Sunday, July 21, 2024
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संपादकीय – जी-20 और भारतीय लोकतंत्र

पक्ष और विपक्ष दोनों के लिये ही भारत में जी-20 का आयोजन एक गर्व करने लायक उपलब्धि है। हमें राजीतिक उठा पटक से अलग हट कर भारत के बारे में सोचना होगा कि किस प्रकार आज पूरा विश्व भारत की ओर नज़रें टिकाए है। यह सच है कि आज से पहले कभी भी ऐसा नहीं हुआ कि विश्व के सबसे बड़े देशों के राष्ट्राध्यक्ष भारत में किसी एक सम्मेलन के लिए इकट्ठे हुए हों। मगर कहते हैं न कि जो पहले कभी नहीं होता, वो कभी न कभी तो होता है!

भारत में इस समय जी-20 सम्मेलन चल रहा है। 123 एकड़ क्षेत्र में बनाए गये भारत मंडपम में जी-20 के कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है। आईटीपीओ में बना ये नया कॉम्प्लेक्स दुनिया के शीर्ष दस कन्वेंशन सेंटर्स में शामिल है, जो कि जर्मनी के हनोवर और चीन के शंघाई जैसे विख्यात कन्वेंशन सेंटरों को टक्कर देता है।
हिंदी के प्रसिद्ध पत्रकार एवं इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केन्द्र के अध्यक्ष श्री राम बहादुर राय के अनुसार, “शिखर सम्मेलन में जो भी आएंगे, वे भारत मंडपम में प्रवेश करने से पहले नटराज का साक्षात दर्शन करेंगे। वास्तव में वसुधैव कुटुंबकम् और नटराज की अवधारणा में इस सृष्टि का रचना-दर्शन समाया हुआ है। नटराज की मूर्ति में सृष्टि की भारतीय अवधारणा प्रकट होती है। सृष्टि परमात्मा से अलग नहीं है। सृष्टि उसका ही फैलाव है। इसका अर्थ यह है कि जो सृष्टि है, उसमें ही परमात्मा है, वह उससे अलग नहीं है। मानवता शब्द में यही दृष्टि है। नटराज की मूर्ति बताती है कि परमात्मा नर्तक की तरह है। वह नृत्य है और नृत्यकार भी है। ये दोनों रूप अलग-अलग नहीं हैं। अगर नृत्यकार चला जाए, तो नर्तन नहीं बचेगा, वह भी इसी के साथ चला जाएगा। भारत ने परमात्मा की नटराज की मूर्ति बनाई है। उस परमात्मा के शिव स्वरूप को नटराज कहने की परंपरा अनादि काल से है।”
जिसने पुराने प्रगति मैदान को देखा है, वह आज चकित होगा और साथ ही साथ गौरवान्वित भी होगा। आखिर ऐसा क्यों? इसलिए नहीं कि प्रगति मैदान के चारों तरफ दूर-दूर तक दीवारें चित्रकारी से सजी हुई हैं, बल्कि इसलिए कि इस परिसर का सचमुच कायाकल्प हो गया है। प्रगति मैदान अंदर-बाहर से पूरी तरह रूपांतरित हो गया है। यह रूपांतरण सांस्कृतिक है। इसकी समझ भारत के राजनेताओं को रही है, लेकिन उसे साकार रूप देने का अवसर इस समय मिला है। जी-20 का शिखर सम्मेलन ऐसा ही एक सुअवसर है। इस अवसर को कई साल पहले ही पहचान लिया गया था। तभी तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रगति मैदान के कायाकल्प की रूप-रेखा बनवाई। इस परिसर की पहचान है, भारत मंडपम।
अपने-अपने कारणों से रूस और चीन के राष्ट्रपति जी-20 सम्मेलन में शामिल नहीं हो पा रहे हैं। मगर चीन अपने इस निर्णय के कारण अलग-थलग पड़ता दिखाई दे रहा है। अमरीकी राष्ट्रपति जो. बाइडेन इस सम्मेलन के सबसे बड़े सितारे हैं तो वहीं ब्रिटेन के प्रधानमंत्री ऋषि सुनक, फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों, जापान के प्रधानमंत्री फुमियो किशिदा, जर्मनी के चांसलर ओलाफ स्कोल्ज, कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो, इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी, बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति युन सौक यौल, ब्राजील के राष्ट्रपति लूला डी सिल्वा, मॉरीशस के प्रधानमंत्री प्रवीण कुमार जगन्नाथ, सिंगापुर के प्रधानमंत्री ली सीन लूंग, यूरोपियन यूनियन की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन भी भारत के प्रधानमंत्री के साथ भी द्विपक्षीय वार्ताएं होंगी।
इन दिनों एक बहुत ख़ास नज़ारा भारतीय टीवी चैनलों पर देखने को मिला। अमरीका की अधिकारी मार्गरेट मैक्लोड भारतीय टीवी चैनलों पर फर्राटेदार हिन्दी बोल रही थीं जिसमें उर्दू के शब्दों का तड़का भी लगा था। इससे पहले यह सुख भारतवंशियों को कभी देखने को नहीं मिला।
सम्मेलन से एक दिन पहले ही अमरीका के राष्ट्रपति जो बाइडेन और भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के बीच द्विपक्षीय वार्ता का आयोजन किया गया। और यह मीटिंग प्रधानमंत्री निवास पर हुई। यह अपने आप में एक अनूठी स्थिति रही क्योंकि इससे पहले जब कभी दो राष्ट्राध्यक्षों के बीच द्विपक्षीय वार्ता का आयोजन होता है उसके लिये हैदराबाद हाऊस का इस्तेमाल किया जाता है। यह भी शायद पहली बार हुआ होगा कि अमरीका या किसी भी देश का मुखिया एअरपोर्ट से सीधे भारतीय प्रधानमंत्री के साथ द्विपक्षीय वार्ता के लिये पहुंच गया हो। इस द्विपक्षीय वार्ता की ओर पूरे विश्व की निगाहें लगी थीं।
जी-20 सम्मेलन नौ और दस सितम्बर को हो रहा है। इस सम्मेलन के एजेंडे में जलवायु परिवर्तन, ऋण, खाद्य सुरक्षा, स्थिरता और जियो-पॉलिटिकल तनाव पर चर्चा शामिल है। वहीं, भारत ने इस वर्ष के शिखर सम्मेलन का थीम ‘One Earth, One Family, One Future’ – यानी कि एक धरती, एक परिवार और एक भविष्य रखा  है। सभी की निगाहें नेताओं की संयुक्त घोषणा पर लगी हैं।

