Wednesday, February 11, 2026
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शन्नो अग्रवाल की कविताएँ

1.प्यार की बूँद
हम अक्सर ही भावुक हो जाते हैं
प्यार की कोई बूँद अगर गिरती है
हम उसमें ही भीग जाते हैं।
छोड़कर वह महकता सा चमन अपना
यहाँ एक तितली सी बन मैं उड़ आई
उसकी माटी की आई है याद बहुत
दिल की बस्ती में बसती है तन्हाई।
अपने को भूलकर अपनों के लिये
वक़्त के दरिया में हम बहते रहे
फूल मिले तो साथ में काँटे भी
गले लगा के हम सभी को जीते रहे।
अब भी क्यारी में वह महकता बेला
बड़ा आँगन, खुली छत सब याद आते हैं
याद आता है बसंत व सावन का मौसम
तो चार आँसू हम बैठ कर बहाते हैं।
हम अक्सर ही भावुक हो जाते हैं
प्यार की कोई बूँद अगर गिरती है
हम उसमें ही भीग जाते हैं।
2.’चंद्रमुखी हुई दुःखी’
नाम था उनका चंद्रमुखी
एक दिन गयीं पति से रूठ
कुछ कपड़े-लत्ते साथ लिये
निकल पड़ीं लेकर संदूक।
इसरो से जाकर की विनती
तो भेज दिया उन्होंने यान
टिकिट कटाया चंद्रमुखी ने
और लंबी भरी एक उड़ान।
मन में थे उनके ढेरों सपने
और चेहरे पर थी मुस्कान
निकल पड़ीं वह दूर टूर पर
लेकर साथ में कुछ सामान।
चाँद की धरती पर जब उतरीं
तो पहुँची रोवर के पास
बड़े प्यार से पूछा “भइया
कोई जगह यहाँ है खास?
अरमान बड़ा था आने का
जो मिला नहीं वह पाने का
मुझे सवारी समझ घुमा दो
क्या होगा किराया घुमाने का?
कुछ फ़ेमस जगहों को पहले
आराम से मुझे दिखाना
कोई होटल-वोटल हों रहने को
उनके भी नाम बताना।”
सुनकर रोवर हो गया स्टार्ट
धीमी-धीमी सी थी चाल
पर रस्ते के कंकड़-पत्थर सब
चंद्रमुखी पर दिये उछाल।
न होटल मिले न शॉपिंग माल
न हवा, न पानी, न स्टाल
ऊपर-नीचे धक्के खाकर
हुआ चंद्रमुखी का बुरा हाल।
न इंसान दिखे, न अन्य जीव
न फूल वहाँ न खर-पतवार
इसरो को किया मैसेज तत्काल
“धरती पर लो अब मुझे उतार”।
डर के मारे चन्द्रमुखी की
हालत होने लगी खराब
एलियन से मिलने का अब
टूट चुका था उनका ख़्वाब।
जब दूर के ढोल सुहाने लगते
तब अपने भी अनजाने लगते
तस्वीर पास जाकर देखो तो
लोग अच्छे वही पुराने लगते।
3.’नानी और बालकनी’
सूरज की किरणें आकर
बालकनी के पौधों को
सहला रही हैं
वहाँ एक कुर्सी पर नानी
आकर बैठ जाती है
यह बालकनी उसका
छोटा सा जहान है।
हवा में सिर हिलाते
पौधों को देखते हुये
उसे झपकी आ जाती है
वह जैसे उड़ने लगती है
बीच में वह है
नीचे धरती और
ऊपर आसमान है।
तभी कान में कोई
आवाज आती है
”नानी अंदर आ जाओ
गर्मी में खाल जल जाती है”
नानी मुस्कुरा कर
उसके कान खींचती है
”चल हट तू बड़ी शैतान है।
सुनहरी धूप सभी को
रास आती है
तू बड़ी नादान है
विटामिन डी के सेवन से
कुछ बीमारियाँ
चली जाती हैं
वह तो त्वचा की जान है”।
शन्नो अग्रवाल (ब्रिटेन)
मोबाइल – +44 7871 113994
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5 टिप्पणी

  1. बहुत सुंदर, रोचक अंदाज में आपकी गंभीर कविताए भी मन को गहरे तक प्रभावित करती हैं।चंद्रमुखी रचना में सुंदर परिकल्पना की है आपने ,सचमुच अपनी धरती पर अपने लोगों के बीच जो सुख है, वह कहीं नहीं है। बालकनी में धूप की उष्मा के बीच नानी का पौधों के साथ समय बिताना,उनसे बातें करना अभिभूत करता है।बहुत बहुत बधाई दी,,,पद्मा मिश्रा-जमशेदपुर

  2. बेहद सार्थक,रोचक और सुखकर लगने वाली कविताएं।
    चंद्रमुखी कविता बड़ी ही सहज और लीक से हटकर रचना लगी।कहावत का बखूबी इस्तेमाल।
    मुबारक हो।

