
धर्मेन्द्र के पसंदीदा संगीतकार शंकर जयकिशन और गायक स्वर्गीय मुहम्मद रफ़ी रहे ।रफ़ी साहब और अभिनय के बादशाह दिलीप कुमार के तो वे मुरीद रहे।स्वयं दिलीप कुमार भी उनके पुरुषोचित सौंदर्य के कायल थे और उन्होंने अपने विचारों को सार्वजनिक मंचों पर साझा भी किया और धर्मेन्द्र जी ने दिलीप कुमार साहब की मौजूदगी में भी उनकी तारीफ और इज्जत की।



Dharmendra जैसे अभिनेता का जाना उसकी जीवन यात्रा को आपने बेह्तरीन तरीके से याद किया है.
विनम्र श्रद्धांजलि
आप सरीखे मित्र की सराहना मन को और अच्छा कुछ रचने को प्रोत्साहित करती है और इसमें आदरणीय तेजेंद्र शर्मा भाई साहब का मार्गदर्शन भी है
Dharmendra जैसे अभिनेता का जाना उसकी जीवन यात्रा को आपने बेह्तरीन तरीके से याद किया है.
विनम्र श्रद्धांजलि
जी तहे दिल से शुक्रिया ,आपका।
दशकों तक सिने जगत प्रेमियों का मनोरंजन करने वाले एवं अनेक पुरस्कारों से सम्मानित अभिनेता को भावभीनी श्रद्धांजलि।
शायद ही कोई ऐसा व्यक्ति हो जिसके धर्मेंद्र पसंदीदा हीरो न रहे हों। हम जैसे उम्र वालों के लिए तो वास्तव में एक युग का अंत ही है यह!
आपने बेहतरीन लिखा।
बधाई आपको।
सादर श्रद्धांजलि इस युग-कलाकार को।
जी सादर आभार आपका।
आप सरीखे वरिष्ठ जन जब कुछ रचा सराहते हैं तो लगता है कि श्रम सार्थक हुआ।
आदरणीय अग्रज श्री तेजेंद्र शर्मा जी को भी आभार ,जिन कार्गदर्शन भी मुझे मिला।