श्री लक्ष्मण प्रसाद आचार्य, राज्यपाल असम ने किया समारोह का उद्घाटन
कुलपति प्रो. सोमा बंद्योपाध्याय ने किया समारोह का समापन
30 मई 1826 को कोलकाता से प्रथम बार प्रकाशित हिंदी के प्रथम समाचार पत्र ‘उदन्त मार्तण्ड’ ( संपादक : पंडित जुगल किशोर सुकुल) के द्विशताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में ‘भारत : साहित्य एवं मीडिया महोत्सव’ के दो दिवसीय समारोह (30 व 31 मई 2025) का दिनांक 30 मई 2025 को कोलकाता के प्रतिष्ठित भारतीय भाषा परिषद के सभागार में असम के राज्यपाल महामहिम श्री लक्ष्मण प्रसाद आचार्य द्वारा उद्घाटन किया गया। विश्रुत विद्वानों और सुधी साहित्यकारों आचार्य विष्णुकांत शास्त्री और डॉ.कृष्ण बिहारी मिश्र को समर्पित यह समारोह भारतीय भाषा परिषद, कोलकाता; उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान, लखनऊ; केंद्रीय हिंदी संस्थान, आगरा कथा काशी-वाराणसी विरासत फाउंडेशन, वाराणसी के संयुक्त तत्वाधान में आयोजित किया गया।
राज्यपाल महोदय ने दीप प्रज्वलित कर समारोह का उद्घाटन किया। अपने उद्बोधन में महामहिम राज्यपाल ने ‘उदन्त मार्तण्ड’ के प्रकाशन को ऐतिहासिक कदम बताया। उन्होंने कहा कि वह एक भाषिक प्रयोग भर नहीं था, बल्कि भारतीय जनमानस की चेतना को जगाने का साहसिक प्रयास था। द्विशताब्दी वर्ष का यह आयोजन विगत 200 वर्षों की विचारधारा, प्रतिबद्धता और संघर्ष की यात्रा का स्मरण है, जिसने हिंदी को पूरे भारत में एक आंदोलन बना दिया।
उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता करते हुए काशी-वाराणसी विरासत फाउंडेशन के कार्यकारी अध्यक्ष प्रो. राम मोहन पाठक ने कहा कि कोलकाता पत्रकारिता की भाव- भूमि रही है। आज हमारे सरोकार बदल रहे हैं ऐसे में पत्रकारिता के जो सनातन मूल्य हैं, उस विरासत के संरक्षण का नई पीढ़ी पर दायित्व है।
उद्घाटन सत्र को डॉ. प्रेम शंकर त्रिपाठी, डॉ. हरि प्रसाद कानोड़िया ,डॉ. अमिता दुबे, शरद कुमार त्रिपाठी और घनश्याम सुगला ने भी संबोधित किया। धन्यवाद ज्ञापन श्रीमती सुषमा अग्रवाल ने किया।
इस सत्र में राज्यपाल महोदय द्वारा 12 विशिष्ट अतिथियों को ‘सेवा सम्मान’ से सम्मानित किया गया तथा चार पुस्तकों का लोकार्पण भी किया गया। समारोह में महामहिम राज्यपाल की जीवन संगिनी श्रीमती कुमुद आचार्य तथा भारतीय भाषा परिषद के आशीष झुनझुनवाला की विशेष उपस्थिति रही।
सत्र का शुभारंभ पत्रकार व गायक ओम प्रकाश मिश्र द्वारा निराला की वाणी वन्दना और आचार्य विष्णुकांत शास्त्री के गीत के गायन के साथ हुआ। इस सत्र का संचालन पत्रकार अरविंद मिश्रा ने किया।
उद्घाटन सत्र के बाद के विमर्श सत्र में विगत दो सौ वर्षों की हिंदी पत्रकारिता पर गहन विचार-विमर्श और मंथन किया गया। ‘उदन्त मार्तण्ड की विरासत और हिंदी पत्रकारिता की विकास यात्रा- वर्तमान और भविष्य’ & ‘हिंदी पत्रकारिता की हिंदी भाषा और साहित्य के विकास में भूमिका और योगदान’ विषयक संयुक्त सत्र की अध्यक्षता डॉ. प्रेम शंकर त्रिपाठी ने की तथा संचालन हिमांशु उपाध्याय ने किया।
