Monday, July 22, 2024
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‘हिंदी ना उर्दू, हिंदुस्तानी भाषा का शायर हूं मैं’ अनुभूति की आठवीं ‘संवाद शृंखला’ में बोले डॉ.बी.एस. सुमन अग्रवाल

‘शेरो-शायरी की तरफ मुखातिब नहीं हुआ जाता है, यह तो बस प्रभु की देन होती है। बचपन में बुखार में कराहते  हुए पहली बार हरियाणवी में कविता लिखी। फिर कॉलेज की मैगजीन में  पहली कविता छपी। काव्य लेखन का सफर हिंदी से शुरू हुआ पर जब बाद में उर्दू सीखी तो ग़ज़ल में रुझान बढ़ता गया ।ग़ज़ल,नज्म, कविताएं आदि लिखी हैं मैंने और पिछले कुछ साल से आलेख भी अब लिखने लगा हूं। समस्त शिक्षा भिवानी में हुई और उसके बाद व्यवसाय के सिलसिले में सन 1978 से चेन्नई आया और यहीं का होकर रह गया। ‘साहित्य, कला और संस्कृति की एकात्म  संस्था अनुभूति द्वारा आयोजित मेरी सृजन यात्रा के अंतर्गत संवाद शृंखला में डॉ. बी.एस.सुमन अग्रवाल ने सूत्रधार डॉ सुनीता जाजोदिया से संवाद के दौरान यह कहा।
उन्होंने यह भी कहा कि कविताएं दो तरह की होती हैं एक दिल से लिखी जाती है और एक दिमाग से। मां सरस्वती की कृपा से मैंने दिल से लिखा है और जब भी मेरे अंदर से शेर उपजते, चाहे दिन हो या रात ,मैं उन्हें जैसा भी कागज मिले उस पर लिख दिया करता था। कविता लिखने का फन दादा जी से  विरासत में मिला। बड़े भाई साहब डॉ महेश नक्श मेरे गुरु थे जो मेरी कविताओं को सुधारा करते थे।। बाद में उनके गुरु  मेरे भी गुरु बन गए। नई पीढ़ी को संदेश देते हुए आपने कहा कि गुरु अवश्य बनाना चाहिए और जो भी लिखें  दिल से लिखें, बिंदास लिखें।
आपकी कृति ‘लम्हों का दरिया’ 3636 अशआर वाली सबसे लंबी गजल है।
मुझको महसूस करके देख(उर्दू और हिंदी संस्करण) लम्हों का दरिया, पलकों पर उतर आओ, एक सफर और (स्वर्गीय धर्मपत्नी रेखा अग्रवाल पर स्मृति ग्रंथ) आपकी प्रकाशित पुस्तकें हैं।  तमिलनाडु हिंदी साहित्य अकादमी ने  वर्ष 2016में आपको हिंदी सेवा के लिए सम्मानित किया था।
आप साहित्य संगम और बज़्म  ए अदब संस्थाओं के संस्थापक हैं।
आपने अपनी गजलें भी सुनाई,यथा-
कमरा खोला तो आँख भर आईं,
ये जो ख़ुश्बू है,  जिस्म था पहले ।
वो सच्चा असल  में है दोस्त तेरा
जो तुझको आईना दिखा रहा है।
फरिश्ता उसको कहना है मुनासिब
जो गम ले के मुहब्बत बांटता है।
कभी इस ज़िन्दगी में ये करिश्मा क्यूँ नहीं होता
मैं हर दिन जाग तो जाता हूँ, ज़िंदा क्यूँ नहीं होता
आगे निकल गए सभी चूहों की दौड़ में
ये सिरफिरों की दौड़ है, मैं दौड़ता नहीं
फसादों में मरे हैं कितने बच्चे
कहँ मजहबपरस्तों को  पता है
इस अवसर पर ‘तपता सूरज’ विषय पर आयोजित अनुभूति की मासिक काव्य गोष्ठी में अनुभूति के कवियों ने अपनी रचनाएं सुनाकर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध किया। इन कवियों के नाम हैं – गौतम चंद बोहरा, बी.एल आच्छा ,नीलम सारडा, तेजराज गहलोत, शकुंतला करनानी, सुनीता जाजोदिया ,संतोष बिसानी, आकांक्षा बरनवाल, रेखा राय और उषा टिबडेवाल।
उपाध्यक्ष  श्री विजय गोयल ने  डॉ.बी.एस.सुमन अग्रवाल का अंगवस्त्रम से सम्मान किया। अध्यक्ष श्री रमेश गुप्त नीरद ने  स्वागत भाषण  दिया । महासचिव शोभा चौरडिया ने प्रार्थना से कार्यक्रम का शुभारंभ किया। सरिता वाघमार ने काव्य गोष्ठी का सफल संचालन किया।सचिव डॉ.सुनीता  जाजोदिया के धन्यवाद ज्ञापन के पश्चात राष्ट्रगान के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।
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