Sunday, July 21, 2024
होमकवितारश्मि लहर के दोहे

रश्मि लहर के दोहे

घट-घट में वे हैं छिपे, मनु ढूँढे चहूँ ओर।
लीला अद्भुत रच रहे, मेरे माखन -चोर।।
बूढ़ी होती उॅंगलियाँ, थर-थर काँपे हाथ।
ऑंखें उनको ढूँढतीं, छोड़ गए जो साथ।।
दुहिता चुनती पथ नया, कहती किसका कौन?।
खौलन मचती पेट में, माँ  बेबस है मौन।।
लम्बा-सूना पथ दिखे, भीगा ऑंचल-कोर।
ममता हारी स्वार्थ से,   चिंतित घर का छोर।।
उलझन देती शिष्टता, सकुचाते अनुबन्ध।
सम्बन्धो को चीरता, वैचारिक प्रतिबन्ध।।
जाने कब बच्चे बने, आस्तीन के साँप।
पाकर उर-आघात कटु, पिता रहे हैं काँप।।
पिता निहारें पुस्तकें, बात करें चुपचाप।
शून्य ताकती मातु का, घटता कब संताप?
प्रतिद्वंदी हर ओर हैं, अपनापन है लुप्त
प्रेम प्रदर्शन हेतु अब, कहां समय उपयुक्त
आती-जाती हर लहर, देती जीवन-ज्ञान।
मात-पिता की छाँव में, मिलता हरपल मान।।
बदल रही है चेतना,  बदली पीढ़ी देख।
रखकर तेरे वक्ष पर,  चढ़ते सीढ़ी देख।

रश्मि लहर
संपर्क – [email protected]
RELATED ARTICLES

2 टिप्पणी

कोई जवाब दें

कृपया अपनी टिप्पणी दर्ज करें!
कृपया अपना नाम यहाँ दर्ज करें

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

Most Popular

Latest