स्त्री सशक्तिकरण की मिसाल – पद्मश्री जनक पलटा मगिलिगन व शमशाद बेगम
नागपुर की साहित्यिक संस्था वामा विमर्श मंच ने अपने एक अभिनव आयोजन में देश विदेश से सशक्त महिलाओं एवं सुप्रसिद्ध साहित्यकारों को आमंत्रित किया और रचा महिला महोत्सव का नया इतिहास। महोत्सव में कविता व कहानी के साथ बात हुई स्त्री विमर्श और स्त्री सशक्तिकरण की। देश की दो सशक्त स्त्रियाँ जब मंच पर सादगी और उत्साह से अपने कार्य बताती रहीं तो हॉल करतल ध्वनियों से गूँज उठा। पर्यावरण हित में बरसों की साधना करने वाली पद्मश्री डॉ.जनक पलटा मगिलिगन जी और महिला कमांडों को प्रशिक्षित कर गाँव-गाँव में सुधार करने वाली शमशाद बेगम जी के निरंतर संघर्ष, हौसले, सकारात्मक प्रेरणा और परिणाम की कहानी सुनना किसी चमत्कार से कम नहीं लगा।
आयोजन का शुभारंभ दीप प्रज्वलन और आभा आसुदानी के सुरीले कंठ से निकली देवी माँ सरस्वती की वंदना से हुआ। वामा विमर्श मंच की अध्यक्ष रीमा दीवान चड्ढा ने आयोजन की संकल्पना और अपनी संस्था का संक्षिप्त परिचय दिया । उन्होंने बताया कि वे सौन्दर्य से शक्ति की ओर बढ़ती महिलाओं को कलम की साधना के साथ और सशक्त करना चाहतीं हैं इस हेतु अंतरराष्ट्रीय स्तर पर महिलाओं को एकजुट करने का प्रयास संस्था के माध्यम से कर रही हैं।
कांफिडेंट लड़कियों की गूँज और कीर्ति जी का सुमधुर कंठ
अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त कवयित्री डॉ. कीर्ति काले ने जब सुर छेड़े तो ताल पर ताल मिलाते लोग गुनगुनाने लगे –
ये है कांफिडेंट लड़कियाँ
ये है कांफिडेंट
नज़रों में चिंगारी इनके
बातों में हैं सैंट
सभागार में उपस्थित स्त्रियाँ सचमुच आत्मविश्वास से भर उठीं। ये थी कविता की ताकत और कीर्ति जी की आवाज़ का जादू। इस उत्साह में मिठास भरी नीतू गुजराल की पंजाबी कविता ने। सिंगापुर से हमारे निवेदन पर नागपुर पधारी नीतू गुजराल जी की कविता ने सबका बचपन लौटा दिया ।
याद औंदिया बहोत ने मेरियाँ बचपण दीयां सहेलियाँ
गलवखरियाँ पौंदियाँ गीटे खेडदियाँ
स्टापू दियाँ लिकां वौंदियां
झिड़काँ मेरे मापियाँ तो आपने मापियाँ वाँगर खाँदियाँ
याद औंदियाँ बहूत ने मेरियाँ बचपन दीयाँ सहेलियाँ
पंजाब की मिठास ने मानो कान में मिश्री घोल दी हो। ऐसी दो मीठी कवयित्रियों को पाकर
सभा मंत्रमुग्ध थी।
कार्यक्रम अध्यक्ष सीए श्वेताली ठाकरे जी ने महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने की प्रेरणा दी और बैकिंग व सिप प्लान समझाये । हमारे संरक्षक और मार्गदर्शक आदरणीय किशन शर्मा जी मंच पर विराजित थे । बरगद सी छाँव मिली और मिला अपने बड़ों का आशीर्वाद। संचालन की बागडोर को बेहद कुशलता से साध रहीं थीं।


