युद्धों ने दिया है
झुलसता नंगा बचपन,
बदसूरती जो छिपाए न छिपे,
हर तरफ़ आग ही आग
और बदबूदार धुँआ,
बेतहाशा भूख, प्यास और
झुलसाती धूप, जमा देने वाली ठंड
अंतहीन पीड़ा,
अपनों के मारे जाने की,
बेघर होकर शरणार्थी बनने की,
दवाओं, पानी और
रोटी के टुकड़ों की भीख।
युद्धों ने दिया है
कोख में मारे जाने वाला घना अंधेरा,
भटकन भरे दिन और
भयानक रातें
स्कूलों के मलबे में दबी हुई किताबें,
लाशों के बीच
अपने मालिक को सूंघता हुआ कुत्ता,
उजड़े हुए घर
हर तरफ़ गर्दज़ाद मंज़र।
युद्धों ने दिया है
उजड़े हुए शहर का सूनापन,
हर तरफ़ रेंगती हुई मनहूसियत
बिजलियों के टूटे खंबे
कुएं, तालाब और नदियों का
काला, ज़हरीला पानी
थरथराती हवा की बेचारगी
आवारा हुए ज़ख़्मी जानवर।
युद्धों ने दिया है
सपनों का टूट जाना
इच्छाओं की हत्या
अधूरी अंधेरे भरी ज़िंदगी
ख़ुशबुओं का मर जाना
तितलियों का चट्टान हो जाना
रंगों का बेरंग हो जाना।
युद्धों ने दिया है
काम पर से घर न पहुंच पाना
चाभी जेब में हो और
घर का ढह जाना
पालतू परिंदे की
बिना मालिक के मौत हो जाना।
युद्धों ने दिया है
आदमी का आदमी के हाथों मारे जाना।
डॉ मोहसिन खान जी की कविता,, युद्धों ने दिया है,,,,सुन्दर है, प्रासंगिक है और भूत, भविष्य तथा वर्तमान के चित्रपट दिखाती हैंl फिर भी हम युद्ध टाल नहीं सकते l मानवता की यह विकृति है,,,
क्रोध क्षणिक पागलपन है और बैर, क्रोध का मुरब्बा,,, युग युगांतर से उन्माद की यह प्रथा चली आ रही है
युद्धों ने दिया है
श्वेत वस्त्र और कफ़न
राक्षसों का अट्टहास
शिशुओं का क्रंदन
चंद्रमा की शांति छोड़कर
पाप ग्रह
मंगल का चरण
अमर होने की अभिलाषा में
मृत्यु का वरण ,,,
आदरणीय संपादक महोदय तेजेंद्र जी का बहुत आभार कविता की प्रासंगिकता पर आपका ध्यान गया!!!!
क्या बढ़िया कविता युद्ध की परिस्थिति पर लिखी है ।
सरजी, आप ऐसे ही कविताओं के माध्यम से हम प्रेरित करते रहियेगा।
बहुत बहुत शुभकामनाएं।
डॉ मोहसिन खान जी की कविता,, युद्धों ने दिया है,,,,सुन्दर है, प्रासंगिक है और भूत, भविष्य तथा वर्तमान के चित्रपट दिखाती हैंl फिर भी हम युद्ध टाल नहीं सकते l मानवता की यह विकृति है,,,
क्रोध क्षणिक पागलपन है और बैर, क्रोध का मुरब्बा,,, युग युगांतर से उन्माद की यह प्रथा चली आ रही है
युद्धों ने दिया है
श्वेत वस्त्र और कफ़न
राक्षसों का अट्टहास
शिशुओं का क्रंदन
चंद्रमा की शांति छोड़कर
पाप ग्रह
मंगल का चरण
अमर होने की अभिलाषा में
मृत्यु का वरण ,,,