1 -तथागत
अगर मैं बन जाऊँ,
तथागत।
तो खोज सकूँगी,
मन के भीतर
असीम शांति।
जो बन जाऊँ मैं
निर्विकार बुद्ध।
तो हो सकूँगी
विषय से मुक्त।
शायद तब,
सरलता से
समझ पाऊँगी ,
इस जीवन का सार।
2-
अनेक कठिनाई से
लड़ने के उपरांत,
जब बाँटनी चाही ,
अपनी चंद खुशी।
तो दुनियाँ ने कहा,
दिखावा करते हैं।
हमेशा की तरह ही
समझाना चाहा ,
सही और गलत में भेद।
तो ,दुनियाँ ने कहा,
बहुत ज्ञान बघारते हैं।
जब चुपचाप,
खामोशी ओढ़ ली,
तो कहने लगे ,
बेहद अहंकारी हैं।
बात छुपाते हैं।
तब मन ने कहा,
जिंदगी का आनंद लो।
ये जो दुनियाँ है,
कभी पार पाने नहीं देगी।
- इरा ठाकुर
कहानी ,कविताएँ ,लेख, उपन्यास, काव्य-संग्रह और कहानी-संग्रह प्रकाशित हो चुकी है ।
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