बनारसकेसमीपकस्बेसैदपुरमेंजन्मेआदरणीयश्रीज्ञानचंदमर्मज्ञजीवर्तमानमेंबेंगलुरुनिवासीहैं।शिक्षासेअभियंता,रोजगारसेउद्यमीऔरस्वाभावसेकवि– लेखकआदरणीयमर्मज्ञजीलंबेसमयसेसाहित्यसाधनामेंलीनहै, संभवहै , खूंटीपरआकाश ,मिट्टीकीपलकेंआदिउनकीचर्चितकृतियांहैं।निःसंदेहआदरणीयमर्मज्ञजी कीबहुमुखीप्रतिभाकायहसंग्रहएकओरसोपानहै। कहते है –
आरोहीकीबातकीजायेतोयहमर्मज्ञजीकेप्रतिनिधिदोहोंकासंकलनहै।जिसमेमर्मज्ञजीकीलेखनीसामाजिक, राजनीतिक,सांस्कृतिकऔरराष्ट्रीयचेतनासेसंबंधितविषयोंपरमुखरितहुईहै।मर्मज्ञजीनेइसदोहासंग्रहको२२चरणोंमेंविभाजितकरकेजीवनकीलयसेलयबद्धकर१०५मणकेरूपीअध्यायसेसमृद्धकियाहै, कुल मिलाकर प्रस्तुतदोहासंग्रहइंद्रधनुषीरंगलिएहुएहैं।उदाहणदेखिये –
मौतसंकुचितसोचहै, जीवनहैविस्तार।
चलनेकोतत्पररहे , उड़नेकोतैयार।।
बचपनलालीभोरकी, यौवनचढ़तीधूप।
सांझबुढ़ापेकाप्रहर, रातमृत्युकारूप।।
हमारी भारतीयसंस्कृतिऔरपरंपराएँएकसमृद्धऔरविविधधरोहरकाहिस्साहैं, लेखक इस परंपरा का सम्मान करते हुए आरोही काप्रथमचरणसरस्वतीवंदनासेशुभारंभकरतेहुएअंतिमचरणमृत्युसेसंग्रहकासमापनकरतेहैं।दूसरेशब्दोंमेंकहूंतोआरोहीरूपीमाला१०५रंगीनमोतियोंसेसुसज्जितहै,जिसमे जीवन के हर पड़ाव की यथार्थपरक व्याख्या निहित है । एकउदाहणदेखिये –
मर्मज्ञजीकीलेखनीसामाजिकविसंगतियों, रूढ़िवादिता, आडंबरोंपरबेबाकीसेप्रहारकरतीहै।उनकारचनासंसारव्यवहारिकताऔरप्रासंगिकताकीकसौटियोंपरखराउतरताहै।मर्मज्ञजीनेआरोहीमेंजिनविषयोंपरप्रकाशडालाहैकहींनाकहींउनमेंसंत कवियों कीझलकदिखाईदेतीहै। ऐसा लगता है कि वेयह जानते हैं कि बिहारी जैसी समाहारी शक्ति सम्पन्न भाषा, कबीर की सहजता सरलता और रहीम जैसी नीति परकता दोहों को जीवंत बनाती है। एकउदाहणदेखिये –
कभीकिसीकेस्वप्नमें,नहींलगानाआग।
पानीसेमिटतेनहीं, ऐसेगहरेदाग।।
ऐसाअक्सरहोताहै, किजिसविशेष–क्षेत्रसेरचनाकारकासंबंधहोताहै, वहसंकोच रहितहोकरउसकेज्ञानकाउपयोगकरताहै।अपनीवर्गीयचेतनाकोदोहा बध्दकरतेसमयदोहाकारआंचलिकताकोमहत्वदेताहै। लेकिन ऐसा लगता है कि वे यह भी जानते हैं कि उन्हें दोहों की परिमाणात्मकता की अपेक्षा उसकी गुणात्मक प्रभावोत्पादकता पर ध्यान केन्द्रित करना चाहिए और इसी में दोहा तथा दोहा कार की सफलता सन्निहित है। दोहा कारमर्मज्ञजीभाषाऔरछंदकेप्रतिसंवेदित औरजीवनकेप्रतिसदाशयीनज़रआतेहैं, कुलमिलाकरउन्होंने इस संग्रह में अपनेकुल–धर्मकापालन किया है। एकउदाहणदेखिये –