Wednesday, February 11, 2026
होमलघुकथाडॉ. किसलय पंचोली की दो लघुकथाएँ

डॉ. किसलय पंचोली की दो लघुकथाएँ

सीजर
वे नामी गायनोकोलॉजिस्ट हैं। रोज के पाँच से दस सीजर करना उनका रूटीन है। बढ़ती उम्र के साथ सौंदर्य के प्रति सजगता के चलते, अब तक वे शहर की अधिकाँश प्रसिद्ध ब्यूटीशियंस की सेवाऐं ले चुकी हैं। फेस लिफ्टिंग, लेजर ट्रीटमेंट और प्लास्टिक सर्जरी जैसे मंहगे उपाय भी करवा चुकी हैं। डॉक्टर हैं, जानती हैं बोटेक्स के इंजेक्शन निरापद नहीं सो वे उन्होंने नहीं लगवाए। लेकिन इधर पिछले कुछ महीनों से उन्हें लग रहा है कि अब उम्र की मार, पैसों के भार से भी दबाई नहीं जा पा रही।किसी ने उन्हें सलाह दी 
“आप डेफोडिल पार्लर गई हैं? वहां जाइए फिर देखिए अपने में फर्क।”
“डेफोडिल? वही ना मिल एरिया के पास छोटा-सा पार्लर। वहाँ क्या हाईजिन मेंटेन होता होगा?” वे संशय में पड़ीं। 
“आप एक बार जाकर देखें।” सलाहकार बहुत आश्वस्त थी। सो वे गईं डेफोडिल पार्लर। वहाँ उपलब्ध महंगे से महंगे ट्रीटमेंट के लिए अपॉइंटमेंट लेने लगीं। उन्होंने कई एडवांस ट्रीटमेंट फटाफट बुक करवाए।
 सहायिका ने कहा
“आप तनिक इंतजार कर लें। पहले आपको हमारी मेम से मिलना होगा। वे जैसे ही फ्री होती हैं मैं आपको उनसे मिलवाती हूँ।”
“फार व्हाट? वहाए? आप काम शुरू करो। मैं डाक्टर हूँ। मेरे पास इंतजार के लिए वक्त नहीं है।”
“आपकी बुकिंग में से क्या क्या एक साथ हो सकता है या नहीं हो सकता यह वे ही आपको बताएंगी। आपको रुकना पड़ेगा।”
” हद है। जब मैं एडवांस पेमेंट कर चुकी हूँ तब भी?”
 “जी, यहाँ का यही नियम है। पेमेंट की चिंता न करें। जो ट्रीटमेंट नहीं किया जाएगा उसका अमाउंट वापस भी हो जाएगा।”
मरता क्या न करता वे रुकीं। और डेफोडिल की ब्यूटीशियन से मिलीं। 
उसने उनकी स्किन, बालों की हेल्थ, टेक्सचर, एलर्जी टेस्ट, वजन, खानपान की आदतें आदि पूछी। और उनके द्वारा बुक किए गए दस अपॉइंटमेंट में से फिलहाल मात्र चार ट्रीटमेंट, वह भी दो दिन की अलग-अलग सिटिंग में लेने को कहा।
 इतना नामी गाइनेकोलॉजिस्ट के चौंकने के लिए काफी था। जिन ट्रीटमेंट की मनाही की गई उनमें से कुछ सबसे मंहगे भी थे।
 उन्हें लगा मिल एरिया के छोर पर व्यवसाय करने वाली इस ब्यूटीशियन के आगे वे खुद क्या हैं? कुछ भी नहीं।
क्योंकि उनके क्लिनिक और नर्सिंगहोम में जो भी स्त्रियाँ उपचार या सलाह के लिए आती हैं, वहाँ दिखाने के लिए बहुत कुछ चेक किया जाता है। पर उनके डाक्टरी प्रिस्क्रिप्शन में होते हैं मात्र तीन शब्द ‘इलेक्टिव सीजर ऑनली।’ 
उन्हें लगा ब्यूटीशियन की टेबल पर रखी हेयर कटिंग सीजर यकायक कितनी बड़ी हो गई है।
हिसाब 
“शशिकला, अचानक काम क्यों बंद कर रही है? पैसे बढ़वाना है? कुछ बता तो।” मैं हमारी खाना, बर्तन, झाड़ू-पोंछा वाली बाई से पूछ रही हूँ। पर वह एक ही रट लगाए है।
 “ये घर अब मला नी परवरता। संध्या काले मी आती। हिसाब लेने। बरोबर।” मुझे पैरों तले जमीन खिसकती लगी। सोचा उसे रोकने की और कोशिश करुँगी ।
 शाम को वह कुछ खुली। “बाई साब पैसा कम ऐसी बात नको। तुमारा सुभाव भी छान। पन अब मैं ये घर काम नहीं करना। मतलब नहींच करना।”
 “लेकिन क्यों?” मैंने फिर पूछा। डेटिंग के समय जब रवि ने कहा था उसके यहाँ  बाई है, मुझे कितना सुकून मिला था। 
 “मेरा कुछ नेम है। मैं फकत लड़कों काईज काम पकड़ती। पेले रवि साब के साथ बंगाली लड़का रहता। मैंने काम किया। फिर गुजराती छोरा आया। तब भी किया। गुजराती गया। रवि साब शादी बनाकर तुमको लाया। अब मैं यहाँ काम नहीं कर सकती।”
“कैसा बेतुका नियम है तेरा?” मैंने तनिक रोष से कहा।
टप टप टप टप शशिकला रोने लगी। फिर बोली।
” मेरा भी एको एक बेटा था।” उसने ब्लाउज में से छोटा-सा बटुआ खींचकर निकाला और मुझे फोटो दिखाने लगी।
” ये मेरा बेटा गजानन। मैंने पढ़ाया उसकू। इंजीनियर कंप्यूटर बनाया। बारा हजार पगार पाता था।” 
“अच्छा, फिर क्या हुआ?”
“उस दिन मैंने उसकी थाली लगाई। वह बोला आकर खाता हूँ। वो दोस्तों के साथ खंडाला चला गया। जाने कैसी काली घड़ी थी के रोड ऐकसडंट में गुजर गया। चार साल हो गया। ……अब मैं उसका जैसे लड़कों का खाना बनाती हूँ। मुझे लगता मैं मेरे गजानन को खाना खिला रही हूँ।……..
……. जो लड़का शादी बना लाता। उसका काम छोड़ देती। पन उसे खूब आसीस देती। येईच मेरा पक्का नेम हे। लाओ मेरा हिसाब।” उसने मेरे आगे हथेली फैलाते हुए कहा।
मैंने देखा उसके पक्के नेम ने उसकी हथेली को और पथरीला बना दिया है। फिर भी उस पर ‘अनब्याहे लड़कों को खाना खिलाना है’ के शशि की कलाएं चमक रही हैं। उसके अपने मन समझाऊ जीवन तरीके में भला मैं कैसे अड़चन बन सकती थी? मैंने उसका हिसाब जोड़ना शुरू कर दिया।

