व्यंग्य यात्रा सम्मान समारोह 2026 – (एक रिपोर्ट)
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अध्यक्षीय भाषण में प्रेम जनमेजय ने कहा, “मेरे प्रशंसक कहते हैं कि मैं वन मैन आर्मी हूँ। मैंने ये अहंकार कभी नहीं पाला है। आप सबका सहयोग मेरी ताकत, मेरी ऊर्जा और मेरा संबल है। इस सहयोग के कारण मैं कभी अकेला नहीं हूँ। इस सहयोग के बिना मैं कुछ नहीं कर सकता हूँ। यही मेरी पूंजी भी है, पूंजीनिवेश भी। ‘व्यंग्य यात्रा’ का कुनबा प्रतिदिन इस विकास पथ पर सरपट दौड़ रहा है।” सम्मानों की स्थिति पर विवेचनात्मक टीका-टिप्पणी करते हुए उन्होंने कहा कि “सम्मान स्वयं को मिले तो जेनुइन लगता है और दूसरे को मिले तो जुगाड़। सम्मान कुरुक्षेत्र में सम्मानों का क्रीड़ा व्यापार में अपने अपने युद्ध लड़े जा रहे हैं। हेनरी मिलर के शब्दों में – लेखक के लेखन का मूल्यांकन ही पुरस्कार और पारिश्रमिक है।”