  3. पुरवाई के इस अंक में शन्नो जी की तीन कविताएं प्रकाशित हुई हैं। तीनों ही कविताएं अलग-अलग मिजाज की है। ‘प्यार की बूंद’ कविता में कवयित्री का कवि हृदय प्रेम की बूंदों से भावुक हो जाता है। इस कविता में प्रेम सर्वत्र व्याप्त है। यादों में तो दिखता ही है इसके साथ ही जहां -जहां से जीवन गुजरा है वहां-वहां प्रेम के छींटे दिख जाते हैं। वह चाहे घर आंगन हो, बाग उपवन हो या महकता हुआ वसंत हो। प्रेम में सुख-दुख दोनों समाहित होते हैं, दोनों का अपना महत्व होता है। इसीलिए तो कवयित्री ने फूलों के साथ कांटों को भी गले लगाया है। यह कविता कवयित्री के मिजाज से अलग थोड़ी सी गंभीर कविता है।
    ‘चन्द्रमुखी हुई दुखी’ कविता भारत की उपलब्धि चन्द्रयान मिशन को आधार बनाकर हास्य के रूप में लिखी गई है। इस रचना में कवयित्री ने जिस कल्पना का सहारा लिया है वह अद्वितीय है। मन है, कहां तक पहुंच जाए कुछ कहा नहीं जा सकता है। चन्द्रमुखी रोवर पर सवारी करने चली गई। लेकिन वहां की हालत देखी तो उसके सारे अरमान धूलधूसरित हो गए। कल्पना की ऊंची उड़ानें भी कम मौजू नहीं होती है। इस कविता में कवयित्री का बिंदास अंदाज साफ झलकता है। वे इसके लिए जानी भी जाती हैं।
    तीसरी कविता नानी को लेकर रची गई है। बच्चों के लिए नानी सबसे बेहतरीन आसरा होता है। बच्चे उससे अपनी हर बात कह लेते हैं। मजाक करना तो जैसे नानी के हिस्से आया हो। नानी की खाल धूप में झुलस न जाए इसलिए नाती नातिन उसे छाया में बैठने को कहते हैं। पर नानी सयानी है। उसे बुद्धू नहीं बनाया जा सकता है। वह जानती है कि धूप सेंकने से विटामिन डी प्राप्त होती है। इस कविता को भी शन्नो जी ने अपनी मौज में, पूरी मस्ती में लिखी हुई है। संपादक जी एवं कवयित्री दोनों को बहुत बहुत बधाई।

  4. वैसे तो आपको अक्सर ही पढ़ते हैं।कविताएँ बनाना आपके बाएँ हाथ का खेल है शन्नो जी! पर इन संग्रहित कविताओं की बात ही अलग है। प्यार की बूँद कविता बहुत ही मासूम सी माधुर्य भाव से ओतप्रोत कविता है। माधुर्य भाव में करुणा, मर्मस्पर्शिता व आत्मीयता का समायोजन होता है। इसीलिए यह भाव दिल के बड़े करीब रहता है। लड़कियाँ जब अपना बसेरा छोड़ कर आती हैं और दूसरा घर बसाती हैं तो वह खुशबू उनके साथ ही रहती है। स्मृतियाँ गाहे-बगाहे दस्तक देती रहती हैं। आपकी प्यार की बूंदों की कुछ छिड़कन हम तक पहुँची!वह आर्द्रता महसूस हुई।
    दूसरी कविता चंद्रमुखी अच्छी कल्पना है चंद्रमा में घूमने की। इसके लिए तो बस एक ही बात कही जा सकती है- *बिना विचारे जो करे,सो पाछे पछताए* और फिर *लौट के बुद्धू घर को आए* वैसे कल्पना की उड़ान अच्छी है। बिना पैसे के घूमने में क्या बुराई!!!
    तीसरी कविता ‘नानी और बालकनी’ बहुत अच्छी लगी। नानी से बच्चों का बहुत लाड़ रहता है।नानी बच्चों की जिगरी सहेली की तरह होती हैं। ढलती उम्र में हल्की सी ठंड भी बर्दाश्त नहीं होती है। नानी का बालकनी में बैठना और विटामिन डी की बात करना मन को भा गया।
    बेहतरीन कविताओं के लिये आपको बहुत- बहुत बधाइयाँ।

  5. आदरणीया शन्नो जी
    पुरवाई में प्रकाशित आपकी तीनों कविताएं अभी-अभी पढ़ीं। वास्तव में आपने बड़े सहज ढंग से सरल शब्दों में अपनी ‘मनकही’ को उद्घाटित कर दिया है। जिंदगी के अनेक रंग बिखरे पड़े हैं आपकी इन रचनाओं में।
    बधाई स्वीकारें।

    डॉ० रामशंकर भारती

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