बहुत सामयिक सी कहानी लगी आपकी सुदर्शन जी! आजकल सबको विदेश जाकर कमाना और बसना ज्यादा लुभा रहा है। रिश्तों में संवेदनाएँ भी नहीं रहीं।
लेकिन अकेलेपन से दूर होने का सही रास्ता तलाशा। कहानी प्रेरणास्पद है ।अकेलेपन का दंश बहुत तकलीफ देता है। लोग डिप्रेशन में भी चले जाते हैं। इसको दूर करने के लिये बहुत से रास्ते हैं।
हर समस्या का समाधान है। बस! तलाशना पड़ता है।
बेहतरीन कहानी के लिए बहुत-बहुत बधाई ।
बहुत सामयिक सी कहानी लगी आपकी सुदर्शन जी! आजकल सबको विदेश जाकर कमाना और बसना ज्यादा लुभा रहा है। रिश्तों में संवेदनाएँ भी नहीं रहीं।
लेकिन अकेलेपन से दूर होने का सही रास्ता तलाशा। कहानी प्रेरणास्पद है ।अकेलेपन का दंश बहुत तकलीफ देता है। लोग डिप्रेशन में भी चले जाते हैं। इसको दूर करने के लिये बहुत से रास्ते हैं।
हर समस्या का समाधान है। बस! तलाशना पड़ता है।
बेहतरीन कहानी के लिए बहुत-बहुत बधाई ।