इस सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की एक ख़ास उपलब्धि यह भी है कि उन्होंने पचपन देशों के संगठन ‘अफ्रीकन यूनियन’ को भी जी-20 का सदस्य बनवा लिया है। यही नहीं सऊदी अरब के प्रिंस सलमान और यू.ए.ई. के राष्ट्रपति खलीफा बिन जायद अल नाहयान भी इस सम्मेलन में शामिल होने के लिये पहुंचे।
इनके साथ ही साथ विश्व की तमाम बड़ी वित्तीय संस्थाओं के मुखिया जैसे कि आई.एम.एफ़, एशियन डेवेलपमेंट बैंक, वर्ल्ड बैंक और तमाम विकसित देशों के बड़े बैंकों के मुखिया भी सम्मेलन का हिस्सा बने हैं।
ब्रिटेन के प्रधानमंत्री ऋषि सुनक ने भारत पहुंचते ही कुछ ऐसे बयान दिये जो किसी भी भारतीय के लिये तो संगीत से कम नहीं थे, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी आतंकवाद के ख़िलाफ़ ब्रिटेन की नीति निर्धारण का काम करेंगे।
खालिस्तानी हिंसा पर सुनक ने कहा- “यह बहुत अहम मुद्दा है। मैं बिल्कुल साफ़ कर देना चाहता हूं कि कट्टरता या हिंसा, फिर वो चाहे किसी भी रूप में हो, ब्रिटेन में इसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इसलिए हम इस मुद्दे पर भारत सरकार के साथ मिलकर काम कर रहे हैं। खास तौर पर PKE (प्रो खालिस्तान एक्सट्रीमिज्म) के मसले पर हम काम कर रहे हैं।”
ऋषि सुनक ने कहा- “हाल ही में हमारे सिक्योरिटी मिनिस्टर ने भारत का दौरा किया था। तब इस बारे में उन्होंने बातचीत की थी। हमने कुछ वर्किंग ग्रुप्स बनाए हैं। ये इंटेलिजेंस और इन्फॉर्मेशन शेयरिंग कर रहे हैं। इसी तरह से काम करते हम इस तरह की हिंसक कट्टरता पर काबू पा सकते हैं। ये तय है कि ब्रिटेन में इस तरह की हिंसा और कट्टरता बर्दाश्त नहीं की जाएगी।”
जी-20 में शामिल, जितने भी देश हैं उनकी तरफ़ से लिए गए फैसले काफी मायने रखते हैं। ये सारे सदस्य दुनिया की बेहतरी में अपना योगदान देते हैं। इस समूह का गठन ही इस मकसद के लिए हुआ है कि वो दुनिया में पैदा होने वाली परेशानियों पर साल में एक बार बैठकर विचार-विमर्श कर सकें और उसका उचित हल निकाल सकें।
इस समूह में शामिल देशों की पास इतनी क्षमता है कि उनके फैसलों पर दुनिया के बाकी देश किसी भी तरह का सवाल नहीं उठा सकते हैं। इस वक्त दुनिया की कुल आबादी 800 करोड़ के पार है और उसमें से 533 करोड़ की आबादी इन 20 देशों में शामिल है।
वहीं दुनिया के शीर्ष दस सबसे ज्यादा GDP वाले देश भी जी 20 में शामिल हैं, जिनमें अमेरिका, चीन, जापान, जर्मनी, भारत, यूके, फ्रांस, इटली, कनाडा, और ब्राजील शामिल है। इन सब की अगर GDP जोड़ दी जाए तो वो 71 हजार 120 बिलियन डॉलर के बराबर है। यानी कि विश्व की जीडीपी का 85% इन बीस देशों के पास है।
