10 जनवरी 2026 की शीतल अपराह्न में टोरोंटो की धरती पर, विश्व हिंदी दिवस के उपलक्ष्य में हिंदी भाषा, साहित्य और भारतीय चेतना का एक उज्ज्वल उत्सव साकार हुआ। अखिल विश्व हिंदी समिति, टोरोंटो तथा भारत के महावाणिज्य दूतावास, टोरोंटो (ओन्टारियो, कनाडा) के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस भव्य साहित्य सम्मेलन ने प्रवासी भारतीय समाज को शब्द, स्वर और संवेदना के सूत्र में बाँध दिया। हिंदी साहित्य सभा, विश्व हिंदी संस्थान, संस्कृत योग सभा, आध्यात्मिक प्रबंध पीठ एवं मधु प्रकाशन के सहयोग से सम्पन्न यह आयोजन अपराह्न 1:00 से सायं 5:00 बजे तक साहित्यिक गरिमा और सांस्कृतिक ऊष्मा से आलोकित रहा।
सम्मेलन के मुख्य अतिथि वरिष्ठ भारतीय कौंसल श्री गिरीश कुमार जुनेजा जी थे, जिनकी उपस्थिति ने आयोजन को राजनयिक गरिमा प्रदान की। अध्यक्षता कनाडियन गवर्नर जनरल से सॉवरिंस मैडल से सम्मानित डॉ. देवेंद्र मिश्र जी ने की, जिनकी अध्यक्षीय दृष्टि में अनुभव और संवेदना का संतुलन स्पष्ट झलकता था। उपाध्यक्ष के रूप में हिंदी साहित्य सभा के अध्यक्ष श्री अनिल पुरोहित जी की उपस्थिति ने आयोजन को संगठनात्मक दृढ़ता प्रदान की।
कार्यक्रम का शुभारंभ, संयोजन एवं संचालन वरिष्ठ साहित्यकार श्री गोपाल बघेल ‘मधु’ द्वारा किया गया, जिनका व्यक्तित्व स्वयं में साहित्य, अध्यात्म और संगठनात्मक चेतना का संगम है। सह-संचालक आचार्य संदीप त्यागी (संस्कृत योग सभा) ने अपने संयत और संस्कारित संचालन से कार्यक्रम को संतुलित प्रवाह प्रदान किया। मंच पर उपस्थित विशिष्ट अतिथियों में डॉ. मनोहर गोरे, डॉ. राकेश मोदी, डॉ. विनोद कुमार भल्ला, श्री सैयद हैदर अमान तथा राज कश्यप जी सम्मिलित थे। इनके अतिरिक्त अनेक साहित्यकार, कवि, सांस्कृतिक कलाकार और साहित्य प्रहरी इस सम्मेलन की आत्मा बने।

कार्यक्रम का आरंभ वैदिक श्लोक-पाठ से हुआ, जिसने वातावरण को आध्यात्मिक स्पंदन से भर दिया। इसके पश्चात सांस्कृतिक सत्र में गीत, नृत्य, बाल प्रस्तुतियाँ और भजन प्रस्तुत हुए, जिनमें भारतीय परंपरा की कोमलता और जीवंतता दोनों एक साथ दृष्टिगोचर हुईं। इन प्रस्तुतियों ने श्रोताओं को केवल दर्शक नहीं रहने दिया, बल्कि भावात्मक सहभागी बना दिया।
काव्य-पाठ सत्र में शब्दों ने अपनी पूरी सामर्थ्य के साथ मंच को आलोकित किया। अध्यक्षीय प्रस्तुति में डॉ. देवेंद्र मिश्र जी ने साहित्य को समाज की चेतना से जोड़ते हुए अपने विचार रखे। तत्पश्चात श्री गोपाल बघेल ‘मधु’, श्री अजय गुप्ता, श्री अनिल पुरोहित, आचार्य संदीप त्यागी, डॉ. विनोद भल्ला, सरोजिनी जौहर जी, राज कश्यप जी, श्यामा सिंह जी सहित अनेक रचनाकारों ने अपनी कविताओं के माध्यम से प्रेम, दर्शन, हास्य और जीवन-संघर्ष के विविध रंग बिखेरे। सभागार साहित्य-रस से सराबोर हो उठा।
मुख्य अतिथि श्री गिरीश कुमार जुनेजा जी ने अपने संबोधन में हिंदी भाषा के प्रचार-प्रसार को केवल दायित्व नहीं, बल्कि सांस्कृतिक उत्तराधिकार बताया। उनके शब्दों में प्रवासी जीवन की चुनौतियों के बीच हिंदी को जीवित रखने की गहरी प्रतिबद्धता झलकती थी।


भारतेत्तर साहित्य और साहित्यकार के माध्यम से हिंदी की जो सेवा हो रही है वह अद्भुत है। वास्तव में यह आप सबका प्रयास है जिसके कारण हिंदी भाषा की सुगंध पूरी दुनिया में फैले रही है।
कार्यक्रम की सफलता के लिए सभी को बधाई और शुभकामनाएँ।