होमकवितामातृ दिवस पर विशेष : शैलजा सिंह की कविता कविता मातृ दिवस पर विशेष : शैलजा सिंह की कविता By शैलजा सिंह May 10, 2020 0 501 Share FacebookTwitterPinterestWhatsApp माँ… याद तुम्हारी आई जब जब आंख मेरी भर आई तब तब जो दीप जलाए संस्कार के उसको मैंने जगमग रखा। अंधकार को किया तिरस्कृत उजियारे में हर पग रखा। अल्हड़ जीवन के वसंत सब पार किए और बड़ी हो गई। डगमग कदमों से चल चल अब अपने पैरों पर खड़ी हो गई। मां तुमने ही तो सिखलाया रिश्तों को कैसे सीना है। राई राई पर्वत पर्वत दुनिया में कैसे जीना है। मां बस तू ही मेरी कमाई। बेटी हूं तो क्या हुआ मुझको अब न समझ पराई।। बेटी ही तो होती है माँ की निकट सहेली जहां कहीं हो बेटे केवल उस घर में मां रहे अकेली।। Share FacebookTwitterPinterestWhatsApp पिछला लेखसंपादक के नाम पत्रअगला लेखप्रतिशोध : राष्ट्रप्रेम की अद्भुत मिसाल शैलजा सिंह RELATED ARTICLES कविता रितेश ऽ निगम की कविता – यादों के तार February 8, 2026 कविता कमलेश कुमार दीवान की नज़्म – ओ दस्तगीर February 8, 2026 कविता चित्रा देसाई की कविताएँ February 8, 2026 कोई जवाब दें जवाब कैंसिल करें टिप्पणी: कृपया अपनी टिप्पणी दर्ज करें! नाम:* कृपया अपना नाम यहाँ दर्ज करें ईमेल:* आपने एक गलत ईमेल पता दर्ज किया है! कृपया अपना ईमेल पता यहाँ दर्ज करें वेबसाइट: Save my name, email, and website in this browser for the next time I comment. Δ This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed. Most Popular कविताएँ बोधमिता की November 26, 2018 कहानीः ‘तीर-ए-नीमकश’ – (प्रितपाल कौर) August 5, 2018 अपनी बात…… April 6, 2018 पुस्तक समीक्षा – डॉ अरुणा अजितसरिया एम बी ई April 6, 2018 और अधिक लोड करें Latest रितेश ऽ निगम की कविता – यादों के तार February 8, 2026 कमलेश कुमार दीवान की नज़्म – ओ दस्तगीर February 8, 2026 दिलीप कुमार का व्यंग्य – माफी की दुकान February 8, 2026 डॉ मुकेश असीमित का व्यंग्य – हुक्का-वार्ता February 8, 2026 और अधिक लोड करें