कहानी में किसान का दर्द देख कर उसके लिए हृदय सहानुभूति से भर जाता है। वह जमीन से जुड़ा आदमी है। वह जानता है कि पैसा तो टिकता नहीं है, परंतु जमीन पुश्त दर पुश्त परिवार को पालती है। जमीन के बिकने से पैसा आता है परंतु उसके कारण आपस में मतभेद होना, और सब बच्चों का पैसे के गरूर में डूब जाना किसान इस सबको देखता है और दुखी होता है। एक जमीन के अधिग्रहण से किसान का जीवन कैसे उलट पलट हो जाता है और परिवार टूटने की कगार पर आ जाता है, आपसी प्रेम समाप्त हो जाता है, यह कहानी में बहुत अच्छे से दर्शाया गया है।
बहुत अच्छी है कहानी। लेखिका को बधाई।
बहुत अच्छी, मार्मिक एवं जीवन के बहुत करीब लगी कहानी।किसान का दर्द उसकी पीड़ा और उसकी विवशता सभी का जीवंत चित्रण है इस कहानी में।कहानी मन को स्पर्श करती है। एक अच्छे सृजन के लिए बहुत बहुत बधाई।
पद्मा मिश्रा.जमशेदपुर
कहानी में किसान का दर्द देख कर उसके लिए हृदय सहानुभूति से भर जाता है। वह जमीन से जुड़ा आदमी है। वह जानता है कि पैसा तो टिकता नहीं है, परंतु जमीन पुश्त दर पुश्त परिवार को पालती है। जमीन के बिकने से पैसा आता है परंतु उसके कारण आपस में मतभेद होना, और सब बच्चों का पैसे के गरूर में डूब जाना किसान इस सबको देखता है और दुखी होता है। एक जमीन के अधिग्रहण से किसान का जीवन कैसे उलट पलट हो जाता है और परिवार टूटने की कगार पर आ जाता है, आपसी प्रेम समाप्त हो जाता है, यह कहानी में बहुत अच्छे से दर्शाया गया है।
बहुत अच्छी है कहानी। लेखिका को बधाई।
बहुत अच्छी, मार्मिक एवं जीवन के बहुत करीब लगी कहानी।किसान का दर्द उसकी पीड़ा और उसकी विवशता सभी का जीवंत चित्रण है इस कहानी में।कहानी मन को स्पर्श करती है। एक अच्छे सृजन के लिए बहुत बहुत बधाई।
पद्मा मिश्रा.जमशेदपुर