जब मुंबई की
कामकाजी महिलाएं,
कल्याण से सुबह 08:09 की
लेडीज स्पेशल पकड़ती हैं,
तो उनके बैग में केवल भाजी-चपाती,
पानी की छोटी बोतल, रुमाल, लिपस्टिक,
कंघा, नैपकिन, प्रतिदिन की दवाईयां,
मोबाइल, चार्जर, आई कार्ड, एटीएम कार्ड,
घर-ऑफिस की चाबियां और
सेनेटरी नैपकिन ही नहीं होते……………….
बल्कि होती हैं…………………….
ढेर सारी चिंताएं, आशंकाएं,
पीड़ाएं, कुंठाएं, अतृप्त इच्छाएं, चेष्टाएं,
कराहें, चीत्कारें, मन्नतें, मिन्नतें ,
कोशिशें एवं असफलताएं……………..
देर से सोने एवं सुबह जल्दी उठने की त्रासदी,
देर तक निचोड़ी जाती देह का दर्द,
बिटिया का रह गया अधूरा होमवर्क,
बेटे का भूला हुआ कंपास,
संभ्रमों की पोटली,
कि कहीं गैस का नॉब तो नहीं खुला रह गया ?
गीज़र बंद किया या नहीं ?
पालनाघर वाले बिटिया को दवाई देंगे या नहीं ?
बेटा कहीं आज भी चोटिल होकर घर तो नहीं आएगा न ?
ठीक से ताला खोल पाएगा न ?
शाम को जब वे थकी-हारी,
गन्ने सी निचुड़ी ,
तनाव से सिकुड़ी,
पीड़ा से जकड़ी ,
05:25 की कल्याण फास्ट पकड़ती है तो
उदासी के टुकड़े पत्थर बनाकर सीने में दबा लेती हैं और
बैग में भर लाती है बड़े बाबू की डांट……………
” रोज़ देरी से आती हो !
यही तो तुम महिलाओं में कमी है ………….
फिर हर महीने छुट्टी भी चाहिए। ”
यह नहीं देखते कि वे काम कितना कर लेती हैं……..
घर और दफ्तर दोनों का।
लौटते समय उनके बैग में होती हैं………….
पुरुष सहकर्मियों की
लोलुप निगाहों की चुभन
पूरे शरीर का एक्सरे करती
लिफ्टमैन की पारदर्शक निगाहें
चलित सीढ़ियों (एस्केलेटर) पर
चढ़ते- उतरते येन-केन प्रकारेण
नारी देह का स्पर्श-सुख पा लेने की
सप्रयास की गई
निष्प्रयास सी दिखाई जाती हरकतें……….
मुझे उस अच्छे दिन की प्रतीक्षा है
जब आते-जाते समय
उनके बैग में
भाजी-चपाती के खाली डिब्बे,
पानी से भरी छोटी बोतल,
पसीने से गंधाते छोटे रुमाल,
वेतन की तरह खर्च हो रही लिपस्टिक,
तेल से चिकटाए कंघे,
गीले से नैपकिन,
प्रतिदिन ली जाने वाली दवाईयों के छिद्रदार पत्तों,
मोबाइल, चार्जर, एटीएम कार्ड,
घर-ऑफिस की चाबियों एवं
सेनेटरी नैपकिन के अलावा
कुछ नहीं होगा……….
कुछ नहीं होगा……….
डॉ. विपिन पवार
जन्म 6 सितंबर 1963 इटारसी (म.प्र)
हिन्दी में एमए स्वर्ण पदक सहित । साथ ही मराठी, अँग्रेजी पर समान अधिकार ।
आधा दर्जन के करीब किताबों का प्रकाशन, जिसमें प्रमुख हैं, शब्दों के परे, अक्षरों की मेरी दुनिया (दोनों निबंध संग्रह) पीली रोशनी का समंदर (कहानी संग्रह) । इसके अलावा रेलवे से जारी अधिकांश पत्रिकाओं का, लगातार 35 वर्षों तक संपादन कार्य ।
‘वागर्थ’ में अनूदित कविताएं तथा ‘हिंदुस्तानी जुबान’ में अनूदित कहानी का प्रकाशन।
आकाशवाणी भोपाल, इंदौर एवं नागपुर से रचनाओं का प्रसारण।
सम्मान- 1. हिंदी अकादमी, मुंबई का प्रतिष्ठित वरिष्ठ हिंदी सेवी सम्मान।
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अखिल भारतीय हिंदी साहित्य सभा, अमरावती द्वारा निबंध संग्रह- अक्षरों की मेरी दुनिया के लिए चिंतामणि सम्मान।
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निर्मला स्मृति हिन्दी साहित्य रत्न सम्मान, हरियाणा I
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नेपाल भारत साहित्य महोत्सव-2024, पोखरा, नेपाल में अंतरराष्ट्रीय नेपाल भारत साहित्य रत्न अवॉर्ड से विभूषित I
