Monday, April 20, 2026
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डॉ. गरिमा भाटी की लघुकथा – वो फूलों-सी महकती एक लड़की

वो फूलोंसी महकती एक लड़की
लेकिन उसकी ज़िंदगी की सच्चाई उस महक से बिल्कुल अलग थी।
इन दिनों उसकी मजबूरी थी कि वह ऐसे व्यक्ति के साथ रहे, जिसके शरीर से ही नहीं, उसकी आत्मा से भी एक अजीबसी सड़ांध आती थी। यह सड़ांध केवल गंध नहीं थी, बल्कि एक ऐसा वातावरण था जिसमें उसका मन, उसका अस्तित्व धीरेधीरे घुटने लगता था।
जब भी वह आदमी अपने बदबू से भरे शरीर के साथ उसे छूता, तो उसे ऐसा लगता जैसे वह गंध उसके अपने शरीर में भी उतर आई हो। वह स्पर्श प्रेम का नहीं, एक बोझ का एहसास देता था। और उसका चुम्बनजो अक्सर उसकी इच्छा के विरुद्ध होता, उसे भीतर तक जड़वत कर देता। जैसे किसी ने उसकी चेतना को ही थाम लिया हो।
वह कईकई घंटों तक चुप बैठी रहती। अपने ही शरीर से आती उस गंध के साथ खुद को धीरेधीरे सड़ते हुए महसूस करती। कभीकभी उसकी आँखों से आँसू बिना आवाज़ के बहते रहते। वह रोती भी थीलंबे समय तक, बिना किसी के जाने।
जब उस गंध को सह पाना उसके लिए असंभव हो जाता, तो वह उठकर बाथरूम चली जाती। देर तक पानी के नीचे खड़ी रहती, जैसे पानी केवल उसके शरीर को नहीं, बल्कि उस एहसास को भी धो देगा जो उसकी आत्मा पर चिपक गया था।
उसकी ड्रेसिंग टेबल पर महँगे इत्र की कई शीशियाँ सजी रहती थीं। जाने कितने तरह के इत्र, पाउडर और खुशबुएँ वह अपने ऊपर लगा लेती, जैसे किसी अदृश्य सड़ांध को ढँकने की कोशिश कर रही हो। वह चाहती थी कि दुनिया को कभी पता चले कि उसके भीतर क्या सड़ रहा है।
लोग जब उसके पास से गुजरते तो कहते,
कितनी महकती हैजैसे फूलों की खुशबू हो।
उन्हें सचमुच वही दिखाई देता था।
एक फूलसी महकती लड़की।
लेकिन उन फूलों के नीचे छिपी हुई सड़ांध
वह केवल वही देख पाती थी।
डॉ. गरिमा भाटी
फ़रीदाबाद, हरियाणा
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3 टिप्पणी

  1. भाव तो महसूस हुआ किन्तु गंध अपनी प्रतीकात्मकता को स्पष्ट नहीं कर पायी, ऐसा हमने यह महसूस किया। इसके केंद्र में ‘मजबूरी’ शब्द है।
    किसी भी कथा में कार्य-कारण प्रभाव महत्वपूर्ण होता है। मजबूरी क्या है ? कारण जब तक पता नहीं चलेगा तब तक कथा प्रभावशाली नहीं बन पाएगी।ऐसा हम सोचते हैं

  2. Neelima ji maiN aap se sahmat huN. Katha meN kathya ki kami hai keval laghu hai. Vishaye sundar hai Bhash achchhi hai. Vistaar ki kami hai. Adhik nahiN likh sakti. Meray phone meN kisi kharabi ke karan Hindi, Urdu dono kho gai haiN keval aNgrezi rah gai hai isi liye Roman English ka sahara lena pada sorry.

  3. ओह्ह! कितनी ज्यादा गंध पर किसलिए सह रही वो गंध सड़न्ध थोड़ा अस्पष्ट है,

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