Sunday, July 21, 2024
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सुमन शर्मा की कविता – बरसो मेघा

बरसो मेघा अनराधार,
बरसो बन धरा का प्यार,
माटी की सौंधी ख़ुशबू से,
अमीरस बरखा बरसे गगन से,
तन मन हो जाये गुलज़ार।
बरसो रे मेघा अनराधार।
मोती सम बूँदें जब बरसें,
छमछम की तान पर लरजें,
घनघोर घटाएँ,बादल गरजें,
प्रिय मिलन को मन ये तरसे,
विरही मन तु न हो बेक़रार,
बरसो मेघा बन बेशुमार प्यार,
बरसो बरसो अनराधार।
मदमस्त पवन के झौंके आयें,
धरती का आँचल लहरायें,
नाचे मोर,पपीहा करे पुकार,
प्यासा चातक करे इंतज़ार,
बरसो बरसो लगातार,
बरसो रे मेघा अनराधार।
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