Wednesday, April 8, 2026
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ख्वाहिशों का मेन्यू कार्ड पुरस्कृत

“मैं अकेला ही चला था जानिब-ए-मंज़िल मगर
लोग साथ आते गए और कारवाँ बनता गया”
प्रतिष्ठित साहित्यिक संस्था अंतर्राष्ट्रीय विश्व मैत्री मंच का बारहवां राष्ट्रीय सम्मेलन एवं 25 वां हेमंत स्मृति कविता सम्मान समारोह शनिवार, दिनांक 31 जनवरी, 2026 को भोपाल के “ला पर्ल” होटल के सभागार में आयोजित किया गया | सुबह 10:30 से संध्या 6 बजे तक तीन सत्रों, “अलंकरण सत्र, “लघुकथा सत्र” और “काव्य सत्र” में सभी कार्यक्रम संपन्न हुए ।
कार्यक्रम का आरंभ दीप प्रज्वलन एवं महिमा श्रीवास्तव वर्मा द्वारा प्रस्तुत की गई सरस्वती वंदना से हुआ।
अंतर्राष्ट्रीय विश्व मैत्री मंच की संस्थापक ,अध्यक्ष, वरिष्ठ लेखिका संतोष श्रीवास्तव ने अपने स्वागत वक्तव्य में कहा कि भारतीय संस्कृति के मूल में स्वागत की परंपरा अतिथियों के चरण पखार कर की जाती है। मैं अपने शब्दों के जल से यह कार्य कर रही हूं। उन्होंने नवाज़ देवबंदी का शेर सुनाते हुए अपनी वाणी को विराम दिया
यह मत सोच राह के जख्म कितने गहरे हैं
 बस यह सोच कि मंजिल का सुकून कितना बड़ा है।
हेमंत फांउडेशन की संस्थापक – सचिव डा. प्रमिला वर्मा ने “हेमंत परिचय” दिया। वहीं संस्था परिचय प्रदेश अध्यक्ष शेफालिका श्रीवास्तव एवं निर्णायक उद्बोधन उपाध्यक्ष डॉ. नीलिमा रंजन ने दिया।
 इस सत्र में देश-विदेश से चयनित साहित्यकारों को साहित्य की विभिन्न विधाओं, कला, पर्यावरण और समाज सेवा के क्षेत्रों में सम्मानित किया गया।
श्रीमती रूबी मोहंती को उनके कविता संग्रह ख्वाहिशों का मेन्यू कार्ड के लिए (25 वां )हेमंत स्मृति कविता सम्मान
पद्मश्री कैलाश चंद्र पंत के कर कमलो द्वारा प्रतीक चिन्ह,शॉल,श्रीफल एवं पुरस्कार राशि प्रदान कर प्रदान किया गया ।
अलंकरण सत्र की अध्यक्षता करते हुए पद्मश्री श्री कैलाश चंद्र पंत ने संस्था एवं पुरस्कृत साहित्यकारों को अपने आशीर्वचनों से नवाजा।
 मुख्य अतिथि प्रेम जनमेजय ने कहा- ‘ ऐसे समय में जब सम्मान विपरीत अर्थ दे रहा हो, सम्मान समारोह का आयोजन बड़े जोखिम का काम है। संस्था यह जोखिम प्रतिवर्ष उठाती है।
 विशिष्ट अतिथि राम स्वरूप दीक्षित ने कहा-
‘आज जब साहित्य के लिए जगहें सिमटती , सिकुड़ती जा रही हैं, तब बिना किसी संसाधन और सरकारी या गैर सरकारी सहायता के ऐसा राष्ट्रीय आयोजन कर ले जाना बहुत मायने रखता है। ‘
हेमंत स्मृति कविता पुरस्कार के अलावा साहित्य और समाज के लिए काम करने वाले लोगों को इस आयोजन में पुरस्कृत करना इसे एक बहुउद्देशीय और बहुअर्थी आयोजन बनाता है।’
विशिष्ट अतिथि ऋषि कुमार शर्मा ने कहा – ‘आज जब दुनिया अनेक विभाजनों, संघर्षों और असहमतियों से जूझ रही है, तब साहित्य मैत्री, संवाद और संवेदना का सेतु बन सकता है। विभिन्न देशों, भाषाओं और संस्कृतियों से आए रचनाकारों की उपस्थिति इस बात का प्रमाण है कि भावनाएँ सार्वभौमिक होती हैं और रचनात्मकता किसी सीमा में बंधी नहीं होती।
 अपने बेहद भावपूर्ण एवं जीवंत वक्तव्य से संचालन करते हुए संस्था महासचिव मुजफ्फर इक़बाल सिद्दीकी ने समा बांधा एवं धन्यवाद ज्ञापन जया केतकी ने किया। अलंकरण सत्र के पश्चात द्वितीय सत्र लघु कथा, एवं तृतीय सत्र कविताएं एवं गजलों का रहा। इस सत्र में कविताओं ,गजल ,गीतों के निर्झर मुक्त भाव से झरे।
श्री कैलाश चंद्र पंत को पद्मश्री घोषित किए जाने के उपलक्ष में एवं डॉ संजीव कुमार को इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में नाम दर्ज होने पर संस्था द्वारा उनका अभिनंदन किया गया ।
कार्यक्रम में भोपाल शहर के पत्रकारों साहित्यकारों एवं झांसी ,दिल्ली ,मुंबई ,इंदौर , सतना ,टीकमगढ़ ,देहरादून ,पुणे ,गुरुग्राम गाजियाबाद ,नोएडा ,अहिल्या नगर आदि विभिन्न शहरों से आए हुए साहित्यकारों और पत्रकारों की उपस्थिति रही।
प्रस्तुति
प्रमिला वर्मा
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