डॉ. किसलय पंचोली 
  • कहानी संग्रह “अथवा” रामकृष्ण, “नो पार्किंग” दिशा, नवजात शिशुओं के नामों का कोष  “नामायन” सुबोध प्रकाशन से प्रकाशित
  •  ज्ञानोदय, कथादेश, कथन, कथाक्रम, समावर्तन अक्षरा, प्रबुद्ध भारती,  प्रेरणा, विभोर स्वर अक्षर पर्व, मसिकागद, सेतु , वीणा आदि साहित्यिक  पत्रिकाओं  और कई  समाचार पत्रों  आदि में कहानियाँ प्रकाशित
  • अनेक साझा कहानी संग्रहों में कहानियां संकलित और प्रकाशित
  • ऑनलाइन कहानी संग्रह “इंदु की स्लाइड” अमेजन पर अपलोडेड .
  • एक कोट पुस्तक सात्विक सत्य योर कोट से प्रकाशित
  •  कहानियाँ आकाशवाणी इंदौर से प्रसारित. 
  • विज्ञान प्रकाश, विज्ञान प्रगति, साइंस इण्डिया  आदि में विज्ञान गल्प प्रकाशित . 
  • मराठी व गुजराती पत्रिकाओं में कहानियाँ अनुदित. 
  • कहानियों पर टेली फ़िल्में निर्मित. नाट्य रूपान्तर मंचित, यू ट्यूब व अन्य आदि पर वाचित. 
  •   कहानियां कादम्बिनी, कथाक्रम, कथादेश, कथाबिम्ब, कथा समवेत, अहा जिंदगी,  वनमाली कथा और अमेज़न पेन टू पब्लिश  आदि से पुरस्कृत.


RELATED ARTICLES

1 टिप्पणी

  1. सीजर लघु कथा
    डॉ किसलय जी बहुत अच्छी लघु कथा है,दअरसल इस युग में आदमी स्वयं की जिंदगी के प्रति बेहद जागरूक हो गया है
    सही मायने में कहेजिंदगी जीना सीख गया है इसी के चलते चाहे स्वस्थ हो शिक्षा हो आत्मनिर्भरता हो पर्सनैलिटी डेवलपमेंट हो या स्वयं की सुंदरता हो,सभी के लिए वह अपनी आमदनी के हिसाब से अपने ऊपर खर्च करना चाहता है एक ब्यूटीशियन के पास जब एक डॉक्टर अपना मेकओवर करना चाहती है तो उसे वहां ब्यूटीशियन से संपर्क करने के लिए बाकायदा काफी समय लग जाता है, तब उसे लगता है की मेरी डॉक्टरी की इतनी कठिन
    पढ़ाई के आगे तो इसका काम भी कितना महत्वपूर्ण हो गया है मेरे प्रीस्क्रिप्शन में सिर्फ यह लिखा होता है
    इलेक्टिव सीजर ओनली, तभी डॉक्टर की ब्यूटीशियन की टेबल पर पड़ी हुई सीजर पर ध्यान जाता है तो उसे लगता है कि यह सीजर बहुत ज्यादा बड़ी हो गई है।
    बेहतरीन प्रिय किसलय जी एक पेशे से डॉक्टर का अपनी किरदार से ब्यूटीशियन के पेशे के रुतबा कहे या आज की आवश्यकताओ में बड़ी उसकी अहमियत का अच्छा अवलोकन किया है साधुवाद

    कामवाली बाई शशि के द्वारा काम करने से इनकार कर देने पर कि मैं सिर्फ लड़कों का ही खाना बनाती हूं उनके विवाह हो जाने पर मैं उन्हें सिर्फ आशीर्वाद देता हूं लेकिन काम करना छोड़ देता हूं यह बात एक जीवन जीने की कला भी सिखाती है, जीवन को दुखी होकर जीने से अच्छा है कि कामवाली बाई का की बच्चा बेटा युवा अवस्था में खत्म हो गया था वह उसी की याद में युवा बच्चों का खाना बनाती है और सोचती है कि मैं अपने ही बेटे को भोजन करबा रही हूं
    सुंदर साधुवाद

कोई जवाब दें

कृपया अपनी टिप्पणी दर्ज करें!
कृपया अपना नाम यहाँ दर्ज करें

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

Most Popular

Latest