Tuesday, July 16, 2024
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वन्दना यादव का स्तंभ ‘मन के दस्तावेज़’ – ‘बदलाव ज़रूरी है

सदियों से बहती नदियाँ धीरे-धीरे अपना स्थान बदल लेती हैं। हवाएं कभी एक समान नहीं चलती। वे भी अपना रूख मोड़ती रहती हैं। प्रकृति का हर अंश अपना आकार, व्यवहार और आचरण बदलता है। आप भी प्रकृति का अंश हैं इसीलिए जहाँ हैं, वहीं जमे ना रहें।  
समय और स्थान बदलने से सकारात्मक बदलाव आते हैं। स्थान बदलना नवीन उर्जा, देता है। एक समय के बाद एक ढर्रे पर चलती जीवनचर्या, थकाऊ हो जाती है। और थके हुए इंसान ने कौनसी जंग जीती है? घर-परिवार और काम की परिधि में ऐसे ना उलझे कि जीना ही भूल जाएं।
हमारा जीवन सीमित समय तक है। इसी निर्धारित समय में घर-परिवार, काम-नौकरी और मित्र-परिचितों के बीच बंटे हुए समय में से अपनी पसंद का काम करने के लिए भी आपको ही समय निकालना है। इसीलिए टाइम मैनेजमेंट इस तरह करें कि कभी भी खुद को बंधा हुआ या जिम्मेदारियों मे जकड़ा हुआ ना पाएं। 
हर बार रूटीन को तोड़ें। आपने जिन जिम्मेदारियों के चक्र में खुदको क़ैद कर लिया है, उनसे कुछ समय के लिए दूरी बनाएं। अपनी पसंद का काम करें। घूमने जाएं या कुछ रचनात्मक करें। अपने आप को ताज़ा दम करने के बाद जब आप वापस काम पर लौटेंगे, निश्चित रूप से दोगुनी ऐनर्जी के साथ लौटेंगे। इस समय हर जिम्मेदारी उठाने के लिए आप ज्यादा जोश में होंगे। इसीलिए खुदको ताजा दम करने के लिए निरंतरता से बदलाव का समय निकालें।   यही प्रकृति का नियम है।
वन्दना यादव
वन्दना यादव
चर्चित लेखिका. संपर्क - [email protected]
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