जहां एक ओर विश्व के तमाम लोकतंत्रीय देशों के मुखिया भारत की मेज़बानी में एक छत के नीचे एकत्रित हुए हैं, वहीं विपक्ष के नेता राहुल गान्धी इस समय बेल्जियम और अन्य यूरोपीय देशों की यात्रा पर निकले हुए हैं। वहां उन्होंने कहा, “भारत में बड़े पैमाने पर लोकतांत्रिक संस्थानों पर हमला हो रहा है। देश के संविधान को बदलने की कोशिश हो रही है। अल्पसंख्यकों और दलितों पर हमले हो रहे हैं। सरकार दहशत में है और पी.एम. मुख्य मुद्दों से ध्यान भटकाने की कोशिश करते हैं।”
बेल्जियम में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान जब कांग्रेस नेता से पूछा गया कि क्या वो देश का नाम भारत करने का समर्थन करेंगे, तो उन्होंने कहा कि ये केवल सरकार पर निर्भर है कि वो क्या नाम देश का चाहती है। राहुल ने कहा कि सरकार ये सब लोगों का ध्यान मूल मुद्दों से भटकाने के लिए कर रही है।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु द्वारा विदेशी मेहमानों के लिये आयोजित किये गये रात्रिभोज में राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे को निमंत्रण न भेजने पर कांग्रेस और विपक्ष के नेताओं ने आपत्ति दर्ज की है। ‘पुरवाई’ ने चेक किया है कि निमंत्रण भेजे जाने की सूची में मल्लिकार्जुन खरगे का नाम सातवें ग्रुप में आता है जिसमें केबिनेट मंत्री आते हैं। राज्यसभा में विपक्ष के नेता का दर्जा भी केबिनेट मंत्री स्तर का होता है। ऐसे में उन्हें निमंत्रण न भेजने का कोई कारण समझ नहीं आ सकता। यह ठीक है कि लोकसभा में कोई भी नेता विपक्ष के नेता पद पर आसीन नहीं है। मगर परंपराओं के अनुसार मल्लिकार्जुन खरगे को निमंत्रण भेजा जाना चाहिये था। इस ग़लती को अभी भी सुधारा जा सकता है।
पक्ष और विपक्ष दोनों के लिये ही भारत में जी-20 का आयोजन एक गर्व करने लायक उपलब्धि है। हमें राजीतिक उठा पटक से अलग हट कर भारत के बारे में सोचना होगा कि किस प्रकार आज पूरा विश्व भारत की ओर नज़रें टिकाए है। यह सच है कि आज से पहले कभी भी ऐसा नहीं हुआ कि विश्व के सबसे बड़े देशों के राष्ट्राध्यक्ष भारत में किसी एक सम्मेलन के लिए इकट्ठे हुए हों। मगर कहते हैं न कि जो पहले कभी नहीं होता, वो कभी न कभी तो होता है!
तेजेन्द्र शर्मा
तेजेन्द्र शर्मा
लेखक वरिष्ठ साहित्यकार, कथा यूके के महासचिव और पुरवाई के संपादक हैं. लंदन में रहते हैं.
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55 टिप्पणी

