‘आज की जनधारा’ के भोपाल संस्करण के शुभारंभ का अवसर केवल एक नए संस्करण के आरंभ का नहीं, बल्कि साहित्य और संवेदना के प्रति अखबार की गहरी प्रतिबद्धता के सार्वजनिक उद्घोष का क्षण भी बना।
इस अवसर पर ‘आज की जनधारा’ के प्रधान संपादक श्री सुभाष मिश्र द्वारा की गई घोषणा ने उपस्थित साहित्यकारों, पाठकों और पत्रकारों को विशेष रूप से आंदोलित किया। हिंदी के अप्रतिम कवि और गद्यकार श्री विनोद कुमार शुक्ल की स्मृति में प्रतिवर्ष उनके जन्मदिवस के अवसर पर एक लाख रुपये का साहित्य केंद्रित पुरस्कार प्रदान किए जाने की घोषणा वस्तुतः एक समाचार पत्र के प्रधान संपादक की समकालीन हिंदी साहित्य के प्रति एक दूरदर्शी और मूल्य-बोध से परिपूर्ण पहल है।
याद रहे कि यह घोषणा किसी क्षणिक भावुकता या शोक-जनित प्रतिक्रिया का परिणाम नहीं है। विनोद कुमार शुक्ल हमारे समय के ऐसे लेखक हैं जिनकी रचनात्मक दृष्टि ने हिंदी साहित्य को नई भाषा, नई संवेदना और नए मानवीय बोध से समृद्ध किया। उनकी लेखनी में जो सहजता, करुणा और मौन की गहराई है, वह उन्हें न केवल हिंदी या भारतीय साहित्य, बल्कि विश्व साहित्य के विशिष्ट रचनाकारों की पंक्ति में स्थापित करती है।



प्रशंसनीय पहल!
बहुत बहुत बधाई