Wednesday, July 24, 2024
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सुदीप भोला की कविताएं

जबलपुर (मध्य प्रदेश) में जन्मे सुदीप भोला मूलरूप से हास्यकवि के रूप में प्रतिष्ठित हैं। मगर वे ग़ज़ल भी लिखते हैं और देशप्रेम की कविताएं भी। सुदीप न्यूज़ 18 के लोकप्रिय कार्यक्रमनेताजी लपेटे मेंनिरंतर अपनी काव्य प्रतिभा का परिचय देते रहते हैं। पुरवाई में प्रकाशित उनकी कविताएं इस बात का सुबूत है कि चाहे किसी कवि की पहचान एक हास्य कवि के रूप में हो, मगर पहले वो कवि होता है उसके बाद किसी रस विशेष का कवि। 

1.
जब तलक जिंदा रहेगा आशियाँ दे जाएगा ।
कत्ल होगा पेड़ तो भी लकडियां दे जाएगा ।
उम्र भर देता रहेगा सांस अपनी सांस से,
फिर तुम्हारे घर के चौखट खिड़कियां दे जाएगा।
जब नदी के दो किनारे बाढ़ में बह जाएंगे ,
तब तुम्हें मंज़िल की खातिर कश्तियाँ दे जाएगा ।
जो न दे पाए उसे इक ज़िंदगी जीने का हक़,
वो शज़र उनके लिए भी कुर्सियां दे जाएगा ।
आप हीरे खोजते रहना भले माटी तले,
वो परिंदों के घरों को पत्तियां दे जाएगा ।
2.
हम किसी भी देश बसे, बसा है देश हमारे सीने में
भारत की खुश्बू आती है अपने खून पसीने में।
ओमान से लेकर अमरीका गर्वित तिरंगे हर्षाया है,
हर महाद्वीप में भारत माता का सम्मान बढ़ाया है,
हर संस्कृति का सम्मान किया अपने भूले ना संस्कार,
जिस देश रहे उस माटी को मौसी के जैसे किया प्यार,
देवकी यशोदा दोनों का अरमान हमारे जीने में,
भारत की ख़ुशबू …
संघर्ष,परिश्रम,लगन और ईमान हमारे गहने हैं,
आचरण भरोसेमंद रहा संयम के तो क्या कहने हैं,
हमने सबको स्वीकार किया सबने हमको स्वीकारा है,
इसलिए विश्व में सबसे न्यारा हिंदुस्तान हमारा है,
इक उम्र गुजारी है हमने घनघोर हलाहल पीने में,
भारत की ख़ुशबू…
गांधी सुभाष की परिपाटी सुंदर पिचाई तक आई है
साकार स्वयं होकर अपनी कल्पना चावला छाई है,
उद्योग योग सहयोग सभी में अपनी धाक जमाई,
नव रत्न इंडिया के कहिए मत कहिए एनआरआई हैं,
है कोहिनूर सी चमक मेरे भारत के हर इक नगीने में,
भारत की ख़ुशबू…
3.
जिन्होंने हंस कर दे दी जान बढ़ाई भारत माँ की शान,
तिरंगे का रखा सम्मान मैं तुझसे पूछूं हिंदुस्तान
बता दे मेरे हिंदुस्तान,उन्हें हम क्या दे पाये ?
क्यूँ शहीद की बहन बेचती,लाल किले पर चाय?
उन्हें हम क्या दे पाये?
जिन्होंने तोड़ी हर जंजीर कि उनकी देखो तो तक़दीर,
निकाली संसद से तस्वीर ,बना ली आजादी जागीर,
उनके बच्चों के बच्चे भी भूखे सोते हाय ….
उन्हें हम क्या दे पाये-२
भड़क रहे थे उनके मन मे,देश भक्ति के शोले,
कितने सीधे कितने सच्चे,कितने मन के भोले,
दूल्हे जैसे लगते थे वो,पहन बसंती चोले,
अपनी दुल्हन आजादी है जाते जाते बोले,
कि जिनकी मौत बनी त्योहार ,युगों तक होगी जय जयकार,
गगन से ऊंचा था किरदार,धरा पर आए थे अवतार,
फांसी की वरमाला पहने मंद मंद मुस्काए,
उन्हे हम क्या दे पाये?
मातृ भूमि पर तन मन धन,सब कर देते बलिहारी,
जिनका एक जन्म हम सब के,लाख जन्म पर भारी,
हम उनको क्या दे सकते और क्या औकात हमारी?
कुछ मुआवजा एक नौकरी इक मकान सरकारी,
कि जिनके अंग अंग थे भंग,मगर जो थामे रहे तिरंग,
बहा कर अपने खून की गंग,लड़ गए आख़री दम तक जंग,
सच कहता हूँ वही तरे हैं ,गंगा वही नहाये,
उन्हे हम क्या दे पाये?
माँ के हाथ की रोटी छोड़ी,जेल की रोटी खाई,
हाथों मे हथकड़ियाँ पहनी,राखी न बंध पाई,
आजादी के मीठे सपनों,वाली ईद मनाई
घर घर हो जाए दिवाली,ऐसी अलख जगाई
कभी देखो उनके परिवार,जहाँ हर कोने मे अँधियार
जहाँ एक बूढ़ी माँ बीमार,जहाँ एक पिता बहुत लाचार
अरे जिनके घर 15 अगस्त को ,बिजली काट दी जाए
उन्हे हम क्या दे पाये ,जिन्होंने हंस कर दे दी जान।
क्रिकेट के मैदान पे बेशक,पुरस्कार बरसा दो,
फिल्मी नायक नायिकाओ पर,दौलत खूब लूटा दो,
लेकिन उसको क्या उत्तर देना है मुझे बता दो,
हेमराज की माँ कहती है बेटे का सिर ला दो !
शेरनी लगा रही हुंकार,अभी उसने ना मानी हार,
देश पर पुत्र किया बलिहार,कर रही पोते को तैयार,
जो माँ भारत माँ की खातिर -२ बन गई पन्ना धाय,
उन्हे हम क्या दे पाये-२
जिन्होंने हंस कर दे दी जान, बढ़ाई भारत माँ की शान
तिरंगे का रखा सम्मान, मैं तुझसे पूछूं हिंदुस्तान,
बता दे मेरे हिंदुस्तान, उन्हें हम क्या दे पाये ?
4.
एक साल में चार चार ओ ब्रेक अप करने वालो ,
दिन दिन भर ओ व्हाट्सएप्प गप शप करने वालो,
इश्क मोहब्बत उल्फत लव में डूबे हुए युवाओ,
प्रेम दिवस है आज तुम्हारा बेशक उसे मनाओ,
युगल प्रेम से अटे हुए हैं होटल बाग बगीचे,
कोई चुंबन बांटे कोई आलिंगन में भींचे,
यौवन तो यौवन है यौवन रोके कहाँ रुका है,
और इश्क चढ़ गया किसी पर तो वो कहां झुका है,
तुमको याद दिलाता हूँ मैं एक प्रेम का किस्सा,
जिसमे आशिक का तन बिखरा होकर हिस्सा हिस्सा,
तुम तो केवल दिल के बदले दिल ही देते आये,
ये उनका किस्सा है जो घर टुकड़ों में थे आये,
प्रेम देश का सबसे ऊपर जिस आशिक ने रक्खा,
और तिरंगे को अंतिम चुम्बन से जिनने चक्खा,
इसी फरवरी चौदह को जो हमसे हुए विदा थे,
मातृभूमि पर कुछ जवान बेटे जो हुए फिदा थे,
उन्हें चीथड़ों में बंट कर भी प्यारा जनगणमन था,
भूलेंगे ना माफ करेंगे अपना भी तो प्रण था
आज युवाओं पढ़ लो कवि का एक शिकायतनामा,
वेलेंटाइन याद रहा तुम भूल गए पुलवामा
फुरसत मिल जाये तो अपना थोड़ा कर्ज चुकाना,
एक फूल जाकर शहीद की देहरी पर रख आना।