  1. तेजेन्द्र जी सदा की भांति इन डेप्थ विश्लेषण करती रिपोर्ट, समझ सकता हूँ एक सम्पादकीय लिखने में कितना अध्ययन और शोध किया होगा आपने। मुझे अच्छी तरह याद है 1983 में गुट निरपेक्ष देशों का सम्मेलन हुआ था जिसमे तकरीबन 100 राष्ट्रों के राष्ट्राध्यक्ष आये थे उस समय टेलिविजन शैशवास्था में था अतः मीडिया में शोर शराबा नहीं थी। वह भी गर्व का समय था आज भारत बहुत आगे बढ़ चुका है और एक अलग स्थान है पूरा विश्व भारत की क्षमता के आगे नतमस्तक है। यह सब हमारे युवा वर्ग की मेहनत का नतीजा है।

    • सुरेश भाई, आपका स्नेह हमेशा हौसला बढ़ाता है। दरअसल गुट-निर्पेक्ष के राष्ट्राध्यक्ष और दूसरी तरफ़ अमरीका, ब्रिटेन, जापान, जर्मनी, फ़्रांस, इटली, ब्राज़ील, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, सिंगापुर, दक्षिण कोरिया, संयुक्त राष्ट्र के साथ चीन के प्रधानमंत्री और रूस के विदेश मंत्री का एक साथ न केवल भारत में होना और फिर 13 राष्ट्राध्यक्षों का राजघाट पर महात्मा गांधी को नमन करना… एक अद्भुत नज़ारा है।

  2. बहुत सार्थक, सारगर्भित, जरूरी सुंदर विश्लेषण।
    यह पूरे देश के लिए, प्रवासी देशवासियों के लिए गर्व की बात है।
    यह संपादकीय विस्तृत फलक तक पहुंचाई जानी चाहिए।
    सरकारी कार्यालयों तक भी। साधुवाद

  3. अत्यंत महत्वपूर्ण सदैव की भांति…आपका अध्ययन, विश्लेषण एवं शोध..समग्र रूप में उत्कृष्ट कार्य है..समस्त जानकारियों से परिपूर्ण इस संपादकीय हेतु… आंतरिक धन्यवाद सर

  4. बहुत ही महत्वपूर्ण, सारगर्भित, ज्ञानवर्धक लेख है सर जी-20 शिखर सम्मेलन के महत्वपूर्ण बिंदुओं को, उसके तथ्यों को प्रामाणिकता के साथ लिखने के कारण आलेख पाठकों के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण, ज्ञानवर्धक है…आपका बहुत-बहुत धन्यवाद सर

  5. भारत में जी-२० की तैयारियों और उसके महत्त्व पर बखूबी रौशनी डालता उत्तम संपादकीय। आशा करती हूँ इतनी मेहनत और आवभगत के बाद कुछ ऐसे निर्णय लिए जाएँगे जिससे दुनिया के ज्वलंत प्रश्नों के साथ-साथ भारत के प्रगति प्रश्नों के समाधान की कुछ तो राह प्रशस्त होगी।

