Sunday, July 21, 2024
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आशीष मिश्रा की कविता – नव वर्ष

फिर आयी है नयी जनवरी
उम्मीदों की नयी-सी डोरी।
फिर आएगा वैलेंटाइन
छोटे क़द की एक फ़रवरी।।
फाल्गुन का रंगीन मास
होली वाला मस्त मार्च।
अप्रैल का है अपना चार्म
रामनौमी वाले मेरे राम।
धीरे-धीरे आ गई मई
गर्मी आ गई देखो भई।
आधा साल भी बीत गया
तपती धरती जून गया।
जुलाई लिए बरसात आगमन
रिमझिम वाला भीगा सावन।
फिर आएगा महीना आठ
बहन-भाई का राखी हाथ।
जन्माष्टमी सितंबर में
तीज़ त्योहार के अंबर में।
फिर अक्टूबर में दुर्गा पूजा
जलेगा रावण फिर से दूजा।
नवम्बर की है अलग बड़ाई
मतलब कि दिवाली आयी।
अंतिम महीना आया बस
बोलो भैया मैरी क्रिसमस।
बारह महीने का अंतराल
कई उत्तर हैं, कई सवाल।
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