इस संवाद एवं चर्चा-सत्र का मुख्य वक्तव्य नवभारत टाइम्स, दिल्ली के पत्रकार चंद्रभूषण ने दिया। इस सत्र को ‘सोच-विचार’ (वाराणसी) के संपादक नरेंद्र नाथ मिश्र, डॉ. किंशुक पाठक (भटिंडा), ऋषिकेश राय, डॉ. रेशमी पांडा मुखर्जी, डॉ. दीक्षा गुप्ता, डॉ. दिव्या प्रसाद, विवेक तिवारी, डॉ अमिता दुबे (लखनऊ), प्रो. अम्बरीष सक्सेना (सार्क विश्व विद्यालय, दिल्ली )एवं पुरुषोत्तम तिवारी ने संबोधित किया।
अपने अध्यक्षीय वक्तव्य में डॉ. प्रेम शंकर त्रिपाठी (कोलकाता) ने प्रभावपूर्ण शैली में यह बताया कि पहले अभाव के बावजूद पत्रकारिता का प्रभाव दिखाई देता था। आज पत्रकारिता में भी तमाम सुख सुविधा और संपन्नताएं हैं लेकिन उसका वैसा प्रभाव नहीं दिखाई देता है।
आज के तीसरे और अंतिम सत्र के रूप में ‘छपते-छपते’ अखबार के संस्थापक विश्वंभर नेवर के साथ दूरदर्शन के सेवानिवृत्ति अधिकारी एवं पत्रकार स्नेहाशीष सूर का महत्वपूर्ण संवाद-सत्र आयोजित किया गया। नेवर ने कहा कि प्रतिरोध एवं प्रतिकार पहला सिद्धांत है पत्रकारिता का।
‘उदन्त मार्तण्ड’ के द्विशताब्दी समारोह के दूसरे और अंतिम दिन 31 मई 2025 को भारतीय भाषा परिषद,कोलकाता के सभागार में जुटे पत्रकारों, साहित्यकारों और बुद्धिजीवियों ने भाषाई पत्रकारिता तथा हिंदी पत्रकारिता के साथ उसके संबंधों और अंतर्संबंधों पर दो सत्रों में गहन विचार-विमर्श किया। प्रथम सत्र की अध्यक्षता डॉ. अंजनी कुमार झा(मोतिहारी) ने तथा दूसरे सत्र की अध्यक्षता प्रो. अंबरीष सक्सेना ने की। दोनों सत्रों का संचालन क्रमशः डॉ.अभिषेक मिश्र (प्रयागराज)व संजीव पांडेय (मुंबई)ने किया।
प्रथम सत्र में पांच शोधकर्ता छात्रों ने अपने पर्चे पढ़े। इस सत्र को संबोधित करने वालों में डॉ. परमात्मा कुमार मिश्र,डॉ. अलीम अहमद खान, डॉ. चंदन कुमार गोस्वामी, डॉक्टर सुष्मिता बाला , डॉ. सौरभ गुप्ता, डॉ. अनुराधा गोस्वामी, डॉ. विनय कुमार सिन्हा, डॉ.अरुण कुमार, डॉ. रंजन सिंह ने भी अपने विचार रखे।
सत्र के अध्यक्षीय भाषण में डॉ. अंजनी कुमार झा ने कहा कि स्वतंत्रता की लड़ाई में भारतीय भाषाई पत्रकारिता का बड़ा महत्वपूर्ण योगदान रहा है।
समापन सत्र के पूर्व ‘भारतीय भाषाई पत्रकारिता : मिशन से व्यवसाय, व्यापार तक’ विषय की अध्यक्षता करते हुए प्रो. अम्बरीष सक्सेना ने कहा कि भाषा एक जरूरी माध्यम है परन्तु विचार भी महत्वपूर्ण है। तमाम समस्याओं के साथ-साथ संभावनाएं भी हैं।
इस सत्र के वक्ताओं में प्रमोद कमल, जयप्रकाश मिश्र, डॉ. नाजी हातू काकोटी बरुआ ,अनुराग मिश्र, नूतन अग्रवाल , विवेक तिवारी आदि शामिल थे।