  6. सम सामयिक मुद्दो को अपने संपादकीय का विषय बनाना अत्यन्त श्रेष्ठ और सराहनीय है.बहुत सुंदर. सार्थक. सारगर्भित संपादकीय के लिए आपका हृदय से आभार भाई..एक भारतीय होने के नाते भी मेरा अभिनंदन..आपको और
    आपके सार्थक सृजन के लिए..सचमुच यह प्रसंग गौरवान्वित करता है .कि भारत में चली आ रही वर्षों पुरानी .लोकप्रिय और सोद्देश्य वसुधैव कुटुम्बकम की अवधारणा आज साकार हो रही है .राजनीतिक छल छंदो से अलग हटकर इसका स्वागत किया जाना चाहिए. भारत मंडप के.मुख्य द्वार पर नटराज की मूर्ति इस बात का प्रतीक है कि भारत की सोच और संस्कारों में विश्व बंधुत्व की भावना समाहित है.नटराज कला.संस्कृति और सभ्यता के प्रतीक हैं..आपने गहन अध्ययन से इस संपादकीय को एक गरिमा प्रदान की है .जिसकी जितनी सराहना की जाये.कम होगी…जय भारत. जय भारती
    पद्मा मिश्रा.जमशेदपुर भारत

  7. अत्यंत श्लाघनीय संपादकीय तेजेंद्र जी, साधुवाद ,साधुवाद

    जय भारत ,जय भारती,
    हमें भारतीय होने में गर्व है।।

  8. अत्यंत श्लाघनीय संपादकीय तेजेंद्र जी अनेकानेक साधुवाद,

    भारत भवन में आर्यजन जिसकी उतारें आरती
    भगवान सारे विश्व में गूंजे हमारी भारती!!
    जय भारत जय भारती।

  9. G20 सम्मेलन का आयोजन और सफल आयोजन अब वर्तमान है और यह वर्तमान अतीत की भांति सुनहरा है सांस्कृतिक विरासत ज्ञान विज्ञान प्रौद्योगिकी की समृद्धता से लबरेज भारत अब विश्व शिखर की ओर एक कदम और बढ़ा चुका है। यही सब शब्दों के माध्यम से आदरणीय तेजेंद्र शर्मा वाली बाइलाइन से सुस्पष्ट है।
    लोकतांत्रिक अंदाज़ का यह संपादकीय
    निडरता से विपक्ष के नेता का मसला उठाता और समाधान पेश करता है।
    संपादकीय को अब हाल की घटनाओं से सहज ही जोड़ा जा सकता है यथा
    G twenty घोषणा को सभी राष्ट्राध्यक्ष और अंतर राष्ट्रीय एजेंसियों द्वारा एक मत से पारित करना बताता है कि भारत अपनी गणितीय और वैज्ञानिक सोच को वाली कार्यसंस्कृति को प्राप्त करके रहेगा।
    देखा जाए तो संपादक से यह अपेक्षा होती है कि उसका संपादकीय अतीत वर्तमान और ठीक निकट भविष्य का आईना हो और इस कसौटी पर यह आलेख खरा उतरता है।
    अतः श्री तेजेंद्र शर्मा जी बधाई और साधुवाद के पात्र हैं। और उन्हें बहुत बहुत बधाई और साधुवाद।
    सादर एवं सस्नेह
    सूर्य कांत शर्मा

    • आपने पूरे संपादकीय की तकनीकी जांच भी की भाई सूर्य कांत शर्मा जी। हार्दिक आभार।

  10. सम्पादकीय में आपने जी –20 सम्मेलन के आयोजन पर पक्ष और विपक्ष दोनों के नजरिए का बखूबी आकलन किया है। अच्छा लगता अगर आप राजधानी दिल्ली में आम नागरिकों की सुविधा/ असुविधा और इसकी तैयारियों में छुपाए गए यथार्थ एवं कटु सत्यों को भी उजागर करते। धन्यवाद सहित।
    डॉक्तुला भास्कर

