GLAC, भारतीय दूतावास बेल्जियम, लग्जमबर्ग एवं यूरोपियन यूनियन एवं World Human Rights Organization (WHRO) के संयुक्त तत्वावधान में नीदरलैंड से विश्वास दुबे, जर्मनी से डॉ शिप्रा शिल्पी सक्सेना एवं बेल्जियम से कपिल कुमार ने किया संयोजन।
विस्तृत रिपोर्ट
रविवार, 15 जून, 2025
Kortrijk, Belgium
विगत वर्ष डेनहैग, नीदरलैंड में GLAC के भव्य शुभारंभ की सफलता के पश्चात वैश्विक भाषा, कला एवं संस्कृति संगठन ने अपना द्वितीय साहित्यिक समारोह “The European Literary Conclav” Kortrijk, Belgium में आयोजित किया ।

डॉ. शिप्रा शिल्पी सक्सेना ने प्रेस को बताया कि वैश्विक भाषा, कला एवं संस्कृति संगठन ( Global language Art and Culture Organisation – GLAC) संस्था के द्वितीय साहित्यिक समारोह के अवसर पर यूरोप के अनेक देशों के साहित्यकार, कवि, पत्रकार एवं विचारकों के साथ, कार्यक्रम के मुख्य अतिथि काउंसलर श्री वी नारायणन (Press, Information and Culture, Embassy of India, Brussels), संस्था के संरक्षक प्रसिद्ध कथाकार एवं साहित्यकार तेजेन्द्र शर्मा एम.बी.ई. (ब्रिटेन) एवं श्री विजय मालिक (President, World Human Rights Organization (WHRO) ने स्वयं उपस्थित होकर अपनी मंगलकामनाएं प्रेषित की।
कार्यक्रम का शुभारंभ नीदरलैंड के सुप्रसिद्ध कवि एवं लेखक विश्वास दुबे ने आमंत्रित अतिथियों के स्वागत के साथ किया। उन्होंने संस्था की पृष्ठभूमि एवं उद्देश्य को बताते हुए कहा हमारा उद्देश्य साहित्य के माध्यम से विश्व के साहित्य-सेवियों को एक सूत्र में पिरोना है, GLAC भविष्य में भी ऐसे आयोजन करता रहेगा।
कार्यक्रम की शुरुआत मां वीणा वादिनी को नमन करते हुए काउंसलर श्री वी नारायणन, श्री तेजेन्द्र शर्मा एवं श्री कपिल कुमार ने दीप प्रज्वलन के साथ किया। पूजन के पश्चात भारतीय संस्कृति एवं परम्परा का पालन करते हुए डॉ शिप्रा ने सभी अतिथियों का स्वागत रोली अक्षत से टीका लगाकर किया।
इसके साथ ही जर्मनी की सुप्रसिद्ध शिक्षाविद, लेखक एवं मीडिया प्रोफेशनल डॉ शिप्रा शिल्पी सक्सेना ने मधुर कंठ से “गूंज रही है कान में वीणा की झंकार, अर्पण है मां आपको भावों का यह हार” सुंदर दोहों से मां वीणा वादिनी को नमन करते हुए काव्य संध्या को गति प्रदान की।

संगठन के महत्व को बताते हुए कपिल कुमार ने कहा अभी तक यूरोप के अलग अलग देशों में भाषा, कला एवं संस्कृति की दिशा में अच्छा कार्य किया जा रहा था किंतु ये कार्य बिखरा हुआ था, GLAC पहला ऐसा यूरोपीय संगठन है जो सारे यूरोप को ही नहीं वरन सम्पूर्ण विश्व को एक साथ मिलकर कुछ अनूठा, कुछ नवीन एवं सार्थक कार्य करने के लिए प्रेरित करेगा एवं सभी को एक वृहद वैश्विक मंच प्रदान करेगा।
कार्यक्रम के प्रथम भाग का शानदार संचालन करते हुए विश्वास दुबे ने अपनी गजलों एवं अपने काव्यात्मक संचालन द्वारा सभी विशिष्ट अतिथियों का मन मोह लिया।
जहां एक ओर नीदरलैंड के सुप्रसिद्ध युवा कवि एवं साहित्यकार मनीष पांडेय ने पितृ दिवस के अवसर पर पिता को समर्पित कविता सुनाकर सब को भावुक कर दिया, वही अपनी नई कविता
“बचपन के वो ख्वाब मेरे तू कैसे सोया होगा…
जिस अमराई गरमी आते आम चुराते थे हम,
जिन सड़कों पर यारों के संग साइकिल चलाते थे हम,
बचपन का वो एक खिलौना सबसे प्यारा था जो,
खोकर हमको कई दिनों तक वो भी रोया होगा”
सुनाकर श्रोताओं को बचपन के दिनों की याद दिला दी।

लंदन से आए प्रतिष्ठित कवि एवं गज़लकार आशुतोष कुमार ने अपनी ग़ज़लों और अपने धुंआधार शेरों से दर्शकों का मन मोह लिया, जहां उनके एक शेर “बड़ों का फर्ज है ये तो, अपना दिल बड़ा रखना” ने जमकर तालियाँ बटोरी, वही “सुर से बिछड़े हुए साज़ है हम,
“गूंगे बिछड़ों की आवाज है हम।
प्यार से सुनना हमको भी यारों,
मुख्तलिफ एक अंदाज है हम।
बात दिल खोल के मत किया कर,
रख छुपा के हमें एक राज है हम।” उनके एक से एक बेहतरीन शेर ने महफ़िल का मौसम बदल दिया।
लंदन से ही आमंत्रित प्रभु राम पर अद्भुत सृजन करने वाले सुविख्यात कवि श्री आशीष मिश्रा ने भी अपनी जोश-पूर्ण कविताओं एक क्षणिकाओं से दर्शकों को सम्मोहित कर लिया। उनकी कविता_
“हम क्या करने आए है, हम कविता सुनने आए है।
कुछ गीत सुनाने आए है, ये शाम बनाने आए है।
शब्दों के स्पंदन से, भावों के चंदन से।
मां सरस्वती के वंदन से, बेल्जियम अभिनंदन से।
हम गीत सुनाने आए हैं,” और “राम भरोसे जीवन नैया, समय कराता ता ता थैया” जैसी सार्थक रचनाओं ने दर्शकों को आनंदित कर दिया।
इस अवसर पर संस्था की सह-संस्थापक डॉ शिप्रा शिल्पी सक्सेना ने अपने काव्य पाठ का आरंभ अहमदाबाद विमान दुर्घटना की मृतकों की पुण्यात्माओं को, सभी के साथ मौन रखकर श्रद्धांजलि अर्पित करके की। उन्होंने कहा ईश्वर मृतकों के परिजनों को इस असहनीय दुख सहने की हिम्मत प्रदान करें। ये एक कठिन समय है, इस हृदय विदारक घटना ने सब को झकझोर दिया है। अपने गीत एवं मुक्तकों के माध्यम से उन्होंने विश्व शांति की स्थापना, सद्भावना, प्रेम एवं अपने हिस्से को कोशिश जारी रखने पर विशेष जोर दिया। जहां एक ओर उनकी रचना “गैरों की पीड़ा को समझूं, इतनी तो गहराई देना। देने वाले जब भी देना दिल में बस अच्छाई देना” ने दर्शकों की भावनाओं को उद्वेलित किया, वही अपनी शानदार प्रस्तुति से झूमने पर मजबूर भी कर दिया।


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