समारोह के समापन सत्र की अध्यक्षता महाराष्ट्र राज्य हिंदी अकादमी, मुंबई के अध्यक्ष रह चुके डॉ. शीतला प्रसाद दुबे ने की। इस सत्र में मुख्य अतिथि के रूप में बाबा साहब अंबेडकर शिक्षक प्रशिक्षण विश्वविद्यालय, कोलकाता की कुलपति प्रोफेसर सोमा बंद्योपाध्याय की महत्वपूर्ण उपस्थिति रही। सत्र को संबोधित करते हुए प्रो. सोमा बंद्योपाध्याय ने कहा कि प्रिंट मीडिया की विश्वसनीयता आज भी कायम है। उन्होंने कहा कि पत्रकार और साहित्यकार एक दूसरे पूरक हैं। पहले के पत्रकार साहित्यकार या भाषा के विद्वान रहे हैं, दुर्भाग्य से आज स्थिति कुछ अलग हो गई है।
अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में डॉ. शीतला प्रसाद दुबे ने कहा कि हिंदी भाषा और साहित्य को अपने साथ दूसरी भारतीय भाषाओं को भी लेकर चलना होगा।
सत्र में डा.अमिता दुबे, दुर्गा प्रसाद श्रीवास्तव, डॉ. ओमप्रकाश त्रिपाठी, मुंबई मराठी पत्रकार संघ की उपाध्यक्ष स्वाति घोसालकर और डॉ. नीलम वर्मा ने संबोधित किया। अतिथियों का धन्यवाद ज्ञापन शरद कुमार त्रिपाठी तथा डॉ. प्रेम शंकर त्रिपाठी ने किया।
सत्र का संचालन अरविंद मिश्रा ने किया।
समारोह स्थल पर नेशनल बुक ट्रस्ट तथा साहित्य अकादेमी द्वारा लगाई गई पुस्तक प्रदर्शनियां आगंतुकों के विशेष आकर्षण का केंद्र रहीं। महामहिम राज्यपाल ने भी इन प्रदर्शनियों का अवलोकन किया और उन्हें सराहा। इन प्रदर्शनियों में हिंदी,उर्दू, बांग्ला और अंग्रेजी साहित्य की पुस्तकें प्रमुखता से प्रदर्शित की गई थीं।
-कमलेश भट्ट कमल
1512, कारनेशन-2, गौड़ सौंदर्यम अपार्टमेंट, ग्रेटर नोएडा वेस्ट गौतमबुद्ध नगर उत्तर प्रदेश 201318. मो.9968296694.
-वाराणसी विरासत फाउंडेशन के कार्यकारी अध्यक्ष प्रो. राम मोहन पाठक जी ने सही कहा कि आज हमारे सरोकार बदल रहे हैं ऐसे में पत्रकारिता के जो सनातन मूल्य हैं, उस विरासत के संरक्षण का नई पीढ़ी पर दायित्व है। यह विरासत की देयता की क्रमबद्धता है
यह बिल्कुल सही है कि यह एक भाषिक प्रयोग भर नहीं था, बल्कि भारतीय जनमानस की चेतना को जगाने का साहसिक प्रयास था। द्विशताब्दी वर्ष का यह आयोजन विगत 200 वर्षों की विचारधारा, प्रतिबद्धता और संघर्ष की यात्रा है।
समस्त आयोजनकर्ताओं को तथा इसमें अपनी उपस्थिति दर्ज करने वाले व सम्मानित होने वाले भाषाविदों को।
कार्यक्रम की सफलता के लिये सभी कोee बधाई।
-वाराणसी विरासत फाउंडेशन के कार्यकारी अध्यक्ष प्रो. राम मोहन पाठक जी ने सही कहा कि आज हमारे सरोकार बदल रहे हैं ऐसे में पत्रकारिता के जो सनातन मूल्य हैं, उस विरासत के संरक्षण का नई पीढ़ी पर दायित्व है। यह विरासत की देयता की क्रमबद्धता है
यह बिल्कुल सही है कि यह एक भाषिक प्रयोग भर नहीं था, बल्कि भारतीय जनमानस की चेतना को जगाने का साहसिक प्रयास था। द्विशताब्दी वर्ष का यह आयोजन विगत 200 वर्षों की विचारधारा, प्रतिबद्धता और संघर्ष की यात्रा है।
समस्त आयोजनकर्ताओं को तथा इसमें अपनी उपस्थिति दर्ज करने वाले व सम्मानित होने वाले भाषाविदों को।