    • अतुला जी जब कभी कोई बड़ा काम होता है, उसके साथ कुछ असुविधाएं भी होती ही हैं। दिल्ली को तो बहुत से आंदोलनों के कारण महीनों सड़कें बंद रहने का अभ्यास है। यह तो मात्र तीन दिन की असुविधा है। जबकि उसमें शनिवार और रविवार सम्मिलित हैं जब स्कूल और दफ़्तर बंद रहते हैं।

      • संपादक महोदय
        गंभीरता से समस्या का आकलन और संवेदनशीलता पूर्ण संवाद के लिए एक बार फिर साधुवाद

  11. बहुत सारगर्भित और इस विषय पर समग्र जानकारी समेटे हुए यह आलेख लिखा है आपने।
    खरगे जी को आमंत्रित न किये जाने पर गलती सुधारे जाने की गुंजाईश का संकेत भी आपने किया, यह अलग से बधाई देने लायक बात।

  12. तेजेंद्र सर हमेशा की तरह बहुत ही पुख्ता लिखा गया है।
    संपादकीय में अपने जी२० के उपलक्ष में विपक्ष और पक्ष दोनो के नजरिए को बहुत ही सुंदर ढंग से प्रस्तुत किया है।

  13. तथ्यपरक सुंदर संपादकीय। बहुत अच्छा लगा कि पुरवाई की टीम लिखने से पहले तथ्यों की जाँच करती है।
    जी २० की अध्यक्षता और भारत से यूरोपीय देशों तक आठ प्रमुख देशों द्वारा रेल एवं जहाज काॅरिडोर निर्माण पर सहमति, भारत के लिए एक ऐतिहासिक और महत्वपूर्ण उपलब्धि है।
    कुछ लोगों का कहना है कि यह चीन के वन बेल्ट वन रोड महा परियोजना का जबाव है। परंतु ऐसा कहना जरूरी नही लगता क्योंकि वैश्विक विकास के समानांतर वैश्विक विकास का प्रयास, एक प्रकार से विकास में भागीदारी है न कि कोई बहस या प्रतियोगिता जिसका कोई सवाल अथवा जबाब हो। दुसरी तरफ चीन का वन बेल्ट वन रोड परियोजना अति प्राचीन रेशम मार्ग पुनरूत्थान परियोजना है जबकि भारत से यूरोपीय देशों तक काॅरिडोर परियोजना एक नवसृजित विचार है। जिससे भारत, मध्य पूर्व तथा यूरोपीय देशों सहित अमेरिका व विश्व के अन्य सभी देशों को व्यापारिक लाभ होगा।

    जी २० शिखर सम्मेलन के समय देश के इंडिया नाम को लेकर जो बहस छिड़ी है वह दुर्भाग्यपूर्ण है। इंडिया का शाब्दिक अर्थ चाहे जो भी हो परंतु आज यह नाम हमारे देश की वैश्विक पहचान है। आमंत्रण पत्रों पर “प्रेजिडेंट आॅफ भारत” लिखा जाना भाषा को थोड़ा असहज स्थिति में डालने जैसा लगा। विशेषकर जब तक हमने अपना नाम नहीं बदला है तब तक दुनिया हमें उसी नाम से पुकारेगी। हमारे उसी नाम से हमारे बारे में बात करेगी। इंडिया शब्द को गुलामी का प्रतीक बताने वालों को सोंचना चाहिए हम चाहे कितने भी आतम निर्भर हो जाएँ अंग्रेजी से मुँह नहीं मोड़ सकते। इसलिए आधा हिन्दी आधा अंग्रेजी विशेषकर वैश्विक मेहमानों के आमंत्रण पत्र पर देखकर, बचपन का एक कहावत याद आ गया जो बिहार के गाँवो में बड़े बुजुर्ग अक्सर कहा करते थे।
    “कुर्ता गमछा पर पतलून आधा फागुन आधा जून”।
    व्यक्तिगत रुप से कोई कुछ भी मिश्रित पहने, कुछ भी मिश्रित बोले वह स्वतंत्र है। परंतु सांस्कृतिक रुप से यह उचित नहीं है। ऐसा नहीं होना चाहिए।

