Monday, March 9, 2026
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कृष्ण कुमार गुप्ता की दो कविताएँ

1 – रंगों का त्यौहार
आ रहा है अब होली का त्यौहार
लेकर आता खुशियों की सौगात
उड़ रहा सभी ओर गुलाल रंगीन
सूरज लेकर आ गया नव प्रभात
बरसती चहुं ओर रंगों की फुहारें
दिखाई देती टोलियों की भरमार
लोग ढोलकों पर गा रहे हैं फाग
राधा कृष्ण सा रास करें नर नार
बनायें हम इस होली को अनोखी
मिटा दें मिलके दुश्मनी के अंकुर
प्रेम के रंगों में सराबोर दिखें सब
हर ओर सुनाई देते एकता के सुर
प्रकृति ने हैं रंगीन परिधान पहने
नई कोपलें पौधों पे दिखने लगीं
रंग बिरंगे फूल खिले हैं चमन में
खुशियाँ झरोखों से झांकने लगीं
आम की मंजरियों से खुशबू आई
खिलने लगी है हर तरफ कचनार
फ़ूलों पे डेरा जमा रहीं तितलियाँ
कोयल की कूक से बाग गुलजार
छा रही सभी पे होली की मस्ती
गोपी पे डाले कृष्ण रंगों की धार
भंग के रंग में डूबी दिखें टोलियां
बाल आबाल वृद्ध सब हैं बेकरार
धरती है सजी कर सोलह श्रृंगार
फागुन का महीना लगता सुहाना
बूढे भी नाचने लगते युवा बनकर
होली सिखाती भेदभाव मिटाना
होली के रंग सभी के मन रंग देते
गुझिया भर देती दिलों में मिठास
एक दूजे के गले लगते ही जगती
निराशजनों में भी जीने की आस
होली में चारों दिशाओं में बहती
धरती से अंबर तक प्रेम की धार
मिटा दो गिले शिकवे अपने सारे
हर ओर हो सुख शांति की बहार
2 – देह दान
प्रभु ने बनाई हमारी मानव काया
हम सब जीते जी सुख लेते इसका
कितनी अनमोल है देह की माया
मृत्योपरांत भी सुख़ भोगें जिसका
शरीर के अवयव व्यर्थ न जाने पायें
मरने पर शरीर को यूं नहीं जलाना
अपने अंगों को दान में देकर सीखो
मानव जीवन में सारे पुण्य कमाना
खुद को जीवित रख सकते हो तुम
मृत्यु के बाद किसी को जीवन देके
एक नेत्रहीन की अनुभूति का सोचो
जब वो तुम्हारे नेत्रों से दुनिया देखे
कुछ दान जीते जी प्रसन्न कर देते हैं
जीवित ही सुख का अनुभव होता है
मृत्यु पश्चात् अंगदान से प्राणियों को
परमार्थ का भी पुण्य प्राप्त होता है
आओ खुली विचारधारा से हम सब
आजादी का यह अमृत काल मनायें
जन जन में नव जागृति को जगाकर
अंगदान की ये पावन अलख जगायें
मनुष्य की काया कागज की पुड़िया
जल की एक बूंद से ही गल जायेगी
अंग दान से हस्ती को अमर बना ले
वरना यह राख में ही बदल जायेगी
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