Wednesday, February 11, 2026
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महेश कुमार केशरी की कविताएँ

1 – माँ का मतलब
माँ का मतलब खुरदरे हाथ..
चेहरे पर झुर्रियाँ अस्त व्यस्त कपड़े ..
माँ का मतलब दौड़ना और भागना ..
माँ का मतलब त्योहार
माँ का मतलब इंतजाम. .और
इंतज़ार
माँ का मतलब अनुशासन
माँ का मतलब ..आटे से रँधा हाथ..
बर्तन बासन में लगी छाई ..
माँ का मतलब चूल्हा. .
माँ का मतलब बरी , तिलौरी , अदौरी
माँ का मतलब गर्म रोटी और सालन ..
माँ का मतलब कपड़े धोती एक स्त्री. ..
माँ का मतलब घर -दुआर बुहारती औरत ..
माँ का मतलब धान फटकती औरत
चावल से कंकर पत्थर चुनती औरत
माँ का मतलब तुलसी पिंडा
माँ का मतलब जेठ की दुपहरी ..
पसीने से तरबतर…रसोई में भात बनाती हुई एक
स्त्री ..
माँ का मतलब ताकना या ध्यान
देना कोई भूखा तो नहीं सो गया ..
माँ का मतलब सुई ..
माँ का मतलब काज और बटन
माँ का मतलब अल्पना. .
माँ का मतलब दीपावली
माँ का मतलब
वैभव
माँ का मतलब
समृद्धि
माँ का मतलब अन्नपूर्णा
माँ का मतलब स्वाद
माँ का मतलब रँग ..
माँ का मतलब प्यार
माँ का मतलब विश्वास
माँ के ना होने पर असुरक्षा ..
माँ के ना होने पर घबराहट
माँ का मतलब निश्चिंतता ..
माँ का मतलब आश्वस्ति. .
माँ के होने पर लापरवाही ..
माँ का मतलब
दुनिया की हर मुसीबत और
परेशानी का बौना हो जाना है
माँ का मतलब
दर असल एक कवच है
जिसके अँदर पूरी दुनिया सुरक्षित है !
2 – जनरल नॉलेज की किताब
मैं जब से पढ़ रहा हूँ
बहुत सारे किताब मैं पढ़ गया
जनरल नॉलेज कि किताब भी
मैं बेरोजगार था …
इसलिए खूब पढता था ..
पिता न कह रखा था कि तुम
पढ़ो नहीं तो कुछ नहीं होगा तुम्हारा
बहुत मेहनत करने वालों का
ही आज के टाइम में कुछ होता है
मैनें बहुत सी परीक्षाएँ दी और पढ़ता रहा
तरह तरह की किताबें
उसमें बहुत सी बातें लिखी थीं
हमारी तमाम परेशानियाँ
आप लँबे कैसे हों , आप सफल कैसे हों
आप चेहरे पर क्या लगाएँ
आप सेहत के लिए क्या
खाएँ …
क्या नहीं खाएँ
इस साल का फिल्म फेयर
सम्मान किसको
मिला या आस्कर से किसे नवाजा
गया
किसने इस साल का अर्जुन
पुरस्कार जीता
या किसको पद्मभूषण, पद्मश्री मिला
किसको भारत रत्न दिया गया
मेरी जितनी उम्र है वहाँ
तक पहुँचते हुए मैं हर साल
जनरल नॉलेज की किताब खरीदता
रहा
लेकिन किसी किताब या अखबार में
इस सर्वे को नहीं पढ़ा कि दुनिया
का सबसे गरीब आदमी कौन है ?
क्या आपने जी. के . के किसी
किताब में पढ़ा है दुनिया के सबसे गरीब आदमी का नाम !
मैं परीक्षा देता रहा
साल दर साल
मैं जब परीक्षा दे रहा
प्रतियोगिता वाली उस समय मेरी उम्र बीस की रही होगी
परीक्षा देते – देते अब मैं अधेड़
होने लगा हूँ…
चालीस के आस पास हूँ
एक बात पर मैंनें ध्यान दिया है
कि किसी परीक्षा में किसी
साल इस तरह का प्रश्न मैनें हल
नहीं किया कि
इस देश में कितने लोग
बेरोजगार हैं ..
कि उनका सही – आँकड़ा सरकार कभी क्यों नहीं
बताती ..
या शायद सरकार इस तरह के प्रश्न पत्र नहीं
बनाना चाहती …
जिसमें बेरोजगारी का जिक्र हो ..
वो सालों से बात करती है
जनसंख्या का नियंत्रण कैसे हो
परिवार नियोजन क्या है …
देश में बेकारी – बेरोजगारी की बात कभी नहीं करती।
महेश कुमार केशरी
महेश कुमार केशरी
महेश कुमार केशरी झारखण्ड के निवासी हैं. कहानी, कविता आदि की पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं. अभिदेशक, वागर्थ, पाखी, अंतिम जन , प्राची , हरिगंधा, नेपथ्य आदि पत्र-पत्रिकाओं में रचनाएं प्रकाशित. नव साहित्य त्रिवेणी के द्वारा - अंर्तराष्ट्रीय हिंदी दिवस सम्मान -2021 सम्मान प्रदान किया गया है. संपर्क - [email protected]
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