    सभी गैर अंगेजी भाषी देशों का एक अंग्रेजी नाम है। रशिया का मूल नाम रुस (Rus) था। फ्रांस का मूल नाम गौल (Gaul) अथवा फ्रांक्स था। जापानी भाषा में जापान का अधिकारिक नाम निप्पोन (Nippon) अथवा Nihon (निहोन) है। चीनी भाषा में चीन का नाम भी चोंगगुओ (Zhongguo) है। संस्कृत में हमारे देश का नाम भी भारतवर्ष है जिसे हम प्यार से भारत कहते हैं। जिस तरह उन देशों का अंग्रेजी नाम रशिया, फ्रांस, जापान, तथा चाइना है। उसी तरह हमारा नाम भी इंडिया है। इसमें परेशान होने की क्या जरुरत है। एक हीं शब्द के कई अर्थ होते हैं। हम इंडिया का अर्थ वही क्यों समझे जो डिक्शनरी में किसी और के लिए लिखा है। जब हमें पता है कि हमारे देश के लिए इंडिया शब्द का निर्माण इंडस नदी से हुआ है।
    ऐसे में सरकार यदि भारत के नाम से इंडिया हटाती है तो लाखों संस्थानों के नाम से इंडिया हटा पाना एक असंभव सबक बन जाएगा। विपक्षी दलों द्वारा अपने गठबंधन का नाम इंडिया रखने से यह समस्या शुरु हुई है। कितना अच्छा हो यदि किसी कानून के माध्यम से यह नियम बना लिये जाएँ कि कोई भी राजनीतिक पार्टियाँ अपनी पार्टी गठबंधन अथवा चुनावी नारों के लिए राष्ट्रीय प्रतीकों अथवा शब्दों का प्रयोग नहीं कर सकती। जिससे भविष्य में कभी यह समस्या हीं उत्पन्न न हो कि कल किसी राजनीतिक दल ने अपना नाम घुमा फिराकर भारत रख लिया तो हम तब क्या करेंगे?

    • आपने एकदम ठीक कहा भाी राजनन्दन सिंह जी। भारत से यूरोपीय देशों तक आठ प्रमुख देशों द्वारा रेल एवं जहाज काॅरिडोर निर्माण पर सहमति, भारत के लिए एक ऐतिहासिक और महत्वपूर्ण उपलब्धि है। इंडिया और भारत की बहस को आपने निरर्थक बताया है। हमें ऐसी बातों से आगे बढ़ जाना चाहिये। सरकार जो करने में सक्षम होगी, करेगी। आपकी टिप्पणी के लिये हार्दिक आभार।

  14. जी 20 सम्मेलन तथ्यपरक, विश्लेषत्मक, रुचिकर सम्पदकीय। इस लेख से उपयोगी जानकारी भी प्राप्त हुई. हार्दिक आभार।

  15. Your well-timed Editorial of today describes how the Pragati Maidaan has been transformed into a platform to highlight our Indian culture.
    You also mention various commendable efforts made by the present Indian Government to make the present G 20 Summit successful.
    And memorable too.
    You have also rightly mentioned how this Summit will also provide a great opportunity for India to gain global prominence.
    Warm regards
    Deepak Sharma

