डॉ जमुना कृष्णराज की नई पुस्तक ‘अव्वैयार की अमृतवाणी’ का लोकार्पण केन्द्रीय हिंदी संस्थान, आगरा के भव्य सभागार में वैष्णव भक्ति साहित्य पर आयोजित तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी के दौरान फरवरी 19 के उद्घाटन समारोह के दौरान हुआ। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि थे आर एस एस के प्रमुख डॉ कृष्ण गोपाल।
संस्थान के पूर्व अध्यक्ष डॉ नंद किशोर पांडेय एवं वर्तमान अध्यक्ष डॉ सुनील कुलकर्णी भी इस विमोचन कार्यक्रम में शामिल थे। डॉ जमुना कृष्णराज को उनकी इस पुस्तक के लिए कांची शंकराचार्य श्री विजयेन्द्र सरस्वती स्वामी ने अपने आशीर्वचन से अनुग्रहीत किया है। यही नहीं, 98 साल के महापुरुष स्वतंत्रता सेनानी, समाज सेवी प्रकांड पंडित एवं तमिलनाडु के पूर्व स्वास्थ्य मंत्री बने डॉ एच वी हंडे का भी इन्हें आशीर्वचन प्राप्त हुआ है। डॉ जमुना कृष्णराज ने अपनी इस पुस्तक को अपने माता-पिता एवं गुरु को समर्पित किया है।
संगम काल की तमिल कवयित्री अव्वैयार की संपूर्ण कृतियों का अनुवाद इस पुस्तक में उपलब्ध है।
मथुरा के जवाहर पुस्तकालय से प्रकाशित 300 पृष्ठों की इस पुस्तक का मूल्य रु. 350/- है।
भक्ति मार्ग, योग मार्ग और नीति मार्ग के दोहों और कथाओं से ओत-प्रोत यह पुस्तक निश्चय ही पाठक वर्ग के लिए ज्ञानवर्धक एवं शिक्षाप्रद होगा – इसमें दो राय नहीं हो सकती। हार्ड-बाउंड एडिशन की इस पुस्तक का आवरण भी आकर्षक बना पड़ा है। इस पुस्तक के माध्यम से तमिल भाषा की प्राचीन संस्कृति और साहित्य के कुछ अंशों को उत्तर भारत तक पहुंचाने के लिए डॉ जमुना कृष्णराज का यह एक और उत्तम प्रयास है।
केंद्रीय हिंदी संस्थान, आगरा में आयोजित वैष्णव भक्ति साहित्य की इस संगोष्ठी में प्रतिभागिता कर डॉ जमुना कृष्णराज ने तमिल वैष्णव भक्ति संत नम्मालवार पर अपना प्रपत्र प्रस्तुत किया और इसके लिए वे सम्मानित भी हुईं।