सुदीप भोला
मोबाइल – +91 87707 97399
ईमेल – [email protected] 
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3 टिप्पणी

  1. भोला जी बहुत बढ़िया कविताएं।
    मैं टीवी बहुत काम देखती हूं परंतु नेताजी लपेटे में जरूर देखती हूं मुझे बहुत अच्छा लगता है। आप तो बहुत बढ़िया कविताएं लिखते हैं बधाई हो।

  2. आदरणीय सुदीप जी!
    आपकी कविताओं ने तो अंतर्मन में हल्ला मचा दिया। पहली तो लगा गजल है। क्या तीखी कलम है आपकी!!! जितनी कठोर उतनी ही कोमल। देश प्रेम के मामले में गजब लिखते हैं आप इसमें कोई दो मत नहीं।
    पहली कविता की तो हर पंक्ति एक वृक्ष के त्याग और बलिदान की कहानी है। वृक्ष पर इतनी अच्छी रचना किसी ने नहीं लिखी होगी पहले कभी

    जब तलक जिंदा रहेगा आशियाँ दे जाएगा ।
    कत्ल होगा पेड़ तो भी लकडियां दे जाएगा ।
    उम्र भर देता रहेगा सांस अपनी सांस से,
    फिर तुम्हारे घर के चौखट खिड़कियां दे जाएगा।
    जब नदी के दो किनारे बाढ़ में बह जाएंगे ,
    तब तुम्हें मंज़िल की खातिर कश्तियाँ दे जाएगा ।
    जो न दे पाए उसे इक ज़िंदगी जीने का हक़,
    वो शज़र उनके लिए भी कुर्सियां दे जाएगा ।
    आप हीरे खोजते रहना भले माटी तले,
    वो परिंदों के घरों को पत्तियां दे जाएगा ।
    आपकी इस रचना के लिए तो हम यही कहेंगे -वाह! वाह और वाह!!!!
    2. आपकी दूसरी रचना देश प्रेम से जुड़ी हुई है।देश के प्रति आपका प्रेम इसमें फूट-फूट करने निकला है। आपने सही कहा ।हम चाहे किसी भी देश में रहे लेकिन हमारा देश हमारे सीने में रहता है।
    3
    आपकी तीसरी रचना शहीदों से जुड़ी है, जिन्होंने इस देश के लिए अपने आप को कुर्बान कर दिया। शहीदों को नमन।
    4
    आपकी यह कविता बहुत महत्वपूर्ण है इस कविता में आपने वैलेंटाइन डे की तुलनात्मकता में पुलवामा के शहीदों पर लिखा है। बहुत ही सुंदर सृजन है।
    हर रचना एक से बढ़कर एक है। यह कहना मुश्किल है कि कौन सी एक नंबर है।
    बहुत-बहुत बधाइयां एवं शुभकामनाएं आपको, इन बेहतरीन रचनाओं के लिए।

  3. बहुत बहुत आभार इतनी प्रतिष्ठित परंपरा का हिस्सा बनाया आपने श्रद्धेय तेजेंद्र शर्मा जी
    आदरणीया नीलिमा जी और s bhagyam जी आपको इतनी मोहक और उत्साहवर्धक के लिये धन्यवाद

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