  16. जी -20 पर लिखा आपका संपादकीय पक्ष -विपक्ष के गहन विश्लेषण के साथ अत्यंत सारगर्भित भी है। सचमुच भारत के लिए यह गौरव का पल था। भारतीय प्रधानमंत्री ने इस अवसर पर 20 देशों के राष्ट्राध्यक्षों के सम्मुख एक पृथ्वी, एक परिवार, एक भविष्य की थीम के साथ ‘वसुधेव कुटुंबकम’ की भारतीय अवधारणा के साथ भारतीय संस्कृति से जुड़े प्रतीकों…भारत मंडपम के सम्मुख भारतीय जीवन दर्शन के प्रतीक नटराज की मूर्ति की स्थापना, मंडपम के अंदर कोणार्क के सूर्यमंदिर के चक्र, नालंदा विश्व विद्यालय तथा राजघाट पर साबरमती के आश्रम की अनुकृतियों को प्रदर्शित कर भारत के गौरव को बढ़ाया है। भारत ने इतना बड़ा आयोजन सफलता पूर्वक करके न केवल देश के सम्मान को बढ़ाया है वरन यह भी सिद्ध कर दिया है कि आज का भारत हार्दिक तरह से सक्षम है।
    जहाँ तक प्रधानमंत्री ऋषि सुनक का प्रश्न है हर भारतीय के रोल मॉडल हैं क्योंकि वह ब्रिटेन के प्रधानमंत्री होते हुए भी स्वयं को हिन्दू कहने में गर्व महसूस करते हैं।

  17. -G-20 शिखर सम्मेलन इसका विस्तृत और गहन ब्यौरा आपके संपादकीय से प्राप्त हुआ, नटराज की मूर्ति की प्रासंगिकता, प्रगति मैदान का कायापलट, ऋषि सुनक का संगीतमय आगमन, सभी राष्ट्राध्यक्षों का स्वागत साथ ही मल्लिकार्जुन खड़गे को निमंत्रण न देने का खेद…समग्रतः G-20 सम्मेलनों के प्रति गर्वानुभूति का भाव समेटे बहुत ही सुन्दर संपादकीय

  18. 10अगस्त की सम्पादकीय में भारत मंडपम और नटराज की मूर्ति में सृष्टि की भारतीय अवधारणा
    तथा शिखर सम्मेलन की थीम —
    “एक धरती ,एक परिवार, और एक भविष्य “का सटीक वर्णन है ।
    जी20 सम्मेलन का विचार और इसका भारत सरकार द्वारा प्रस्तुतिकरण से विश्व में भारत का गौरव बढ़ा है ।
    पुरवाई पत्रिका में सम्पादकीय हेतु साधुवाद
    Dr Prabha mishra

  19. भारत के गौरवमय क्षणों का एक सुनहरा अध्याय G-20 सम्मेलन, जिससे संबंधित प्रत्येक मुख्य चरणों की बानगी
    उत्कृष्ट समीक्षात्मक संपादकीय के माध्यम से आपने अपने पाठकों के समक्ष प्रस्तुत की है, जिसमें कार्यक्रम संबंधी उत्तम कार्यों व नीतियों का विश्लेषण तो है ही,साथ ही अनुचित कृत्य का भी निष्पक्ष उल्लेख है,जो आपके संपादकीय की सार्थकता और श्रेष्ठता को सिद्ध करता है। हमारे भारत ने वैश्विक नेतृत्व को ‘लोकतांत्रिक मूल्यों के मिलन बिंदु’ के रूप में साकार किया… ईश्वर सदा विश्व में भारत की महिमा को अक्षुण्ण बनाए रखें। इस सराहनीय,महत्वपूर्ण,खरी और तथ्यपरक संपादकीय के लिए आपको धन्यवाद और साधुवाद

  20. कितनी शोध के बाद आप समसामयिक संपादकीय लिखते हैं तेजेन्द्र जी। हर बार ही आपका संपादकीय इतनी नई एवं गहन सूचनाएं देता है।
    इस जी-20 के बारे में जो चित्रात्मकता प्रदर्शित हुई, महसूस हुआ मानो नटराज की मूर्ति के समक्ष एक आध्यात्मिक मनोदशा में स्थितप्रज्ञ हो गए हैं। हमारे देश की अलौकिकता के समक्ष पूरा विश्व नमन करेगा, हम अपनी संस्कृति और संस्कारों की दहलीज़ पर पुन: आ पहुँचे हैं।
    अब कुछ तो लोग कहेंगे, इस पर ध्यान देने से हमारी ऊर्जा का ह्रास ही होगा तो क्यों न सुंदर स्थितियों से आनंदित हों।
    सुंदर, सत्य, सार्थक संपादकीय हेतु बहुत साधुवाद स्वीकारें।

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